राजीव गांधी पर पीएम मोदी का बयान, सवाल – ये कैसी राजनीतिक संस्कृति हम विकसित कर रहे हैं ?

2:38 pm Published by:-Hindi News

पर्थेश पटेल

1984 को इंदिरा गांधी की हत्या कर दी जाती है. 40 साल के राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनते हैं. 21 मई 1991, राजीव गांधी 46 साल के थे. और उन्हें बम से तमिलनाडु में उड़ा दिया जाता है.

2019 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लिए जान देने वाले 46 साल के स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के लिये कहते हैं, ‘तुम्हारा बाप भ्रष्टाचारी नंबर वन होकर मरा’

आपको दुख नहीं होता ? आपको अफसोस नहीं होता ? आप इसे आम मानते हो. मर चुके प्रधानमंत्री को लेकर इतने बड़े देश का प्रधानमंत्री ऐसा बयान देता है. और उस बयान को नॉर्मल बना दिया जाता है.

दिल्ली के सीएम को कोई आवारा गाड़ी पर चढ़कर थप्पड़ मार देता है. बार-बार यही होता है. और आपको दुख नहीं होता ? अफसोस नहीं होता ?

आप उस पर चुटकले बनाते हो. हंसते हो. उनका वाला पिटा. हमारा वाला नहीं. इस देश की ये संस्कृति, ऐसे संस्कार कभी नहीं रहे. और राजनीतिक संस्कृति तो ऐसी कभी रही ही नहीं.

अटल जी ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि मैं राजीव गांधी की वजह से जिंदा हूं. नेहरू ने सार्वजनिक तौर पर अटल जी की तारीफ की. सरदार पटेल ने नेहरू को अपना नेता माना.

गांधी के कहने पर पीएम के पद के लिए चूं नहीं की. घोर आलोचक होने के बावजूद लोहिया ने नेहरू के लिए ऐसा कभी नहीं कहा.

चीन से युद्ध हारने के बाद भी संघ के नेताओं ने नेहरू को कायर कभी नहीं कहा. अब मर चुके नेहरू के लिए आपने पिछले 5 साल में क्या-क्या नहीं बोला. नेहरू की आत्मा तक को निचोड़ लिया.

तो अब राजीव का नंबर. ये कैसी राजनीतिक संस्कृति हम विकसित कर रहे हैं. और लोग हंस रहे हैं. संवेदनशीलता नहीं दिखा सकते तो मूर्खता का प्रदर्शन तो मत करिये.

यही देश है जो इंदिरा की मौत पर बिलख रहा था. गांव-गांव में लोग मुंडन करा रहे थे. तेरहवीं कर रहे थे. यही देश है जो नेहरू की मौत के बाद पूछ रहा था अब हमारा क्या होगा ? दुनिया सवाल कर रही थी भारत बिखर जाएगा ? यही देश है जो नेहरू की मौत पर लिख रहा था- अब कौन.

यही देश है जो राजीव की मौत के बाद सुन्न हो गया था. और अब इसी देश को उनकी मौत का मजाक बनाते चुटकले फॉरवर्ड करने में शर्म नहीं आती.

मरने के बाद तो दुश्मन के लिए भी गलत शब्द नहीं निकलते. हम ऐसे कब से बन गए ? सवाल सिर्फ मोदी का नहीं है. सवाल किसी एक थप्पड़ का भी नहीं है.

सवाल हमारी अपनी संस्कृति और पहचान का है. बड़े-बड़े पत्रकार केजरीवाल को लेकर चुटकले बना रहे हैं. शर्म है. धिक्कार है. तुम्हारे ज्ञान पर. तुम्हारी सोच पर. तुम्हारे होने पर. सच कहता हूं अगली बार से ऐसा कुछ करो तो अपने घर में रखी किताबों को और अपने बुजुर्गों की यादों को आग लगा देना.

तुम ऐसा बनोगे उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा.

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