शुक्रवार को दफ्तर की छुट्टी थी और उसी दिन मेरी मां किसी जरूरी काम से गांव चली गई। इसलिए मैंने तय किया कि आज रात का खाना खुद बनाऊंगा। मैं किसी तरह रोटियां तो बना लेता हूं लेकिन उनकी आकृति गोल न होकर आॅस्ट्रेलिया के मानचित्र जैसी होती हैं। मुझे इसकी ज्यादा परवाह भी नहीं है, क्योंकि मैं मेरे घर में कोई मेहमान नहीं हूं कि शर्मिंदा होना पड़े। अलबत्ता सब्जी नहीं बनानी आती।

इसके लिए मैंने गूगल की मदद ली, कुछ वीडियो देखे और तैयारी में जुट गया। इसी दौरान मैंने गूगल न्यूज पर अमरीकी थिंक टैंक की एक रिपोर्ट पढ़ी। रिपोर्ट कुछ यूं थी कि 2050 तक दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी भारत में होगी।

कुछ लोगों के लिए बस इतना पढ़ना पर्याप्त था। वे ज्यादा जानकारी हासिल करने का जोखिम नहीं उठाते और तुरंत फेसबुक-वाॅट्सअप पर अभियान शुरू कर देते हैं- भारत को खतरा है, एक और पाकिस्तान बनने जा रहा है … यह कोई साजिश है और भी न जाने क्या-क्या। सोशल मीडिया पर गाली-गलौज की बौछार शुरू हो गई।

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मुझे नहीं पता कि इस रिपोर्ट को जारी करने का मकसद क्या था, पर मैं आपको इसका दूसरा पहलू और बताता हूं। इस रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी आबादी हिंदुओं की होगी। इसमें 34 फीसद का इजाफा होगा। यह भी एक बहुत-बहुत बड़ी तादाद है।

कुछ लोग इस रिपोर्ट को शरारत बता रहे हैं कि इससे उन्मादी किस्म के राजनेताओं को भड़काऊ बयान देने का मौका मिल जाएगा तो कोई बहुत खुश हो रहा है कि देखो, ‘शेरों’ की तादाद बढ़ रही है और जमाने को टेंशन हो रही है।

किसी का मानना है कि हिंदू तीसरी सबसे बड़ी तादाद में होंगे और पूरी दुनिया में राम नाम का डंका गूंजेगा। कोई ऐलान कर रहा है कि हमें पहले नंबर पर आने दो, फिर दिखा देंगे कि इस्लाम की तलवार में कितनी धार है। ऐसी विचित्र कल्पनाओं का कोई अंत नहीं है। मुझे इन सबसे अलग एक और तस्वीर दिखाई दे रही है, पर मैं उससे पहले कुछ सवाल करना चाहूंगा।

हे भारत के परम तेजस्वी हिंदू भाइयो, ऐ मेरी जान से ज्यादा प्यारे मुस्लिम भ्राताओ! मत भूलो, तुम आज भी करोड़ों की तादाद में हो। तुमने अब तक ऐसा क्या कारनामा कर दिया कि दुनिया की और कौमें नहीं कर सकतीं? तुम्हारे पास ऐसा है क्या जो दुनिया के पास नहीं?

करोड़ों की तादाद में हो, फिर भी दुनिया तुम्हारी कद्र नहीं करती। अगर अरबों-खरबों की तादाद में हो गए तो भी दुनिया में कौन है जो तुम्हें अपना मेहमान बनाने के लिए दरवाजे खोलकर बैठा है? कोई नहीं।

अमरीका रोज नए-नए कानून बनाकर तुम्हें निकाल रहा है। खाड़ी देशों में यूरोपियन नागरिकों के साथ अलग किस्म का सलूक होता है और तुम्हारे साथ अलग किस्म का। यूरोप तुम्हें दोयम दर्जे का मानता है और नापसंद करने लगा है। ऐसे हालात में अगर तुम दिन-दूना और रात-चौगुना भी बढ़ गए तो कौनसा किला फतह कर लोगे? दुनिया हमें सिर्फ मंडी समझती है जहां अमीर देश अपना घटिया माल खपाते हैं और गरीबों की फोटो खींचकर अपने बच्चों को दिखाते हैं।

यारो, कुछ होश करो। क्यों आने वाली पीढ़ियों को सिर्फ समस्याएं ही देकर जाते हो? यह रिपोर्ट किसी भी समझदार के लिए खुशी का पैगाम तो बिल्कुल नहीं है। हां, बेवकूफों की खुशी पर कोई रोकटोक भी नहीं है। वे चाहें तो जश्न मना सकते हैं।

