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वसीम अकरम त्यागी की कलम से

मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं वे किसी टीवी चैनल पर बैठे उपदेशक या प्रवचन देने वाले बाबा नहीं हैं। मगर उनका आज का भाषण बता रहा है कि वे सिर्फ ‘उपदेशक’ हैं। मोदी कहते हैं कि गाय के नाम पर गुंडागर्दी हो रही है, 80 फीसदी गौरक्षक गौरखधंधा करते हैं, दिन में गौरक्षक का चौला ओढ लेते हैं गौभक्षक।

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इन तीन बातों से देश का बच्चा – बच्चा वाकिफ है। मोदी ने कुछ भी नया नही कहा। वे जिस भाषा को बोल रहे हैं वह भाषा प्रधानमंत्री की नहीं लगती बल्कि किसी सलाहकार की लगती है। मोदी जिस पद पर हैं उस पद पर बैठकर उपदेश नहीं दिये जाते बल्कि कार्रावाई की जाती है। मोदी को गौ-आतंकियों के खिलाफ कार्रावाई करनी चाहिये उन्हें मुलायम सिंह यादव से मिलकर वे मालूम करना चाहिये वे तीन नाम कौनसे हैं जिन्होंने दादरी किया था ? मगर वे ऐसा नहीं करेंगे वे देश में बढ रहे कट्टरपंथ का इलाज सिर्फ ‘मन की बात’ में बोलते हैं। मगर कार्रावाई के नाम पर वे बिल्कुल शून्य हैं।

दादरी हुआ तो मोदी खामोश रहे जबकि उस कांड में मुख्य आरोपी भाजपा नेता का पुत्र था। अब चूंकि गौआतंकियों ने दलितो को निशाना बनाना शुरू किया तो मोदी को वोट बैंक की चिंता सताने लगी। इसीलिये उन्होंने गौरक्षकों को गौरखधंधा करने वाला कह डाला। मतलब साफ है मोदी दलितो को हिन्दू बनाना चाहते हैं जबकि गौआतंकियो ने उन्हीं दलितों को गाय के नाम पर आतंकित करके उन्हें ‘शूद्र’ बनाने की तरफ धकेला। मोदी फिर से उन्हीं दलितों को यूपी चुनाव के मद्देनजर भाजपा की तरफ लाना चाह रहे हैं। इसीलिये उन्हें अचानक इल्म हुआ कि देश में गाय के नाम पर भी आतंक फैलाया जा रहा है। दरअस्ल यह सारा खेल दलित वोट बैंक का है।

Wasim Akram Tyagi लेखक मुस्लिम टूडे मैग्जीन के सहसंपादक हैं।

नोट – यह लेखक के निजी विचार है. कोहराम न्यूज़ लेखक द्वारा कही किसी भी बात की ज़िम्मेदारी नही लेता है.

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