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प्रशांत टंडन

पीडीपी से समर्थन वापसी का ऐलान करते वक़्त बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने कहा कि उन्होने राज्य में शांति और विकास के लिये पीडीपी के साथ मिल कर सरकार बनाई थी लेकिन इन दोनों क्षेत्रों में महबूबा सरकार विफल रही, उन्ही के शब्दों में राज्य में कश्मीर घाटी में “रैडिक्लाईज़ेशन” (कट्टरता) बढ़ गई इसलिये उन्होने समर्थन वापिस ले लिया. तीन साल लग गये इस बात को समझने में?

खैर अब 87 सीटों की विधानसभा में पीडीपी के पास 27 सीटे हैं और नेशनल कान्फ्रेंस और कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि उनका पीडीपी को समर्थन देने का कोई इरादा नहीं है. इसके बाद राज्यपाल के पास विधानसभा भंग करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता है. ये फैसला भी जल्द ही हो जाना चाहिये. विधानसभा के भंग होने की स्थित में जम्मू कश्मीर में भी चुनाव 2019 के आम चुनाव से पहले कराने होंगे. जम्मू कश्मीर के चुनाव को लोकसभा के चुनाव में मोदी कैसे भुनायेंगे ये वही जाने.

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ये बहुत मजबूरी में लिया गया फैसला लगता है. बीजेपी – पीडीपी के तीन साल के शासन के दौरान कश्मीर कभी शांत नहीं रह पाया. रमज़ान के दौरान सीज़फार भी पूरी तरह नाकाम रहा – इस विफलता की साझेदारी से बीजेपी कैसे बच सकती है.

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अब मोदी सरकार के सामने कश्मीर में शांति बहाल करना एक बड़ी चुनौती होगी. इस कोशिश में विफलता की ज़िम्मेदारी अब वो किसी और पर नहीं डाल पायेगी. ये काम कश्मीर के लोगों को साथ लिये बिना संभव नहीं है. वहां के लोगो का दिल जीतने के लिये बीजेपी को लंबा रास्ता तय करना है. वो इस रास्ते की तरफ बढ़ भी पायेगी ये एक बड़ा सवाल है.

क्या शुजात बुखारी की हत्या की SIT से जांच कारण बना?

14 जून को यूएन ने पहली बार कश्मीर पर मानवाधिकार रिपोर्ट जारी की है जिसमे केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को कठघरे में खड़ा किया है. जिस दिन यूएन की रिपोर्ट आती है और उसे राईजिंग कश्मीर अखबार के संपादक शुजात भूखारी पहले पेज पर छापने का फैसला कर के घर के लिए निकलते हैं अज्ञात हमलावर उनकी हत्या कर देते हैं. हत्या के दूसरे दिन महबूबा सरकार जांच के लिये राज्य सरकार के अधीन SIT का गठन करती है और पांचवे दिन बीजेपी के समर्थन वापसी के फैसले के बाद मुख्यमंत्री का इस्तीफा हो जाता है. अचानक समर्थन वापसी की असल वजह क्या है ये तो मोदी सरकार और बीजेपी ही बेहतर जानती है पर पिछले पाँच दिन के घटनाक्रम को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है.