भारत के ख़िलाफ़ पाकिस्तान के सूचना युद्ध की तो उसी समय भनक लग गई थी जब ओमान की एक राजकुमारी ने भारत के खिलाफ एक तथाकथित ट्वीट किया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री मेहमूद क़ुरैशी ने इस पर टिप्पणी दी लेकिन राजकुमारी ने ख़ुद ही स्पष्ट कर दिया कि यह ट्वीट उनकी तरफ से नहीं किया गया बल्कि उनकी तस्वीर को इस्तेमाल कर उनके नाम से फ़र्ज़ी अकाउंट चलाया जा रहा है।

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मीडिया विंग इंटर सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) और पाकिस्तानी आर्मी खुफिया ने भारत के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए मोर्चा खोला हुआ है। पाकिस्तान की मंशा दुनिया में भारत की पहचान पर हमला करना है। भारत दुनिया में सेकुलर और समावेशी देश के रूप में जाना जाता है लेकिन भारत में चल रहे विभिन्न नागरिक आंदोलनों को लेकर पाकिस्तान ने एक अलग ही प्रोपेगैंडा चला रखा है। इसके पीछे पाकिस्तान की मंशा भारत की छवि धूमिल करके उसके आर्थिक हितों को नुक़सान पहुंचाना है और देश को कमज़ोर करना है। विदेशी निवेश पर प्रतिकूल असर डालने की दुर्भावना सै पाकिस्तान प्रोपेगैंडा को हवा दे रहा है। इस रणनीति के लिए ट्विटर, व्हाट्सएप, यूट्यूब और फेसबुक पर पाकिस्तानी आईटी पेशेवर की टीम काम कर रही है। विशेषकर ट्विटर पर बड़ी संख्या में फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट पाकिस्तान ने बनवाए हैं। ट्विटर भारत या पाकिस्तान में संख्या के लिहाज से सबसे लोकप्रिय प्लैटफार्म नहीं है लेकिन बाक़ी दुनिया में प्रभाव और राय बनाने के लिए पाकिस्तान इसका भारत के खिलाफ प्रचार में भरपूर इस्तेमाल कर रहा है। पाकिस्तान ने नकली ऑडियो और वीडियो क्लिप का बड़ा आर्काइव खड़ा कर लिया है। इसले लिए इस्लामाबाद से ऐसे ट्वीटर अकाउंट भी बाढ़ आ गई है जो अरबी नाम से चल रहे हैं।

फेसबुक रिपोर्ट से पता चला है कि हाल के दिनों में, उसने 453 फेसबुक अकाउंट, 103 पेज, 78 ग्रुप और 107 इंस्टाग्राम अकाउंट को हटा दिया है, ये सभी एक “नेटवर्क” का हिस्सा थे, जो “समन्वित अमानवीय व्यवहार” में लिप्त थे। ये सभी भारत में नकली समाचार और अराजकता फैलाने के लिए काम कर रहे थे।

पाकिस्तान से कई पेज बनाए और उन्हें ऐसा नाम दिया गया जैसे भारत के समर्थन में यह भारत से ही चल रहे पेज या ट्वीटर हैंडल हैं। यह ट्रिक इसलिए अपनाई गई ताकि भारत के भोले लोग आंदोलन के नाम पर इसके साथ जुड़ें और उस विचार का समर्थन करें जो दूरगामी स्तर पर भारत के लिए नुकसानदेह है। यह ट्रैंड भी देखने में आया है कि भारत के लिए देशभक्ति से ओतप्रोत पेज बनाकर फेसबुक पर काफ़ी फॉलोवर ढूंढ लिए जाते हैं और एक बार जब ऐसा हो जाता है तो फेक न्यूज़ की बाढ़ आ जाती है। इन पेजऔर समूहों का बाद में इस्तेमाल भारतीय देश प्रेम की भावना को चोट पहुँचाने का है।

पाकिस्तान का भारत विरोधी मॉडल इतना परिष्कृत है कि इस्लामाबाद से कई पेज हिन्दी में भी चलाए जा रहे हैं। भारतीय समाचार चैनलों के स्क्रीन शॉट उठाकर उसमें फॉटोशॉप किया जाता है। इसमें “आर्मी लवर” नाम का एक पेज का उल्लेख काफी महत्वपूर्ण है। इसी तरह, एक अन्य पेज “इंडियन एयर फॉर्स वॉरियर्स- टच द स्काई विद ग्लोरी (भारतीय वायु सेना के योद्धा- गौरव के साथ आकाश को छूते हैं)” दिखने में देश प्रेमी पेज नज़र आता है लेकिन इस पर एक फेक न्यूज़ शेयर की गई जिसे शीर्षक दिया गया था- “एक मुस्लिम परिवार के घर में हजारों हिंदू चरमपंथी”। यह घटनाएं दिखाती हैं कि पाकिस्तानी मीडिया वॉर के लिए सोशल मीडिया को हथियार बना रहा है।

पाकिस्तान से चल रहे मीडिया साइको वॉर का प्रमुख विषय जम्मू और कश्मीर है। साथ ही इसकी फेक न्यूज़ के सहारे वह बाक़ी दुनिया में मुस्लिम उत्पीड़न को मुद्दा बनाना चाहता है। पाकिस्तान अपने पालतू हैंडल और पेज से यह बात दोहराता रहता है कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के तहत समाधान के लिए कश्मीर एक “विवादित क्षेत्र” है; भारत को इस मुद्दे को हल करने के लिए पाकिस्तान से बात करने की आवश्यकता है और चूंकि भारत बात करने से इनकार करता है, इसलिए अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप होना चाहिए। पाकिस्तान सोशल मीडिया की मदद से यह विचार भी स्थापित करने में लगा है कि कश्मीरी “आज़ादी”चाहते हैं। कश्मीरी भारत के खिलाफ जिहाद छेड़ रहे हैं और भारतीय सेना कश्मीरियों के मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रही है। पाकिस्तान यह भी प्रचार कर रहा है कि भारत कश्मीर में मुसलमानों के नरसंहार की तैयारी कर रहा है।

भारत के लिए, इस अभियान के खिलाफ सतर्कता की ज़रूरत है। जाने या अनजाने में, समाज को ध्रुवीकरण करने के लिए विदेश को साज़िश करने कीअनुमति नहीं दी जा सकती, यहां तक कि अस्थायी रूप से भी नहीं। समाज में अन्तरविरोध सरकार की नीतियों और कार्यक्रम के लिए हो सकती है लेकिन इसका यह अर्थ कदापि नहीं कि इसका लाभ देश का दुश्मन ले जाए। अन्तरविरोध लोकतंत्र का सौन्दर्य है, इसका कलह के रूप में दुरुपयोग देश के दुश्मन नहीं कर पाएं, इसकी योजना तो बननी ही चाहिए।

वसीम अकरम त्यागी
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)