तीन तलाक के बहाने मुसलमानों की पहचान खत्म करने की साजिश

11:30 am Published by:-Hindi News
mohd anas
मोहम्मद अनस वरिष्ठ पत्रकार

निकाह कैसे करें?
आरएसएस बताएगी।
तलाक कैसे दें?
आरएसएस बताएगी।

तो फिर आरएसएस जामताड़ा के मिनहाज अंसारी जिसे वाट्सएप पर मरी हुई गाय पर टिप्पणी करने के बाद पुलिस हिरासत में पीट पीट कर मार दिया गया उसपे कुछ क्यों नहीं बताती। बताए की न्याय सबके लिए बराबर होना चाहिए। सिर्फ बताए ही क्यों, न्याय सुनिश्चित कराए क्योंकि उससे बड़ी ताकत वर्तमान में किसी के पास नहीं। मोदी सरकार अपने मंत्री को अख़लाक के हत्यारे के मरने पर श्रद्धासुमन अर्पित कराने क्यों भेजती है? क्यों प्रधानमंत्री लखनऊ आने पर जय श्री राम, जय जय श्रीराम चिल्लाते हैं। क्या प्रधानमंत्री इस तरह से समान नागरिक संहिता देश में लागू करवाएंगे?

समान नागरिक संहिता सिर्फ तलाक तक क्यों सीमित रहे? हर स्तर पर समान व्यवहार लागू हो। अकेले तलाक ही क्यों। सच्चर समिति की रिपोर्ट लागू हो जाए तो मुसलमानों के हालात बेहतर वैसे ही जाएंगे। यूनीफॉर्म सिविल कोड का पक्षधर मैं भी हूं, तीन तलाक का सख्त विरोधी हमेशा से था पर आज जैसे हालात बना दिए गए हैं मुल्क के उन परिस्थितियों में मुसलमानों के नियम कानून से छेड़छाड़ सिर्फ उनकी पहचान खत्म करने की साज़िश भर है उससे अधिक कुछ नहीं।

जिस संगठन के इशारों पर केंद्र सरकार चल रही है उस संगठन का महिलाओं के प्रति कैसा नज़रिया है यह किसी से छुपा नहीं है। वह मुस्लिम महिलाओं के हित में कदम उठाएगी यह सबसे बड़ी भूल है।

तीन तलाक से पहले महिलाओं को इस लायक बनाओ की जीना सीख सके 

मैं यदि औरत होती, मेरा मर्द मुझे रोज मारता- पीटता तो मैं उसे एक हफ्ते में छोड़ देती। यदि वह मुझे वापस अपने घर ले जाने को आता तो गरिया कर भगा देती।
तीन तो क्या तेरह तलाक वह शादी के दसवें दिन दे कर भाग जाता। फिर दूसरी शादी करती। वो भी ऐसा करता तो मैं उसे भी छोड़ देती।
ये है असली स्त्री सशक्तिकरण। अरे दे दिया तलाक अच्छा किया। ऐसे पति के संग कभी न रह पाऊं मैं जिससे इस हद तक मन मुटाव हो जाए कि वह मुझे और मैं उसे नहीं देख सकूं। जो हर रोज़ मार पीट करे। शक करे। नौकरों की तरह काम कराए।

तीन तलाक तो बहुत बाद की बात है, पहले औरत को इस लायक बनाइए की वह हर हाल में जीना सीख सके। अल्ट्रा फेमिनिस्ट थ्योरी का हिमायती हूं मैं। मर्द मने लुल। औरत सब कुछ है। मर्द कुछ भी नहीं। मस्त रहेंगे। सारे मर्दों को जलाएंगे। अकेली लड़कियां, खुशहाल लड़कियां। किसकी इतनी हिम्मत जो हम लड़कियों को तलाक दे। अरे हम देंगे तलाक। ले तलाक । ले तलाक।

mohd anas
मोहम्मद अनस – लेखक जाने माने पत्रकार है

नोट – उपरोक्त लेखक के निजी विचार है कोहराम लेखक द्वारा कही किसी भी बात की ज़िम्मेदारी नही लेता 

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