राजीव शर्मा: ‘मुद्दे को ही मुद्दा बनाइए, मोदी को मुद्दा मत बनाइए’

6:12 pm Published by:-Hindi News
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राजनीति और राजनेताओं में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन इन दिनों देशभर में जो माहौल है, उस पर मुझे हैरानी है। एक पत्रकार महोदय, जिनके लेख मैं पिछले सात-आठ वर्षों से पढ़ता रहा हूं और उनका बहुत सम्मान करता हूं, मालूम हुआ है कि प. बंगाल में उनकी पार्टी की हार के बाद वे गहरे गम में डूबे हैं। ऐसे ‘बुद्धिजीवियों’ से मुझे यह आशा नहीं थी। पार्टियां हारती-जीतती रहती हैं, इसमें नया क्या है?

हम जैसे लोगों को ‘रोज कुआं खोदना और रोज पानी पीना’ है। हमारे पास ऐसा क्या था जो लुट गया? ऐसा नहीं है कि हम डॉ. मनमोहन सिंहजी के राज में किसी सल्तनत के मालिक थे और मोदीजी ने आते ही सबकुछ छीनकर देश निकाला दे दिया! हमारी चुनौतियां वो ही हैं जो पांच, दस या बीस साल पहले थीं।

अब तक की ज़िंदगी में मैंने अनुभव किया है कि इनसान किसी नेता के बजाय अपनी गलत आदतों की वजह से ज्यादा दुखी होता है, इसलिए मौजूदा दौर के नेताओं के बजाय महापुरुषों के जीवन का अनुसरण करना चाहिए।

माननीय प्रधानमंत्रीजी से मैं इतना निवेदन जरूर करना चाहूंगा कि वे ऐसे फैसले लें कि सरकारी दफ्तरों में आम आदमी की सुनवाई हो और बिना रिश्वत काम हो, ताकि हमारी तकलीफें थोड़ी कम हो जाएं। बाकी, यह बात सब जानते हैं कि 130 करोड़ की आबादी को सरकारी नौकरी देना किसी भी सरकार के बस की बात नहीं है। इसलिए निजी क्षेत्रों में रोजगार को बढ़ावा दिया जाए।

आपने संसद में हमारे अल्पसंख्यक भाइयों-बहनों का विश्वास जीतने की जो बात कही, उसका स्वागत है, लेकिन उस पर अमल भी ईमानदारी से होना चाहिए। गोरक्षा के नाम पर उपद्रव फैलाने वाले तत्वों से सख्ती के साथ निपटा जाए। मैं आशा करता हूं कि आप अपने दल के कुछ बड़बोले नेताओं को काबू में रखेंगे, जिसकी नसीहत भी दे चुके हैं। बस यही उम्मीद करता हूं कि हर फैसला देशहित में ​लेंगे। आपको शुभकामनाएं।

और उन साथियों के नाम भी एक छोटी-सी अपील करना चाहूंगा जो सुबह, दोपहर, शाम और रात को फेसबुक पर मोदी को कोसते रहते हैं। अगर आप मोदी को मुद्दा बना रहे हैं तो यकीन मानिए आप उनके सबसे बड़े प्रचारक हैं। मैंने तीन साल पहले लिखा था कि फेसबुक पर जिस तरह कुछ लोग मोदी को ही मुद्दा बनाने को तुले हैं, उनके प्रति अपने दिलों में नफरत भरते जा रहे हैं, इन सबका नतीजा यह होगा कि मोदी के समर्थक और ज्यादा एकजुट होंगे और मोदीजी ज्यादा ताकतवर होकर सत्ता में वापसी करेंगे।

मैं फिर कह रहा हूं कि देश की ज्वलंत समस्याओं को मुद्दा बनाइए, उन पर तार्किक ढंग से लिखिए, पर मोदी को मुद्दा बनाने की भूल न करें। मैं देख रहा हूं कि लोगों ने कोई सबक नहीं लिया। वे नफरत भरे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे अपने देश के प्रधानमंत्री का सम्मान करना नहीं जानते। वे फिर वही गलती दोहरा रहे हैं। मुझे महसूस होता है कि आने वाले समय में मोदीजी राष्ट्रवाद पर आधारित मुद्दे उठाएंगे और उन पर कानून बनाने की पहल करेंगे। दूसरी ओर विपक्ष, अपनी पुरानी आदत के अनुसार उसमें सुधार की बात नहीं करेगा, बल्कि उसका विरोध करेगा। धीरे-धीरे उनका यह विरोध मोदी का विरोध बन जाएगा।

उनकी देखादेखी मेरे सोशल मीडिया मित्र मोदी के पीछे पड़ जाएंगे और इन सबका नतीजा यह होगा कि देश का एक विशाल वर्ग यह अनुभव करेगा कि ये पार्टियां और ये लोग देश के लिए खतरा हो सकते हैं। लिहाजा मोदी और ज्यादा मजबूत होंगे और 2024 में ज्यादा ताकतवर होकर लौटेंगे। मैं फिर कह रहा हूं, मुद्दे को ही मुद्दा बनाइए, मोदी को मुद्दा मत बनाइए। इतना भी किसी के क्या पीछे पड़ना!

एक बात और, ये जो टीवी पर चुनाव विश्लेषक और बुद्धिजीवी टाइप लोग आ रहे हैं, इन्हें न भी देखें तो कोई नुकसान नहीं। ये जमीनी हकीकत से दूर रहने वाले लोग हैं और अपना विश्लेषण दिल में मौजूद नफरत और मोहब्बत के आधार पर करते हैं। मैं तो बहुत पहले ही इन्हें देखना बंद कर चुका हूं। अच्छा होगा कि डिस्कवरी चैनल देखें, जापान का एनएचके वर्ल्ड देखें। अगर ये भी पसंद नहीं तो पकवान वाले चैनल देखें। मैं भी केक बनाना सीख रहा हूं!

— राजीव शर्मा —

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