माननीय मुख्यमंत्री जी,
आदाब।
में आपको ’74’ आंदोलन की याद दिलाना चाहता हूं जब आपलोग एक तानाशाह सरकार के विरुद्ध लोकनायक जयप्रकाश नारायण की अगुआई में खड़े हुए। आपलोग  संगाठित हुए, आंदोलन किया और अंततः श्रीमती इंदिरा गांधी जैसी महिला की सत्ता भसभसा कर धराशायी हो गयी। वो युवाओं की शक्ति, लोकनायक की दृढ़ता और इंदिरा जी की आक्रामकता का नतीजा था। आज आप इंदिरा जी के स्थान पर खड़े हैं, युवा कल के नीतीश कुमार की जगह खड़ा है बस आवश्यकता है एक लोकनायक की जो आज न कल आपके अत्याचार और घमंड से पैदा हो ही जायेगा।
मैं आपको सीतामढ़ी की घटना की तरफ ले चलना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि आप 1974 के नीतीश कुमार को आज सीतामढ़ी में फिर से देखें। रविवार को आपके अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किसी प्रोग्राम में भाग लेने सीतामढ़ी गए थे। सीतामढ़ी दंगे में मारे गए जैनुल हक़ अंसारी के हत्यारों की गिरफ्तारी और पीड़ितों के मुआवजे की मांग करते हुए शहर के युवाओं ने उनकी गाड़ी को रोका, काले झंडे दिखाए और सरकार विरोधी नारे लगाए। इस सारे प्रकरण में कोई भी ऐसी घटना नही हुई जो असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक हो। कल होकर आपकी पुलिस ने 12 नामज़द और 30-40 अज्ञान लोगों पर FIR कर दिया। मैं पूछना चाहता हूं कि आपकी पुलिस हत्यारों की गिरफ्तारी महीनों बाद भी नही कर पाती, जिनके घर जलाए गए, जिनका समान और मवेशी लूट लिया गया उनका FIR महीनों बाद भी नही कर पाती और शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे युवाओं के ऊपर तुरंत FIR कर लेती है। मुख्यमंत्री जी, मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का अधिकार हमारे देश का संविधान हमें नही देता? और जब देता है तो क्या ये आपकी सरकार और प्रशासन द्वारा अपनाई गई दमनकारी नीति नही है? और जब ये दमन, अत्याचार और तानाशाही है तो क्या हम समझ लें कि हम फिर एकबार 74 की इंदिरा सरकार से लड़ने जा रहे हैं?
माननीय मुख्यमंत्री जी, आपने हमेशा अपनी स्वच्छ छवि को प्रोमोट किया है, जीरो टॉलरेंस की बात की है। विकास पुरुष के नारे लगवाए हैं और इसीलिए स्वर्ण मीडिया ने आपको ‘सुशासन बाबू’ का लक़ब दिया। सत्य ये हैं कि आपके जीरो टॉलरेंस के गर्भ से ‘सृजन घोटाला’ निकलता है, आधे बिहार में साम्प्रदायिक दंगे आपके सुशासन को नंगा कर ‘चड्डी-बनियान’ में जनता के सामने खड़ा किये हुए है। लोकतंत्र के नाम पर पार्टी में सिर्फ आप ही आप हैं संगठन तो भाजपा का है। आपके शासन काल में सबकुछ वही हो रहा जिसके कारण जनता ने छुब्ध-त्रस्त और क्रोधित होकर आपको गद्दी दी थी। लेकिन इन सबके बावजूद आप ‘मौन’ हैं। दंगों पर कोई फ़ास्ट ट्रैक नही बनी, जनता को कुछ पता नही चला कि आपने क्या किया। राफेल जैसे घोटाले हुए, CBI में एक से एक खुलासे हुए, लालू यादव को फंसाने के खुलासे हुए और आप नैतिकता का खम्भा पकड़कर खड़े हैं। राज्य में अराजकता चरम पर है और आप खामोश हैं। ये सब साफ दर्शाता है कि आपका नैतिकता से कोई संबंध नही है, कुर्सी और सत्ता मात्र आपका लक्ष्य है। साफ है आप अवसरवाद से ग्रस्त हैं। अगर कुछ बचा रखा है आपके प्रिय स्वर्ण मीडिया ने तो आपका ‘सुशासन बाबु’ का चेहरा। क्योंकि इस सवर्ण मीडिया को लालू राज तो जंगल राज दिखता था, ये लिखते भी थे लेकिन नीतीश-मोदी के जंगलराज को इनको जंगलराज लिखना नही है। जनता सवर्ण मीडिया के इस दोहरे चरित्र को भी भली भांति देख और समझ रही है। इतिहासकार इतिहास भी लिख रहे हैं और भविष्य आपके कार्यकाल को भी न्याय के साथ इतिहास के पन्नों में लिखेगा।
