लव जिहाद – मेरठ केस पर मुसलमानों को कठघरे में खड़े करने वाले क्या अब माफ़ी मांगेंगे ?

9:37 pm Published by:-Hindi News
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मेरठ का खरखोदा कांड यह वह कांड था जिसे भाजपा ने ‘लव जिहाद’ कहकर सारे देश में गरमा दिया था। बलात्कार, किडनियों का निकाल लेना, अप्रहण कर जबरन धर्म परिवर्तन कराना इस तरह के आरोप मीडिया और भाजपा की तरफ से लगाये गये थे। जिस कलीम के ऊपर ये सारे आरोप लगे थे वह ‘प्रेमी’ और ऊपर से शालू का आशिक ‘कलीम’ होने के कारण छ महीने जेल में रह कर आया है।

परिवार के साथ – साथ एक पूरे समुदाय को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई। अब वही लड़की शालू कलीम की हो चुकी है यानी वह अधिकारिक तौर से उसकी पत्नि है। सवाल यहीं से पैदा हो रहा है। सवाल भाजपा से बाद में होगा पहला सवाल तो अखबारों के विशेषकर हिन्दी मीडिया तेज तर्रार पत्रकारो और ‘टीबी’ के धुरंदरों से है कि अब जब वही शालू उसी कलीम की पत्नि हो चुकी है तो क्या अब वे खुद के द्वारा फैलाये गये झूठ, और नई नई गढी कहानियों के लिये कलीम से माफी मांगेंगे ?

क्या अब वे कहेंगे कि उन्होंने देश को गुमराह किया था जिसकी वजह से हिन्दू मुस्लिम आपस में संवाद करने से भी कतराने लगे। क्या वे कहेंगे उन्होंने अपनी रिपोर्ट पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर लिखीं थी ? क्या वे कहेंगे कि उन्होंने पत्रकारिता की गरिमा को बट्टा लगाया है ? अगर इतना भी नहीं कह सकते तो क्या उतना स्पेस अब इस खबर को दे पायेंगे जितना तब दिया गया था ? मदरसों को बदनाम किया गया था कि यहां पर धर्मपरिवर्तन कराये जाते हैं क्या उसके लिये माफी मांगी जायेगी ? भाजपा जिस ऐजेंडे पर चलती है हिन्दी मीडिया भी लगभग उसी ऐजेंडे पर चल रही है। भाजपा की तरफ से उछाले गये ‘लव जिहाद’ को मीडिया ने तुरंत कैश किया।

मीडिया ने कहीं ये जानने की कोशिश नहीं की कि भाजपा जो आरोप लगा रही है कहीं वे बेबुनियाद तो नहीं हैं ? यह झूठ का सहारा लेकर एक समुदाय को बदनाम करने की साजिश थी ताकि दोनों तरफ नफरत को पैदा किया जा सके, मगर सियासत, नफरत, ध्रुर्वीकरण, की इस लड़ाई में मौहब्बत की जीत हो चुकी है।

वसीम अकरम त्यागी

लेखक ‘मुस्लिम टुडे’ में सह संपादक है

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