मुज़फ़्फ़रनगर दंगों की केस वापसी: ‘हैरानी योगी सरकार पर नहीं अखिलेश सरकार पर हो’

10:52 am Published by:-Hindi News
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मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के केस वापसी के ऐलान पर अगर हैरान होना है तो योगी सरकार पर नहीं अखिलेश सरकार पर होना चाहिए. मुज़फ़्फ़रनगर में दंगा पूरे 20 दिन तक अखिलेश सरकार में चला था. अखिलेश यादव ने न तो उन दंगों को रोका और न ही उसके बाद चार साल तक सत्ता में रहकर दंगाइयों को सज़ा दिलवाई.

फरवरी 2016 में मुज़फ़्फ़रनगर के ज़िला जज अरविंद कुमार उपाध्याय ने दंगे के 10 मुलज़िमों को ये कहकर बरी कर दिया था कि आरोपों को साबित करने के लिए मुलजिमों के ख़िलाफ़ सबूत ही नहीं है. इन मुलज़िमों पर दंगा फैलाने के अलावा 10 साल के एक बच्चे और 30 साल की एक औरत की हत्या का मुक़दमा दर्ज था. मगर अखिलेश सरकार की पुलिस इनके ख़िलाफ़ सबूत ही जमा नहीं कर पाई और सभी बरी हो गए. हैरान-परेशान इसपर होना चाहिए.

मुज़फ़्फ़रनगर पुलिस का एक अफ़सर अगर मुजरिमों को सलाखों के पीछे पहुंचाने की बजाय ये कहना शुरू कर दे कि मुसलमान अगर दंगों का मुक़दमा लड़ेंगे तो क्या हिंदू उन्हें यहां रहने देंगे? दोनों का भला इसी में है कि समझौता हो जाए तो हैरान इसपर होना चाहिए. (अफ़सर ने ऐसा मुझसे कहा था)

हैरान होना है तो दादरी कांड की जांच कर रही पुलिस पर हों जिसने अपनी केस डायरी में लिख दिया कि उसे अख़लाक़ की हत्या का एक भी चश्मदीद नहीं मिला. जब अख़लाक़ की हत्या हुई तो ज़्यादातर लोग सो रहे थे और कुछ अपने खेतों पर थे. मतलब जिस अख़लाक़ की हत्या की अपील मंदिर के लाउडस्पीकर से हुई, जिसे भीड़ ने जमा होकर मारा, देश और विदेश की मीडिया जिस केस की निगरानी कर रही थी, उस केस में अखिलेश यादव की पुलिस अख़लाक़ की हत्या का एक भी चश्मदीद नहीं जुटा पाई. ज़ाहिर है ऐसी सूरत में देर-सबेर सभी मुलज़िमों को सबूतों के अभाव में अदालत से बरी होना है, तब हम ये लिखकर हैरान होंगे कि No one Killed Akhlaqe Ahmad. सभी मुलज़िम ज़मानत पर आख़िर हैं ही.

मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के केस वापसी के ऐलान पर सवाल योगी सरकार से क्यों जबकि वो इसी वादे पर चुनाव जीतकर आए हैं. उन्होंने ये तो कहा नहीं था कि दंगा अखिलेश सरकार में हुआ, हम पीड़ितों को इंसाफ़ दिलाएंगे और दोषियों को जेल में पहुंचाएंगे ताकि दोबारा दंगे न हों. बीजेपी ने तो साफ कहा था कि सरकार बनी तो आरोपियों पर दर्ज मुक़दमे वापस होंगे.

सवाल करना है तो मुलायम सिंह यादव से करना चाहिए जिनके दिल्लीवाले घर पर पिछले महीने जाट और मुस्लिम नेताओं की बैठक के बाद केस वापसी का समझौता हुआ. मतलब जो काम बीजेपी और योगी सरकार खुलेआम डंके की चोट पर कर रही है, वही काम मुलायम सिंह यादव अपने घर में मीटिंग करके करवा रहे हैं. हैरानी अगर किसी को होनी है तो इसपर होनी चाहिए.

(ये लेख वरिष्ट पत्रकार शाहनवाज मालिक की फेसबुक पोस्ट से साभार लिया गया है)

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