रवीश कुमार

आज एक एटीएम मशीन में 200 का नोट भरा जा रहा था. हमने भरने वाले से पूछा कि 2000 का नोट क्यों हटा दिए, पैसा निकालने पर मोटी सी गड्डी आ जाती है। सिनेमा के सीन की तरह ब्लैक मनी जैसा लगता है। पर्स भी मोटा हो जाता है। तब ए टी एम के कैसेट में 200 के नोट रखने वाला हंसने लगा।

बोला यही तो खेल है रवीश जी। अब तो एक बार में आप दस हज़ार की जगह आठ हज़ार ही निकाल सकेंगे। इससे होगा यह कि आप बार बार ट्रांजेक्शन करेंगे और उस पर चार्ज देंगे तो कमाई बढ़ेगी। दूसरा 200 के नोट की गड्डी मोटी होगी तो आप कम निकालेंगे, तो उससे भी ट्रांजेक्शन बढ़ेगा। फिर बैंक की कमाई होगी।

इसके बाद वो हंसा तो मैंने एक कहानी सुनाई। गांव में एक चाचा थे। उन्हें बेवकूफ बनाने में महारत हासिल थी। हम बच्चों से कहते थे कि तुम्हारे पास जो पैसे हैं हमें दे दो। हम दे देते थे। फिर कहते थे कि मान लो कि मैंने वापस कर दिया। फिर हम हां कह देते थे कि मान लिया कि आपने पैसे लौटा दिए। तब चाचा जी कहते थे कि जब लौटा ही दिए तो अब क्यों मांग रहे हो। जाओ घर, ये पैसा हो गया हमारा। इसे सुनकर वह भी हंसा।

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अब हर तरफ से लोगों को बेवकूफ बनाने का धंधा चल निकला है। हो कुछ नहीं रहा है, सब एक दूसरे की बात से बात मिलाकर ठहाके लगा रहे हैं। गेम समझ में आ गया हो तो गोदी मीडिया ऑन करो। टीवी पर झांसा देने वाले मुद्दे दिखाकर आपको उलझाया जा रहा है। दूसरी तरफ आपकी जेब से क़तरा क़तरा पैसा निकाला जा रहा है।

अभी हाल ही में नोटबंदी के फ्राड के बाद बहुत सारे एटीएम का केसेट बदला गया उसे 2000 के नोट के लायक बनाया गया, अब फिर से केसेट बदला जा रहा है ताकि उसमें 200 के नोट आ सके।

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