Monday, October 18, 2021

 

 

 

रवीश कुमार: गुजरात चुनाव में बीजेपी का टिकट- कटेगा, मिलेगा और फिर कटेगा

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रवीश कुमार

बाजेपी को 2007 में 117 विधायक मिले थे। इनमें से 40 से अधिक विधायकों का टिकट 2012 में काट दिया गया था। इस बार कितनों का कटेगा?

हर पार्टी अपनी जीत के लिए रणनीति बनाती है। गुजरात में बीजेपी की जीत की रणनीति एक अहम हिस्सा है विधायकों का टिकट काटना। इस बार भी खूब कटेंगे। इसका मतलब यह नहीं कि दूसरे दल विधायकों के टिकट नहीं काटते हैं। बीजेपी इतना टिकट क्यों काटती है? क्या उसके विधायक जीत कर काम नहीं करते हैं, जनता का सामना नहीं कर सकते, या विधायकों को पता है कि दोबारा टिकट तो मिलना नहीं तो काम क्यों करें?

हमने विधानसभा वार नामों की सूची बनानी शुरू की। 55-56 सीटों तक जाकर रूक गया। http://www.elections.in/gujarat पर जाकर देखने लगा। बेशक मुझसे ग़लती हो सकती है इसीलिए आगे तक नहीं देखा। लेकिन जो नतीजे आए वो दिलचस्प हैं। आप उन्हें देखते हुए गेस कर सकते हैं कि किस सीट पर किसका टिकट कटने वाला है और टिकटों की सूची आने पर मिला भी सकते हैं कि गेस सही हुआ या नहीं। अच्छा होता कि सभी सीटों का 2002, 2007 और 2012 के जीते उम्मीदवारों को देख पाता। पर कोई बात नहीं।

साबरमती विधानसभा में बीजेपी ने 2002 से कभी किसी उम्मीदवार को दोबारा टिकट नहीं दिया है। इस बार कहीं 2012 के जीते उम्मीदवार का टिकट न कट जाए! धनेरा विधानसभा में भी तीनों चुनाव में अलग अलग उम्मीदवार उतारे हैं। इस सीट पर 2012 में टिकट बदला तो बीजेपी का उम्मीदवार हार गया। इस बार भी यहां किसी नए को ही मिल सकता है।

भुज में भाजपा ने 2007 के विधायक को 2012 में नहीं दिया। क्या 2012 के विधायक को टिकट मिलेगा?

वाव विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा ने 2012 में 2007 के विधायक का टिकट काट दिया। 2012 वाले को 2017 में टिकट मिलेगा?

वडगाम- 2002 में बीजेपी ने श्रीमाली बाबुलाल चेलाभाई को टिकट दिया। कांग्रेस से हार गए। 2007 में बीजेपी ने फकीरभाई राघाभाई वाघेला को टिकट दिया वो जीत गए। राधा भाई 2012 में कांग्रेस से हार गए। मुमकिन यहां का बीजेपी उम्मीदवार नया होगा।

पालनपुर विधानसभा- 2002 में बीजेपी के कचोराया कांतिलाल धर्मदास जीते थे। 2007 में बीजेपी ने इन्हें टिकट नहीं दिया। गोविंदभाई माधवलाल प्रजापति को टिकट दिया उन्हें 66,835 वोट मिला और जीत गए, उन्हें 2012 में टिकट मिल गया मगर वे कांग्रेस से हार गए। यहां बीजेपी अबकी बार नए उम्मीदवार को टिकट दे सकती है।

दीसा से 2012 में बीजेपी ने 2007 में जीते हुए विधायक का टिकट काट दिया। नया उम्मीदवार कांग्रेस से हार गया। 2014 में जब उपचुनाव हुआ तो बीजेपी के लेबाभाई हार गएं। इसबार यहां से बीजेपी का नया उम्मीदवार हो सकता है।

देवदर विधानसभा- 2007 में बीजेपी के विजयी विधायक का टिकट 2012 में कट गया। 2012 में केशाजी शिवाजी चौहान जीत गए। वोट में 27000 की वृद्धि हुई। यहां टिकट कट सकता है?

