प्रशांत टंडन – इतिहास मोदी को क्या जगह देगा?

6:24 pm Published by:-Hindi News
New Delhi: Prime Minister Narendra Modi gestures as he speaks at a function to launch the MSME Support and Outreach Programme, in New Delhi, Friday, Nov 2, 2018. (PTI Photo/Kamal Kishore) (PTI11_2_2018_000134B)

प्रशांत टंडन

हमारे दौर का इतिहास अभी बन रहा है – लिखा आगे जायेगा. इतिहास घटनाओं को समेटता हुआ अपने अध्याय लिखता है पर उसके हर अध्याय का केंद्र उस दौर के व्यक्ति होते हैं जो घटनाओं के केंद्र में होते हैं या उन्हे प्रभावित कर रहे होते हैं. दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी की भी फिक्र होगी कि इतिहास उन्हे कैसे याद करे लेकिन ये काम मोदी को नहीं इतिहास को करना है कि वो उन्हे किस खाने में डाले.

21वीं सदी के भारत का रोडमैप राजीव गांधी ने तैयार कर दिया था और उसी रास्ते पर चल कर भारत टेक्नोलॉजी युग में अपनी प्रासंगिकता बनाए रख पाया. दूसरा काम मनमोहन सिंह ने किया भारत को एक बड़ा बाज़ार बना कर जिसकी वजह से वैश्विक मंच पर अपने पक्ष में सौदेबाजी मदद मिलती है. इन दोनों रोडमैप की टाइमिंग सोवियत रूस के बिखरने के बाद तेजी से बदलती दुनिया के अनुरूप थी और देश को आगे लेकर कर गई. 21वीं सदी के प्रधानमंत्रियों में गिनती में मोदी अभी तक वहाँ नहीं हैं जहां इतिहास राजीव गांधी और मनमोहन सिंह को रखेगा.

राजीव गांधी जब सत्ता में आये तब पंजाब और असम जल रहा था. दोनों राज्यों में उन्होने समझौते किए जिससे हिंसा रुकी और लोकतंत्र की बहाली हुई. मोदी से सामने कश्मीर ऐसा ही एक मौका था जिसे उन्होने गवां दिया. कश्मीर के लोगों से संवाद की जगह उन्होने दो काम किये जिससे रास्ता और भी मुश्किल हुआ है. पहला उन्होने कश्मीरियों को सबक सिखाने की बिना वजह की ज़िद ठान ली दूसरा उन्होने कश्मीर का इस्तेमाल उत्तर भारत में अपनी हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की राजनीति चमाकाने के लिए किया. इन दोनों वजह से उन्होने अपना कद छोटा करने का काम किया. इतिहास उनके साथ न्याय करता है जो अपने दौर की समस्याओं का हल निकालते हैं.

पिछले पांच साल के कार्यकाल में मोदी ऐसा कुछ नहीं कर पाये जो भविष्य के इतिहासकार बाध्य करेगा कि उन्हे वो स्थान दे दूसरे बड़े नेताओं को मिला है. पांच साल आर्थिक विकास दर किसी भी वक़्त पिछली सरकार के आंकड़े को नहीं छू पाई. बाकी सभी स्तर पर आर्थिक विफलतायें आर्थिक विकास की धीमी गति से जुड़ी हैं.

मोदी अभी भी 2002 में उनके शासनकाल में हुये मुसलमानों के नरसंहार के लिए ही जाने जाते हैं. उनका बायोडेटा बिना 2002 के नहीं लिखा जा सकता है. नफरत की राजनीति ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है. वो उसी रास्ते से पहली बार और फिर दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. उनकी इस प्रचंड जीत के पीछे नफरत की राजनीति के अलावा कुछ और कारण तलाशना सच्चाई से मुह मोड़ना होगा.

टाइम मैगज़ीन का दिया हुआ महा विभाजनकारी का तमगा ही उनकी राजनीतिक पहचान है जिससे मोदी कभी बाहर निकल ही नहीं सकते. निकलेंगे तो अपनी राजनीति दांव पर लगा लेंगे. यही उनका भूत, वर्तमान और भविष्य है. इंतिहास मोदी को नफरत परोसने वालों की कतार में बैठाएगा.

Loading...

खानदानी सलीक़ेदार परिवार में शादी करने के इच्छुक हैं तो पहले फ़ोटो देखें फिर अपनी पसंद के लड़के/लड़की को रिश्ता भेजें (उर्दू मॅट्रिमोनी - फ्री ) क्लिक करें