अहमदाबाद

मारिदा गांव के बच्चे उन्हें प्यार से अब्दुल चाचा कहते हैं। अब्दुल वोरा एक रिटायर्ड स्कूल टीचर हैं। उन्होंने एक अनूठी पहल करते हुए सरस्तवी का मंदिर बनवाया है। यह मंदिर गांव के स्कूल में है।

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अब्दुल कहते हैं,’मैं सबसे पहले एक टीचर हूं। बाकी चीजें बाद में आती हैं। बच्चे मेरी प्रेरणा हैं और उनकी देवी सरस्वती हैं। इसलिए मैंने यह मंदिर बनवाया।’ अब्दुल ने अपनी बचत का एक बड़ा हिस्सा मंदिर बनवाने में लगा दिया। मंदिर बनवाने में पांच साल लगे और कई गांववालों ने इसे बनाने में भरपूर मदद की।

इतना ही नहीं, अब्दुल ने बच्चों को मंदिर में पूजा करना भी सिखाया। एक स्कूल टीचर ने बताया,’मंदिर बनवाने का काम अब्दुल ने शुरु किया। बाद में सभी गांव वाले इसमें जुट गए।’ अब्दुल कठलाल में ट्रेनिंग के दौरान सरस्वती से प्रेरित हुए। उन्होंने बताया कि गांव में सरस्वती का मंदिर बनवाना उनकी इच्छा थी।

अब्दुल ने बताया, ‘इस गांव का हर शख्स मेरी इज्जत करता है। मैंने एक टीचर के रूप में अपनी सेवा दी और अब मैं गांव के लोगों की सेवा करना चाहूंगा।’ अब्दुल के सबसे बड़े बेटे की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

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