आपके माध्यम से मैं आपके गृह सचिव से भी कुछ पूछना चाहता हूं की सचिव जी की आपके हाथों से भी प्रशासन और संवैधानिक कार्यों का सम्पादन शायद नही हो पा रहा है और इतिहास को लिखने वाले इसपर नज़र डालेंगे। कल जब इतिहास लिखा जाएगा तो तारीख का कौल-ए-फैसल इसपर क्या होगा इसपर भी नज़र रखिये की आपको भी कल सेवानिवृत्त होकर समाज के बीच आना है। और अगर सामुदायिक पहचान के ऊपर प्रशासन पर आपकी पकड़ ढीली हो रही है तो इसका ईशारा आपके द्वारा समाज को जाना चाहिए। इतिहास के छात्रों के लिए ये दुख की बात तो हो सकती है परंतु कोई अचंभे की बात नही होगी। 47 के पहले ब्योरोक्रेसी में इस प्रकार के विभाजनकारी ध्रुवीकरण के साक्ष्य मौजूद हैं और इतिहास के छात्र जानते हैं कि बंटवारे में इस वर्ग की क्या भूमिका रही है। इसलिए आप को इतिहास को भी जवाब देना होगा।
माननीय मुख्यमंत्री जी, आज का युवा वर्ग बहुत सारे सवालों पर उबल रहा है। मिल्ली तंजीमें आप जैसे शासित राज्यों में बड़ी आसानी से अपने कार्यक्रमों का निष्पादन कर रही है। आज का युवा इन संगठनों द्वारा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की जगह अमन-शांति-विकास को ढूंढने के प्रयास कर रहा है। वो समझना चाहता है कि आखिर आल इंडिया मिल्ली कौंसिल जैसी तंज़ीम को योगी राज के सहारनपुर में क्यों कुछ भी बकने की जगह बड़ी आसानी से मिल जा रही है? योगी राज के बुलंदशहर में तब्लीगी जमात को बड़ी आसानी से जगह मिलती है। आल इंडिया मजलिस मुशावरत को चुनाव के ठीक पहले भाजपा शासित राज्य गुजरात में क्यों प्रोग्राम करना पड़ रहा है? इमरात-ए-शरिया को क्यों 15 अप्रैल जैसे दीन बचाओ देश बचाव जैसे प्रोग्राम करने पड़ रहे हैं। इमरात को ढाका, पूर्बी चम्पारण जैसी छोटी जगह पर क्यों इस्लाही प्रोग्राम करना पड़ रहा है? आखिर इन पार्टियों की सरकारों में ही क्यों इतने बड़े आयोजन हो रहे हैं? जब तक सांस्कृतिक आयोजनों के साथ आमजन के मुद्दे शिक्षा, स्वास्थ, रोज़गार, सुरक्षा और चहुंमुखी विकास, अमन शांति की बात नही होती तब तक ये सारे सवाल युवाओं के अंदर खौलता रहेगा। इन सवालों से युवाओं का सीधा सरोकार है और इन्हीं सवालों से किसी भी समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनेगी या बनती आ रही है। और ये सवाल सिर्फ मेरा नही है बल्कि आज के उन तमाम युवाओं का है जो सामाजिक सरोकारों की चिंता करते हैं।
मैं आपके माध्यम से शिवहर विधयाक व अध्यक्ष अल्पसंख्यक समिति, बिहार मो. शरफुद्दीन से प्रश्न करना चाहता हूं कि वो सिर्फ विधायक और अध्यक्ष बनकर ज़मीनो के खरीद बिक्री ही करेंगे या जनता के सवालों पर खरे भी उतरेंगे। अगर उन्हें ब्यापार ही करना है तो जनता उन्हें अपना नेता क्यों चुने? आप ने उन्हें अल्पसंख्यक समिति का अध्यक्ष क्यों बनाया? सिर्फ आपकी हुंकारी भरने से क्या अल्पसंख्यकों की सुरक्षा हो जाएगी, उन्हें मुआवज़ा मिल जाएगा या हत्यारों को सज़ा हो जाएगी?
