म्यांमार की सेना ने देश और दुनिया के सबसे पीड़ित अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय के ऊपर जुल्मों-सितम की हदें पार करते हुए दुनिया के सामने अपना क्रूर चेहरा पेश किया.

इस बात का खुलासा मानवाधिकार संगठनों और सयुंक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट में पहले ही हो चूका हैं. लेकिन अब म्यांमार से अपना सब कुछ गँवा कर अपनी जान बचाने में कामयाब हुए एक गुट ने म्यांमार सेना के जुल्म की दास्ताँन सुनाई हैं. बांग्लादेश में शरण लेने वाली एक महिला ने कहा कि म्यांमार के सुरक्षा बलों ने मेरे पति और मेरे बेटे की हत्या कर दी है.

ज़ीनत आरा नामक महिला ने बताया कि म्यांमार की सेना ने लोगों के समस्त घरों को जला दिया और बहुत से लोगों की हत्या कर दी. वहीँ एक अन्य शख्स मोहम्मद इदरीस ने भी कहा है कि म्यांमार की सेना मुसलमानों को कड़ी यातना देती है.

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बांग्लादेशी अधिकारियों का अनुमान है कि म्यांमार के बेघर होने वालों में से लगभग चार लाख मुसलमान इस देश में रह रहे हैं जिनमें से 70 हज़ार लोग अभी हाल ही में म्यांमार से बांग्लादेश पहुंचे हैं.

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