Muzaffarnagar Riots Court Lets Off 10 In Murder Of Boy Woman
सांकेतिक फोटो

ऊपर से शान्त दिखने वाला पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मुजफ्फरनगर व शामली क्षेत्र अंदर से सुलग रहा है। हर एक अपराध को सांप्रदायिक चश्में से देखा जा रहा है जिसमें राजनीतिक दल अहम भूमिका निभा रहे हैं। बीस दिन पहले कांधला से जाती विशेष की युवती समुदाय विशेष के युवक के साथ चली गई थी, जिसे पुलिस अभी तक नहीं खोज पाई है। भाजपा इस मुद्दे को धार्मिक रंग देकर इसे हिन्दू बनाम मुस्लिम की लड़ाई बनाना चाहती है। और जैसा कि इस क्षेत्र में होता आया है कि यहां एक जाती विशेष के लोग कानून को ताक पर रखकर हर एक विवाद को खाप पंचायतों से निपटाते आये हैं।

ऐसा ही रूख अब इस मामले ने अख्तियार कर लिया है। 2017 के विधान सभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा और सपा दोनों ही दल इस तरह की घटनाओं से ध्रुवीकरण कराना चाहते हैं। वरना क्या कारण है कि बीस दिन गुजर जाने के बाद भी सूबे की पुलिस न तो आरोपी युवक को गिरफ्तार कर पाई और न ही युवती का कोई सुराग मिला ? सांप्रदायिकता की सुलगती इस आग में अखबार विशेष का भी योगदान रहना तय मानकर चलिये, क्योंकि अखबारों की भाषा जिस तरह की है वह यह बताने के लिये काफी है कि लोगों के अंदर फिर से नफरत भरी जा रही है।

एक बड़े दैनिक अखबार के मुताबिक “गैर संप्रदाय के युवक द्वारा युवती का अपह्रण” इस तरह की भाषा आखिर क्या संदेश दे रही है ? अगर अपह्रण हुआ है तो क्या अपह्रण केवल तभी अपराध की श्रेणी में आयेगा जब अपह्रणकर्ता पीड़ित के समुदाय से न होकर दूसरे समुदाय से हो ? अखबार के दफ्तरों में बैठे मोटी पेट वाले संपादक यह कैसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं ?

यह वही भाषा है जैसी कवाल कांड के दौरान प्रयोग की गई थी, जिसके नतीजे में इस क्षेत्र को सांप्रदायिक हिंसा में जलना पड़ा था। अखबार फिर उसी ढ़र्रे पर आ गये हैं, बेहतर हो कि प्रशासन को काम करने दिया जाये, और इन खाप पंचायतों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाये। यह देश कानून से चलता है कोई भी खाप संविधान से ऊपर नहीं हो सकती।

वसीम अकरम त्यागी


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