इन दिनों गर्मी का असर बढ़ता जा रहा है। सूरज ने बहुत जल्द अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए। पहले जब मैं शाम को दफ्तर से घर पहुंचता तो सीधे रजाई में घुस जाता और टीवी पर मनपसंद कार्यक्रम देखता। अब रजाई समेटकर रख दी है क्योंकि गर्मियां आ गईं और टीवी भी बंद कर दिया क्योंकि जब से यूपी में चुनाव शुरू हुए, कई नेता अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। उन्हें देखते-सुनते मुझे डर है कि कहीं मेरी भी हालत उन जैसी न हो जाए, इसलिए टीवी देखना बंद कर दिया। अब होली के बाद ही टीवी की वापसी होगी। तब तक अखबार पढ़कर काम चलाऊंगा।

इन दिनों अखबारों में एक मासूम-सा चेहरा चर्चा का विषय बना हुआ है। मालूम हुआ कि कोई गुरमेहर कौर नामी बच्ची है जिसके पिता भारत-पाक युद्ध में शहीद हो गए थे। उसकी कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया में आईं। गुरमेहर का कहना है- पाकिस्तान ने नहीं बल्कि युद्ध ने उसके पिता की जान ली। इसके बाद बवाल शुरू हो गया। कुछ लोगों ने उन्हें गद्दार कह दिया तो कोई कहने लगा- ये असहिष्णुता है। बीच में कुछ छिछोरे किस्म के लोगों ने धमकी दी कि वे गुरमेहर का रेप कर देंगे। ऐसी धमकियां देने वाले बदमाशों के खिलाफ सरकार से मेरी मांग है कि उन्हें फौरन जेल में डाले और सोटे लगवाए।

मेरे मुताबिक, इस पूरे मामले में इस लड़की का कसूर सिर्फ इतना-सा है कि उसके दिल की बात जुबां पर और जुबां की बात सोशल मीडिया पर आ गई जिसे कुछ लोगों ने समझा, कुछ ने नहीं समझा और कुछ ने जरूरत से ज्यादा समझ लिया।

गुरमेहर ने कहा क्या? यही कि पाक ने नहीं जंग ने उसके पापा की जान ली। इसके जरिए उसका इरादा यह बताना था कि जंग तबाही, बर्बादी और मौत लेकर आती है। याद कीजिए, महाभारत के युद्ध से पहले श्रीकृष्ण भी तो धृतराष्ट्र के दरबार में गए थे, उन्हें बार-बार समझाया, हाथ जोड़कर समझाया कि मान जाइए, युद्ध टाल दीजिए। इससे कुछ हासिल नहीं होगा। अगर युद्ध हुआ तो दोनों ओर से इतनी लाशें गिरेंगी कि आप गिनती भूल जाएंगे, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। युद्ध हुआ और उसका नतीजा वही निकला जो श्रीकृष्ण ने फरमाया था।

मैं गुरमेहर की तुलना श्रीकृष्ण से नहीं कर रहा, मगर वह लड़की शायद इन्हीं शब्दों को किसी और तरह से अभिव्यक्त करना चाहती थी तथा लोगों ने अर्थ का अनर्थ कर दिया। सही भी है, मुल्क नहीं मारते, जंगें मार देती हैं। अगर किन्हीं दो मुल्कों के लोग प्यार-भाईचारे से रहना सीख जाएं तो क्या मजाल कि एक भी जान चली जाए!

अब रही बात पाकिस्तान की। मोदीजी नवाज साहब से मिलते हैं, विदेशों में कई हिंदुस्तानी पाकिस्तानियों के साथ काम करते हैं, साथ-साथ रहते हैं। उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती। अमरीका, जापान, ब्रिटेन, सऊदी या किसी और देश में जब हिंदुस्तानी व पाकिस्तानी मिलते हैं तो वे एक-दूसरे के कपड़े नहीं फाड़ते। बहुत शालीनता से बात करते हैं और अपना-अपना काम करते हैं। पाकिस्तानी कहते हैं, हम भारत की तबाही क्यों चाहेंगे? वह हमारे ख्वाजा गरीब नवाज की धरती है। हिंदुस्तानी कहते हैं, पाकिस्तान में कटासराज महादेव और मां हिंगलाज विराजमान हैं। वहीं नानक बाबा प्रकट हुए थे। हम क्यों चाहेंगे उनकी तबाही?

