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दैनिक समाचार पत्र दैनिक जागरण ने कठुआ रेप को लेकर जो रिपोर्ट प्रकाशित की है. उसको फर्जी करार देते हुए पूर्व आईपीएस अधिकारी ध्रुव गुप्त ने कहा कि यह एक पत्रकारिता के निष्पक्षता के नियमों को ताक पर रख राजनीतिक अजेंडे के तहत प्रकाशित की गई है.

उन्होंने कहा कि जम्मू के कठुआ में आठ साल की एक मासूम बच्ची आसिफा के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में उपलब्ध तमाम वैज्ञानिक सबूतों, प्रमाणों और तथ्यों को झुठलाते हुए अखबार ‘दैनिक जागरण’ ने अपने जम्मू सहित कई संस्करणों के हैडलाइन में जो खबर लगाई है, वह यह है – ‘बच्ची के साथ नहीं हुआ दुष्कर्म’. मनगढंत तथ्यों के आधार पर बनाई गई ‘जागरण’ की इस खबर से देश का हर संवेदनशील व्यक्ति हैरत में है.

पूर्व आईपीएस ने लिखा, ज्ञातव्य है कि दिल्ली की फोरेंसिक साइंस लैब ने अपनी रिपोर्ट में न सिर्फ बच्ची के साथ बलात्कार की पुष्टि की है, बल्कि यह भी स्पष्ट कहा है कि मंदिर के अंदर जो खून के जो धब्बे मिले थे वे पीड़िता के थे और वहां बालों का जो गुच्छा मिला वह एक आरोपी शुभम का था और यह भी कि पीड़िता के गुप्तांग और कपड़ों पर मिले खून के धब्बे उसके डीएनए प्रोफाइल से मैच करते हैं.

उन्होंने कहा, ‘जागरण’ ने निष्पक्ष पत्रकारिता के मूल्यों की कीमत पर अपने ख़ास राजनीतिक एजेंडे के तहत देश में बलात्कार के पक्ष जो माहौल बनाने की कोशिश की है, उसकी जितनी भी भर्त्सना की जाय कम होगी. ‘जागरण’ के इस अनैतिक, अमानवीय और आपराधिक चरित्र के ख़िलाफ़ मैं आज और कल पटना के तारामंडल में आयोजित बिहारियों के तथाकथित साहित्य उत्सव ‘बिहार संवादी’ का बहिष्कार करता हूं.

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