गुरदीप सिंह सहगल

अगर आप मोदी जी से प्यार करते हैं, तो भी इस तस्वीर को आप ज़रूर देखें। ये तस्वीर उस भविष्य का आइना है, जो आप के लिए भी रचा जा रहा है।

बीदर, कर्नाटक के एक स्कूल के दो बच्चे हैं, जिनसे चार पुलिसकर्मी किसी अपराधी की तरह पूछताछ कर रहे हैं। एक नहीं, चार चार पुलिसकर्मी। फिर बाक़ायदा इसकी फ़ोटो भी जारी की है।

और क्या क़ुसूर है बच्चों का? यही कि स्कूल के एक नाटक में हिस्सा लिया था, जिसमें NRC के ख़िलाफ़ बातें कही गयी थीं।

आप लोग, जो मेरे फ़ेसबुक मित्र हैं, आपका – मेरा जो समाज है, ये बच्चे उसी समाज के हैं। आप में से बहुत से मोदी को बहुत चाहते हैं । लेकिन मैं और आप ये भी जानते हैं कि बहुत बार हमारे-आपके बच्चे हमसे अलग विचार रखते हैं। नहीं मानते हमारे विचार।

बहुत बार वे आपके मोदी प्रेम का समर्थन भी करते हैं, और BJP के नेताओं के ऊलज़लुल बयानों का विरोध भी करते हैं। वो भी मज़ाक़ उड़ाते हैं कि गोबर के बंकर परमाणु विकिरण नहीं रोक सकते हैं। वो भी हँसते हैं जब कोई नेता कहता है कि यज्ञ से प्रदूषण समाप्त हो सकता है या फिर कि ‘ओम् रोम जूम’ जपने से फसल अच्छी होती है और मोर के बच्चे आँसुओं से पैदा होते है। आजकल बहुत से NRC का विरोध भी कर रहे है।

इसलिए ज़रूरी तो नहीं कि वो हमारी आपकी बातों को मानें या विचारों को माने। लेकिन अगर से मतभेद सरकार के ख़िलाफ़ है, तो यूँ पुलिस अपराधियों की तरह घेर कर पूछताछ करेगी, तो क्या आप खुद अपने बच्चों के लिए ऐसा समाज चाहते हैं?

आज ये दो बच्चे हैं, लेकिन अगर आप इसके मौन समर्थन में रहेंगे, तो आग हमारे द्वार भी पहुँचेगी। क्योंकि हम सबको और हमारे बच्चों को भी लोकतंत्र की आदत है। इसीलिए हम खुल कर अपनी बात कहते आए हैं और कह कर खुश भी महसूस करते आए हैं।आपके बच्चे भी इसी ख़ुशी को महसूस करते रहें, बिना पुलिस के, सत्ता के ख़ौफ़ के, ये तो आप भी चाहेंगे।

इसलिए इस तस्वीर से विचलित होना ही चाहिए। ये छोड़िए कि उन दोनों बच्चों की मनोस्थिति क्या रही होगी पुलिस से मिल कर, ये भी न सोचें कि क्या दूरगामी असर होगा उन पर इस पुलिसिया पूछताछ का और उसकी फ़ोटो का।

बस यही सोच लीजिए कि अपने बच्चों के लिए कैसा समाज चाहिए।

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