गुरमेहर से गलती यह हुई कि उसे शब्दों का चुनाव कुछ और समझदारी से करना चाहिए था। बेशक उसके पापा को जंग ने मरवाया लेकिन सिर्फ जंग ने नहीं। वह सियासत थी जो जंग करवाती है। पाकिस्तानी जनरलों को कश्मीर चाहिए, क्योंकि वे जनता को रोटी नहीं दे सकते। कश्मीर राग सुनकर जनता रोटी नहीं मांगेगी। ओ भाई कश्मीर लेकर भी तुम क्या कर लोगे? जो मुल्क मिला था वो तुमने आधा गंवा दिया। अगर एक बार भारत तुम्हें कश्मीर दे भी दे तो भूख, बदहाली, बीमारी, दहशतगर्दी, अशिक्षा और भ्रष्टाचार के सिवाय तुम उन्हें क्या दे दोगे? कश्मीर के जो हालात आज हैं, पाकिस्तान में मिलने से वे बद से बदतर हो जाएंगे। बेहतर होगा कि पाक के पास जो संसाधन हैं उन्हें बटोरकर पूरी ताकत के साथ वह इन बुराइयों से लड़े। वह भारत का साथ ले। यह सियासत ही है जो 20 करोड़ पाकिस्तानियों की जिंदगी जहन्नुम बनाकर उस नक्शे की फिक्र करती है जहां वह जन्नत बनाना चाहती है।

अब भारत की बात सुनिए। ओ महान देशभक्तो, देशप्रेम बहुत अच्छी बात है लेकिन कभी-कभी दिमाग से भी काम लिया कीजिए। किसी बात का वही मतलब निकालिए जो हकीकत में है। तुम्हें हर चीज में साजिश दिखाई देती है। भाई ये मुल्क किसी 16 साल के आशिक का दिल नहीं जो यूं बात-बात पर टूट जाए। तुम गाय, गीता, गंगा, मंदिर की फिक्र करते हो। अच्छी बात है, हम भी इनका बहुत सम्मान करते हैं। साहब, कभी-कभी इन्सानों की भी फिक्र कर लिया कीजिए। इस देश में और भी समस्याएं हैं। हमें रोटी चाहिए। यूं बात-बात का बतंगड़ न बनाया करो।

ओ महान नकली सेक्यूलरो, अपनी सियासत चमकाने के लिए किसी का इस्तेमाल मत करो। इस देश की अवाम अमन से रहना चाहती है, रोटी चाहती है, लेकिन असहिष्णुता क्या है, यह तुम जमाने को सिखाते हो। हमेशा बेमतलब का बखेड़ा करते रहते हो। स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी ज्ञान के मंदिर हैं, यहां बच्चों को पढ़ने दो। जिस कलम से ये बच्चे इम्तिहान देते हैं, उसकी स्याही को स्याही न समझो। वह इनके मां-बाप का खून है। यारो, खुदा से डरो।

रही बात गुरमेहर की तो उस बच्ची को बख्श दो। वह इस देश के लिए कोई मुसीबत नहीं है। रही बात कुछ जगहों पर कथित देशविरोधी नारों की, तो मेरा सुझाव है कि ऐसे लोगों की ठीक-ठीक जांच होनी चाहिए। अगर दोषी पाए जाएं तो इनकी पकड़ हो और बोरिया-बिस्तर थमाकर कहें- भाई तू यहां बहुत दुखी हो रहा है। इसलिए ये ले तेरा सामान और इराक, सीरिया, अफगानिस्तान, सोमालिया, नाइजीरिया, नेपाल, इंग्लैंड अथवा जो देश तुम्हें खूबसूरत लगे, वहां चला जा। बस अमरीका मत जाना, वहां ट्रंप आ गया।

– राजीव शर्मा (कोलसिया) –


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