राधनपुर विधानसभा- 1998 से बीजेपी जीत रही है मगर यहां 2007, 2012 में अलग अलग उम्मीदवारों को टिकट दिया। इसलिए इस बार 2012 के उम्मीदवार का टिकट कट सकता है।

चनाश्मा विधान सभा- यहां 2012 में भाजपा ने 2007 के जीते हुए विधायक को टिकट नहीं दिया। 2002 के उम्मीदवार को बीजेपी ने 2007 में यहां टिकट नहीं दिया था। यहां के विधायक का टिकट बदल सकता है।

पाटन- 2002, 2007, 2012 में बीजेपी ने अलग अलग उम्मीदवार उतारे और सभी जीते। 2002 में आनंदीबेन पटेल इसी सीट से जीती थीं।

खेरालु विधानसभा- बीजेपी ने यहां 2002 के उम्मीदवार का 2007 में टिकट काट दिया मगर 2012 में 2007 वाले को टिकट दिया। बीजेपी जीत गई। इस बार इनके टिकट कटने की उम्मीद की जा सकती है।

ऊंझा में नारायणभाई लल्लुदास पटेल को 2012 में दिया, 2007 में दिया। दोनों बार जीते। इस बार लल्लुदास जी को टिकट मिलेगा?

विसनगर विधानसभा में 2007 और 2012 में टिकट नहीं बदला है। वही उम्मीदवार जीत रहा है। इनका टिकट बदलेगा?

मेहसाणा से 2012 में नितिन पटेल जीते। मगर यहां से उन्हें 2007 के जीते हुए उम्मीदवार का टिकट काट कर उतारा गया था। क्या नितिन पटेल इस बार भी मेहसाणा से लड़ेंगे?

इदर विधानसभा से 1998 से बीजेपी के रमनभाई वोरा ही जीत रहे हैं। कभी टिकट नहीं बदला। ज़रूर यह उम्मीदवार ज़बरदस्त रहा होगा, क्या इस बार भी इन्हें टिकट मिलेगा या कट जाएगा?

जमालपुर से अशोक भट्ट 2002 से जीत रहे हैं। कहीं इनका नंबर तो नहीं कटेगा?

दासक्रोई का उम्मीदवार भी 2002 से लगातार जीत रहा है। क्या यहां का उम्मीदवार बना रहेगा या किसी नए को मिलेगा?

कलोल गांधीनगर से 2007 और 2012 में एक ही उम्मीदवार जीत रहा है. क्या यहां से उम्मीदवार बदलेगा?

एलिस ब्रीज विधानसभा से बीजेपी के रमेश शाह 2007 और 2012 में जीते हैं। इस बार मिलेगा?

असारवा में 2007 के जीते उम्मीदवार को 2012 में टिकट नहीं मिला। जबकि प्रदीपसिंह भगवतसिंह ज़डेजा 2002 और 2007 में जीत चुके थे। इस बार 2012 के विधायक को टिकट मिलेगा या कटेगा?

दासदा विधानसभा में 2007 में जीते हुए उम्मीदवार को 2012 में टिकट नहीं दिया। बीजेपी जीत गई। क्या इस बार इनका नंबर कटेगा?

बधवान विधासभा से 2007 और 2012 में भाजपा उम्मीदवार जीत रही हैं। क्या 2017 में टिकट मिलेगा?

चोटिला में 2007 के उम्मीदवार को 2012 में टिकट नहीं दिया। 2017 में?

मोरबी में 2007 से कांतिलाल शिवलाल अमृतिया ही जीत रहे हैं। क्या चौथी बार टिकट मिलेगा। इस बार कट जाने के चांस हैं।

विधानसभा क्षेत्र के नामों में त्रुटी हो सकती है। इसे कहीं और छापने से पहले एक बार अपना होमवर्क भी कर लें। इस आधार पर देखा जा सकता था कि बीजेपी कहां कहां उम्मीदवार बदलने वाली है। जब पार्टी इतना काम करती है, सरकार इतना काम करती है तो 30 से 35 उम्मीदवारों का टिकट काटने का क्या मतलब है? क्या पार्टी और सरकार काम करती है मगर विधायक काम नहीं करते हैं? ऐसा कैसे हो सकता है। फिर से एक बार टिकट सब काटते हैं मगर गुजरात में बीजेपी जिस तादाद में टिकट काटती है उस तादाद में कोई नहीं काटता है। आप इस रणनीति के ज़रिए उम्मीदवार तो बदल देते हैं, नए को भी मौका देते हैं मगर जनता किससे हिसाब मांगे।

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