खलीकुज्ज़मा भाई से मिला। वे इंजीनियर हैं, सरकारी कंपनी NTPC में नौकरी करते थे, लेख लिखते थे सभाओं में भाग भी लेते थे, वो खुशी से बताते हैं मेरे गुरू इलाहबाद में मुरली मनोहर जोशी थे। विश्व हिन्दू परिषद, भाजपा और संघ ने मिलकर बाबरी मस्जिद तोड़ डाली थी।

सब जानते हैं कि नरसिम्हा राव ने मस्जिद गिरवाने में मदद करी थी। मस्जिद तोड़ने के विरोध में 7 लाख मुसलमानों ने दिल्ली में रैली करी थी। इससे घबरा कर नरसिम्हा राव नें मुसलमान नौजवानों को जेल में डालना शुरू किया, टाडा के अर्न्तगत करीब 50 हज़ार मुसलमानों को जेल में डाल दिया गया था।

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खलीकुज़्जमा भाई को भी उठा लिया गया। उन्हें स्पेशल सेल में 40 दिन यातनायें दी गई। उनसे पुलिस वाले यही पूछते थे कि तुम लोग बाबरी मस्जिद का बदला लेने के लिये क्या करोगे ?

खलीकुज़्जमा भाई बताते हैं मेरे खिलाफ कोई केस ही नहीं बनता था। मैनें ना तो कोई चींटी मारी, ना कोई दस पैसे का भी पटाखा फोड़ा ना किसी को गाली दी थी। पुलिस वालों ने खलीकुज़्जमा भाई की उंगलियों के नाखून प्लास से उखाड़ दिये।आज भी खलीकुज़्जमा भाई की दसों उंगलियों की पोरें अपनी वास्तविक आकार की नहीं हो पायी हैं।  खलीकुज़्जमा भाई को पांच साल जेल में रखने के बाद अदालत नें उन्हें बाइज्ज़त बरी कर दिया।

खलीकुज़्जमा भाई अब बच्चों में शिक्षा का काम करते हैं, खलीकुज़्जमा भाई ने तिहाड़ जेल में इन्दिरा गांधी खुला विश्वविद्यालय की शाखा खुलवाई और कैदियों की शिक्षा का काम किया था।

खलीकुज़्जमा भाई लगातार हंसते रहते हैं, मैनें उनसे पूछा आपके ऊपर जुल्म करने वालों पर आपको ग़ुस्सा नहीं आता।

खलीकुज़्जमा भाई ज़ोर से हंसे और बोले नहीं गुस्सा नहीं आता तरस आता है। काश उन्हें भी सच्ची शिक्षा मिली होती तो वो ऐसा काम क्यों करते ? इसलिये मैं अब बच्चों को सच्ची शिक्षा देने का काम करता हूं ताकि ये बच्चे बड़े होकर किसी पर ज़ुल्म ना करें।

खलीकुज़्जमा भाई फिर ज़ोर से हंसते हैं। मैं भीतर से ज़ोर से रोना चाहता हूँ। मैं खलीकुज़्जमा भाई से गले मिलता हूँ और तेज़ी से मुड़ कर चल देता हूं ताकि वो मेरे आंसू देख कर अपना हंसना ना रोक दें।

हिमांशु कुमार की कलम से…

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