आपकी पार्टी के नेता विशेषकर मुस्लिम एक शब्द इसपर नही बोलते। उनके परिवार में लूटपाट, हत्या, बलात्कार कुछ भी हो जाएगा लेकिन वो नही बोलेंगे। आप अपने वर्षों से काम कर रहे कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर नेपाल के बॉर्डर एरिया ढाका-वाका से किसी भी ऐरे-गैरे को पकड़ कर एम एल सी का टिकट दे देंगे लेकिन आपकी पार्टी में चूं तक नही होती। शिवहर के किसी भू-माफिया और भट्टा ब्यापारी को अल्पसंख्यक कल्याण समिति का अध्यक्ष बना देंगे लेकिन पार्टी के दूसरे झोला ढो रहे नेता कुछ प्रतिवाद नही करेंगे। अल्पसंख्यक समिति अध्यक्ष के विधानसभा से सटे दंगा में कोई अल्पसंख्यक मारा जाएगा वो एक शब्द नही बोलेगा। क्यों नही बोलेगा क्योंकि आपको गूंगे ही चाहिए। लेकिन माननीय मुख्यमंत्री जी राजनीतिक घटनाक्रम बहुत तेज़ी से बदल रहा है। आप समझते हैं कि आप ही राजनीति की महिनी को समझते हैं या वो कुछ लोग ही राजनीति की बारीकी को समझ रहे हैं जो एक वर्ग को, समुदाय को एक तरफ करके, उस समाज के गूंगे-बहरे-दल्ले को चेहरा बनाकर कर अपनी और अपने परिवार की राजनीति को बहुत दिन तक चमका सकेंगे तो मैं ये कहूंगा कि ये भारी भूल होगी आपलोगों की। युवाओं का बड़ा वर्ग सबकुक देख समझ और अंदर अंदर उबल रहा है। समय आने पर ये युवा इन नेताओं को नंगा कर जनता के बीच घसीट कर लाएंगे। ‘सांकेतिक राजनीतिक’ का दौर बहुत जल्द समाप्त होगा और यही युवा समाप्त करेंगे।
माननीय मुख्यमंत्री जी, आपसे पहले भी बहुत सारे होशियार और धूर्त शासक आये और सब इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं जिसका पूरा पूरा ज्ञान और समझ आपको है। पिछले एक वर्ष के अंदर आधे बिहार में साम्प्रदायिक दंगे हुए। नवादा में आपकी पार्टी के एम एल सी के घर में पुलिस वाले घुसकर उत्पात मचाते हैं, तोड़ फोड़ करते हैं और उनके परिवारजनों को अधनंगा करके मारते हैं, आप खमोश रहते हैं। बिहार के दूसरे जिलों में दंगाई अपना काम करते हैं आप खामोश रहते हैं। उनपर क्या कार्रवाही होती है किसी को नही पता। आप अल्पसंख्यक, दलित और पिछड़े समाज से किसी भी दुम हिलाने वाले को पकड़ कर, ढाका-वाका के बाजार से किसी बाजारू को पकड़कर विधायक, एम एल सी और एम पी तो बना सकते हैं लेकिन आम लोगों के बीच में नेतृत्व का संदेश नही दे सकते। अब हर समाज में मध्यम वर्ग के बीच के कुछ युवा इस बात को भली भांति समझ रहे हैं। और आने वाले समय में जनता के इन सवालों का जो जवाब देगा वही नेतृत्व करेगा। ये बात मेरे जैसा आम युवा तो समझ ही रहा है आपलोग भी जितनी जल्दी समझेंगे एक स्वस्थ राजनीति की मज़बूत आधारशिला उतनी ही जल्दी रखी जा सकेगी।
अंत में मैं ये कहना चाहता हूं कि जिन युवाओं पर सीतामढ़ी में प्रदर्शन करने पर FIR दर्ज किया गया है अपना दिल बड़ा करते हुए उनपर से ससम्मान FIR हटाई जाए। सीतामढ़ी और बाक़ी ज़िलों के दंगा पीड़ितों को इंसाफ मिले। यही राज्य की स्वस्थ राजनीति के लिए भी अच्छा होगा और हमलोगों के राजनीतिक गुरु लोकनायक श्री जयप्रकाश नारायण और लोहिया जी को सच्ची श्रद्धाजंलि भी।
धन्यवाद।
“तुमसे पहले वो जो इक शख्स यहां तख़्त नशीं था
उसको भी अपने ख़ुदा होने का इतना ही यकीं था”
बिहार का एक आम युवा।
तनवीर आलम
प्रेसिडेंट,
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एलुमनाई एसोसिएशन ऑफ महाराष्ट्र, मुम्बई।
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