हम हिंदुओं और मुसलमानों के पुरखे करोड़ों की तादाद में थे, लेकिन कुछ हजार अंग्रेजों ने उन पर राज किया। आखिर क्या बिगाड़ लिया हमने? यह समझते-समझते हमें 300 साल लग गए कि अब ताकत का पैमाना पूरी तरह बदल चुका है। अब वे देश दुनिया पर राज करेंगे जिनके पास शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आधुनिक विज्ञान और भरपूर पूंजी होगी। भाई हजारों साल पुराने उस जमाने से बाहर आओ जब तादाद ही एकमात्र ताकत थी।

हम हिंदू और मुसलमान आज भी करोड़ों की तादाद में हैं लेकिन हमारी अवाम को रोटी, साफ पानी, घर, इलाज, शिक्षा और वक्त पर इन्साफ नहीं मिलता। क्या आपको लगता है कि जब हम अरबों-खरबों में हो जाएंगे तो एकदम से कोई खुशहाली की लहर आएगी और पूरी धरती जन्नत हो जाएगी? बिल्कुल नहीं।

अगर हमने अपना रवैया न बदला, भविष्य की फिक्र नहीं की, कोई योजना नहीं बनाई तो आज मेरी बात लिख लीजिए, हम आने वाली नस्लों को विरासत में कब्रिस्तान और श्मशान ही देकर जाएंगे। हम वो अजीब लोग हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए जहन्नुम का दरवाजा खोलकर खुद जन्नत जाने की उम्मीद रखते हैं।

कुछ दिनों पहले मैं चीन की एक रिपोर्ट पढ़ रहा था। वहां सरकार ने जब से एक बच्चे की नीति (जो अब कुछ शर्तों के साथ दो बच्चों की नीति है) लागू की, उसका सबसे ज्यादा फायदा औरतों को मिला।

उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है क्योंकि अब वे आठ-आठ बच्चे पैदा नहीं करतीं। मातृमृत्यु दर काफी कम हुई है। वे पढ़ाई और मनपसंद करियर में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। करियर के मैदान में कई बार तो वे पुरुषों पर भारी पड़ती हैं। उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा और नौकरी के अच्छे मौके मिल रहे हैं। धीरे-धीरे ही सही, चीन खुशहाल हो रहा है, ताकतवर हो रहा है।

मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि आज का चीन अपनी बेटियों की ताकत से आगे बढ़ रहा है। कारोबार हो या फौज अथवा कोई और पेशा, औरतें हर जगह अपनी कामयाबी का परचम लहरा रही हैं। अगर भारत में औरतों को इतने मौके और इतनी सहूलियतें मिल जाएं तो बेचारे मर्द आरक्षण मांगने को मजबूर हो जाएं।

पर नहीं, हम ऐसा होने नहीं देंगे। औरतें तो हमारे लिए इन्सान नहीं बल्कि बच्चे पैदा करने की मशीनें हैं! यारो, औरतों पर कुछ रहम करो। अगर यह मुल्क चलाने की जिम्मेदारी मुझे सौंपी जाए तो मैं दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले सभी पुरुषों को जेल में डाल दूं। मैं सबसे पहला कानून यही बनाऊं।

जिस मुल्क में लाखों लोग भूखे सोते हों, लाखों बच्चे स्कूल जाने की बजाय कूड़ा बीनते हों, लाखों लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हों, लाखों परिवारों के सिर पर छत न हो और करोड़ों के पास रोजगार न हो, बीमारों के लिए इलाज न हो, वहां लोग इन असल समस्याओं को भूलकर बेतहाशा बढ़ती आबादी पर खुश हों तो मैं कहूंगा कि ये अपनी बर्बादी का जश्न मना रहे हैं।

लोग कहते हैं कि बच्चे अल्लाह या भगवान देता है, वही खाना भी देगा। ठीक ही है, मगर हम यह क्यों भूल जाते हैं कि अक्ल भी अल्लाह ने सबसे ऊपर दे रखी है। उसका इस्तेमाल करें।

अल्लाह ने धरती और आसमान बनाए लेकिन इन्सान ने पैसा और दुकान। यह न भूलें कि दुकान में सामान अल्लाह नहीं इन्सान बेचता है। वह मुझसे भी उतनी ही कीमत वसूलेगा जितनी कि आपसे।

इस मुल्क में औरत को पीटना जुर्म है, सताना जुर्म है, छेड़छाड़ करना जुर्म है, कत्ल करना जुर्म है, मगर उससे ढेर सारे बच्चे पैदा करवाना जुर्म नहीं है। मुझे ताज्जुब है!

– राजीव शर्मा (कोलसिया) –

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