अगले हफ्ते अमरीका के राष्ट्रपति का कार्यभार संभालने जा रहे जोसेफ आर. बाइडन जूनियर ने आर्थिक पैकेज का एलान कर दिया है। इस पैकेज के तहत एक ख़ास आमदनी की सीमा तक के सभी अमरीकी नागरिकों को 1400 डॉलर का एक चेक मिलेगा। भारतीय रुपये में 1 लाख से कुछ अधिक होता है। दिसंबर महीने में भी 600 डॉलर का चेक मिला था। यही नहीं बेरोज़गारों को भी हर सप्ताह 400 डॉलर का चेक दिया जाएगा। आपातकालीन बेरोज़गारी बीमा कार्यक्रम के तहत यह पैसा दिया जाएगा। ऐसे कामगारों को यह पैसा दिया जा रहा है जिनकी कोरोना के कारण नौकरी चली गई है। इसके पहले 11 सप्ताह तक 300 डॉलर दिए गए थे। जब महामारी आई थी तब बेरोज़गार हुए लोगों को हर सप्ताह 600 डॉलर मिले थे। धीरे धीरे यह राशि कम हो गई।
ये सिर्फ़ केंद्र सरकार की राशि है। फ़ेडरल सरकार की तरफ़ से बेरोज़गार को हर सप्ताह 400 डॉलर मिलेंगे। अगले छह महीने तक। मान लीजिए आपकी नौकरी चली गई और आप जिस राज्य में रहते हैं वहाँ की सरकार भी भत्ता देगी। अलग अलग राज्यों में भत्ते की राशि अलग है क्योंकि अमरीका में बेरोज़गारी राज्य का विषय है। मान लीजिए कि आप पेन्सिल्वेनिया में रहते हैं। वहाँ का बेरोज़गारी भत्ता 700 डॉलर प्रति सप्ताह है। तो इस तरह से फ़ेडरल सरकार और राज्य सरकार का मिला कर आपको 1100 डॉलर का भत्ता मिलेगा। हर सप्ताह। महीने का 4400 डॉलर। भारत में क्या मिलेगा यह जानने के लिए आगे का पैरा ध्यान से पढ़ें।
भारत में भी करोड़ों लोग बेरोज़गार हुए। उन्होंने ऐसी कोई राशि सरकार से नहीं मांगी न सरकार ने दी। बेशक भारत में सरकार ने ग़रीबों को छह महीने तक मुफ्त अनाज दिया। जनधन खाते में तीन बार 500 रुपये डाले गए। मिडिल क्लास के लिए 20 लाख करोड़ का पैकेज आया था। उसका क्या हुआ किसे मिला किसी को पता नहीं। वह पैकेज लोन की शक्ल में था। अमरीकी की तरह सीधे किसी को मदद नहीं दी गई है। भारत में बहुत से छात्रों के पास एडमिशन के पैेसे नहीं हैं। कइयों की नौकरी चली गई है। बैंक वाले लोन वसूली के लिए दरवाज़े पीट रहे हैं। उन लोगों की इस बीस लाख करोड़ की हेललाइन वाले पैकेज से खास मदद नहीं मिली। भारत के बेरोज़गारों को अमरीका जाने की ज़रूरत नहीं है। 1400 डॉलर का पैकेज लेने के लिए कोई ज़रूरी नहीं है कि आप अमरीका जाएं।
भारत के बेरोज़गारों और मिडिल क्लास को यह सब चाहिए भी नहीं। राजनीति उनकी ज़रूरत को ख़ूब समझती है। भारत के युवाओं और मिडिल क्लास को एक ही चीज़ चाहिए। धार्मिक पहचान। कई वीडियो को देखता हूं। समूह में आते ही उनके चेहरे की रौनक़ बदल जाती है। चेहरे पर लालिमा छा जाती है। बाइक पर बैठ कर झंडा लगा कर उन्हें लगता कि धर्म का काम कर रहे हैं। अधर्म में डूबी राजनीति उन्हें धर्म पताका पकड़ा चुकी है ताकि वे धर्म के नाम पर राजनीति के हर अधर्म का साथ दे सकें। ललाट पर पट्टी और हाथ में पताका। बाइक सवारों के झुंड में आप जब इन युवाओं को देखेंगे तभी समझ पाएंगे कि गर्व के हर भाव से कितने ओतप्रोत हैं।
सरकार को चाहिए कि अपनी झूठ की राजनीति पर पर्दा डालने के लिए युवाओं को समय समय पर धर्म का पताका पकड़ाते रहे। धर्म के नाम पर जमा झुंड के सामने कौन बेरोज़गारी और खराब अर्थव्यवस्था की बात करेगा। लोगों को लोगों से चुप कराने के लिए 1400 डॉलर का चेक फालतू में क्यों बर्बाद करना है। धर्म का पताका दे देना है ताकि राजनीति का अधर्म अपनी पताका लहराते रहे। दावे के साथ कहता हूँ। एक युवा को नौकरी से निकालने के वक़्त टर्मिनेशन लेटर के साथ साथ वह पूरे मोहल्ले में मिठाई बाँटता जाएगा। बताता जाएगा कि नौकरी गई है लेकिन धर्म का पताका मिला है। भारत के नौजवानों की न तो कोई जवानी है। न कहानी है।