Friday, July 30, 2021

 

 

 

पटेल से ज़्यादा मुस्लिम समुदाय को आरक्षण की अधिक ज़रूरतः एसडीपीआई

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नई दिल्ली। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) ने हाल ही में पटेलों द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत आरक्षण की मांग को लेकर की गई हिंसा में मारे गए आधा दर्जन से ज़्यादा लोगों की मौत पर संवेदना व्यक्त की है।

एसडीपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए सईद ने अपने बयान में कहा कि एक 22 साल के हार्दिक पटेल नाम के युवक के नेतृत्व में इस तरह का आंदोलन अनावश्यक है। क्योकि मंडल आयोग द्वारा सौंपी गई सूची के मुताबिक पटेल द्वारा आरक्षण की मांग करना बेमानी है। पटेल समुदाय गुजरात में आर्थिक व राजनैतिक रूप से काफी मज़बूत है। एक तिहाई सत्ताधारी पार्टी के 121 विधायक गुजरात में पटेल समुदाय से है साथ ही गुजरात की मुख्यमंत्री, प्रदेशअध्यक्ष के अलावा अधिकतर मंत्री भी पटेल समुदाय से ही हैं।

उन्होंने कहा जैसा कि पटेल नाम से ही ज़ाहिर होता है इसका मतलब होता है ज़मीन का मालिक। साथ ही वह बेहद प्रभावशाली और अमीर है और उन्हें आरक्षण की ज़रूरत नहीं है। यदि वर्ततान में किसी समुदाय को देश में आरक्षण की ज़रूरत है तो वह मुस्लिम हैं जोकि जिंदगी के हर पहलू में पिछड़े हुए है।

श्री सईद ने कहा कि आज़ादी के 69 साल के बाद भी कौन है जो जाति की राजनीति कर रहा है जहां 60-70 प्रतिशत आबादी 50 प्रतिशत आरक्षण के अंतर्गत है, जबकि बची हुई 50 प्रतिशत जिसमें 14.2 मुस्लिम, 2.3 प्रतिशत ईसाई और दूसरी उच्च जातियां आती हैं। ऐसा महसूस होता है कि पटेल जाति को ओबीसी कोटा के लिए उकसाना उच्च जातियों द्वारा राजनैतिक लाभ के लिए जाति कार्ड खेला जा रहा है

श्री सईद ने कहा कि राज्य में पटेलों की आबादी महज़ 12-15 प्रतिशत है जबकि वह 50 प्रतिशत संपत्ति के मांलिक है। लेकिन फिर भी उनके लिए इतना काफी नहीं है वह ओबीसी कोटा हासिल करने के लिए दंगे कर रहे हैं। ऐसे में यदि मोदी सरकार वोट बैंक की राजनीति के चलते इन्हें आरक्षण देती है तो क्या यह वोट बैंक की राजनीति नहीं कहलाएगी?

भारत जैसे विकासशील और इतने बड़े देश में हमशा ऐसी तादाद काफी लोगों की रही है जिनकी आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है जबकी पटेल/मराठा /जाट आदि जातियां ज़मीदारी कर रही हैं। इसके अलावा एक अहम सवाल यह भी पैदा होता है कि जिस समुदाय के पास अमेरिका के साथ साथ देश और दुनियभर में एक चौथाई मोटेल के मालिकाना हक हो वह किस तरह पिछड़ी हो सकती है। देश में दूसरी जातियां मुस्लिम सहित आरक्षण की ज़्यादा हक़दार हैं। इस मामले में सभी पार्टियां मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकती और उन्हें इसके खिलाफ़ आवाज़ उठाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पिछले लोकसभा चुनावों से ही भाजपा ने देशभर में धार्मिक कार्ड खेल कर जातिगत यु़द्ध छेड़ रखा है। अब यह आरएसएस के द्वारा चलाई जा रही है। भारत में आज ज़रूरत आन पड़ी है कि वह सभी तरह कि जाति, धर्म और भाषाई सरहदों की ज़ंजीरों को तोड़कर सच्चे लोकतंत्र की स्थापना हो यदि ऐसा होता है तो भारत को कुछ ही दशकों में महाशक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता।

एसडीपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए सईद

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