दिल्ली में घंटों जाम में फंसने पर नही लेकिन रमज़ानों में हो गया उनके ‘अधिकारों का हनन’

4:17 pm Published by:-Hindi News
pankhuripathak

पिछले चार वर्षों में मुस्लिम समुदाय पर लगातार हमले हो रहे हैं, कभी गाय के नाम पर मार दिया जा रहा तो कभी माँस के नाम पर मार दिया जा रहा है।

अभी हाल के दिनों में कुछ ख़बरें सुनने को मिली कि मुसलमानों को नमाज़ पढ़ने से रोका जा रहा है। अब तक मुस्लिमों को सुरक्षा देने के नाम पर सरकार पूरे तरह से विफल रही है।

जहाँ तहाँ बीच रोड में या सड़क किनारे हमेशा के लिये धार्मिक स्थल बनाकर रास्ते को जाम रखना हमेशा से होता रहा है और होता रहेगा क्योंकि हमारा संविधान धार्मिक मुद्दों पर हमेशा से गौण रहा है।

यही हमारे देश के संविधान की ख़ूबसूरती भी है कि आप अपने धार्मिक कर्मकांड को करने के लिये जितना स्वतंत्र हैं, उतना ही धर्म के नाम पर पाखंड, अंधविश्वास और दूसरों का शोषण करने के लिये रोक भी है।

रमज़ान महिने में जहाँ भी खुले आसमान के तले नमाज़ अदा की जाती है उसकी व्यवस्था पुलिस प्रशासन के ज़िम्मे होती है इसी तरह चाहे दुर्गा पुजा हो या रामनवमी यात्रा इन सबकी ज़िम्मेदारी प्रदेश सरकार के पुलिस प्रशासन की होती है।

समाज के किसी भी सामान्य व्यक्ति को किसी भी धर्म के उत्सव से कोई समस्या नही होती है, बल्कि हर धर्म का सम्मान करने वाला व्यक्ति सभी धर्मों के उत्सव में प्रेम से शामिल होता है बिना किसी शिकायत के।

हर रोज लाखों करोड़ों लोग सफ़र करते हैं जिन्हें कही मस्जिद से तो कही मंदिर से थोड़ी तकलीफ़ होती होगी फिर भी वो उसे नज़रअंदाज़ करके आगे बढ़ जाते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि ये दैनिक जीवन का हिस्सा है और इसमें करोड़ों की श्रद्धा है तो इसका सम्मान करना चाहिये।

समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता पंखुड़ी पाठक ने कुछ दिन पहले ही लिखा कि सड़क पर नमाज़ के चलते उनके “अधिकारों का हनन हो गया”।

जबकी रमज़ान महिने में जहाँ भी सड़कों पर नमाज़ अदा की जाती है वहाँ की यातायात पुलिस हफ़्ते भर पहले ही सूचना दे देती है कि ये रास्ता फला फला दिन नमाज़ के चलते बंद रहेगा।

ठीक इसी तरह रामनवमी और दुर्गा पूजा के समय भी जब झाकियाँ निकाली जाती हैं तो रास्तों को बंद रखा जाता है जिसकी सूचना पहले ही दे दि जाती है जिससे किसी को कोई समस्या न हो।

मुझे नही लगता कि पंखुड़ी पाठक का ये बयान बिना किसी पूर्वाग्रह से लिखा गया है क्योंकि अगर सड़क जाम से इनको परेशानी होती तो देश का हर शहर हर सुबह-शाम भीषण जाम में फँसा रहता है।

क्या पंखुड़ी पाठक पहली बार सड़कों पर निकली थी? इसके पहले उस दिल्ली में जहाँ घंटों घंटों ट्रैफ़िक जाम लगा रहता है, वहाँ पंखुड़ी पाठक के अधिकारो का हनन नही होता है? केवल रमज़ान के महिने में ही अधिकारो का हनन होता है?

जब लोगो ने इस मुद्दे पर पंखुड़ी पाठक से सवाल करना शुरू किया तो जवाब देने के बजाय समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ फोटो लगाकर ये लिखना कि कुछ लोग मेरे पार्टी छोड़ने का अफ़वाह उड़ा रहे हैं लेकिन मैं मरते दम तक अखिलेश जी के साथ रहूँगी।

पंखुड़ी जी इस देश में लाखों-करोड़ों ऐसे घर हैं जिनकी कई पीढ़िया समाजवादी पार्टी के सेवा में गुज़र गई और न जाने उनकी कितनी पीढ़िया अखिलेश जी के लिये गुज़र जायेंगी।

ऐसे लोग शायद कभी अखिलेश जी से न मिल पाये और ना ही पार्टी से कोई लाभ ले पाये फिर भी वो हमेशा पार्टी के ही रहेंगे। इसलिये जवानी कुर्बान गैंग की तरह मरते दम तक संग रहने के वादे से अच्छा है कि समाजवादी सिद्धांतों को अच्छे से पढ़िये और उसपर अमल कीजिये।

तब पता चलेगा कि इस देश की बहुसंख्यक आबादी के साथ हो रहे भेदभाव का कारण नमाज़ नही मनुवादी व्यवस्था है जिसके चलते करोड़ों लोगो के मौलिक अधिकारो का हनन सदियों से होता रहा है।

पंखुड़ी पाठक पार्टी की प्रवक्ता हैं इसलिये उनका कोई भी बयान व्यक्तिगत नही हो सकता, अगर व्यक्तिगत बयानबाज़ी करनी है तो पार्टी का पद त्यागकर अपने व्यक्तिगत विचारों को लेकर क्रांति शुरू कर दें।

लाखों कार्यकर्ता कभी भी ऐसा नही चाहेंगे कि आपके व्यक्तिगत बयान से पार्टी को किसी भी तरह का नुक़सान हो इसलिये कार्यकर्ताओं का सम्मान कीजिये और पार्टी लाइन से हटकर बयानबाज़ी करने से बचिये।

लेख साभार- Ratnesh Yadav

शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें