Saturday, September 18, 2021

 

 

 

नजीब की गुमशुदगी, सिस्टम पर सवालिया निशान,लोकतंत्र से उठता विश्वास

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23_10_2016-jnunajeeb

मेहदी हसन एैनी के क़लम से

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय,नई दिल्ली,
अपने धर्मनिरपेक्ष प्रणाली की वजह से पूरी दुनिया में एक अलग ही स्थान रखता है।  दरअसल यह विश्वविद्यालय अपने पहले ही दिन से कुछ विचारों की वजह से आम व ख़ास सभी में लोकप्रिय है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना का उद्देश्य केवल तालीम से लैस करना  ही नहीं था बल्कि  समाज को अत्याचार और अन्याय से मुक्ति दिलाना भी है।

राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर हमेशा इस विद्या मंदिर  के छात्रों ने अपनी सामाजिक एकजुटता और अनेकता में एकता वाली  सोच को परवान चढ़ाया है। इस गठबंधन व इत्तिफाक़, भाईचारे व मोहब्बत और आपसी भाईचारा को वे सभी महसूस कर सकते हैं जिन्होंने जे, एन, यू की धर्मनिरपेक्ष फिज़ा में अपने जीवन के चंद लमहें भी बितायें हों, इस विश्वविद्यालय ने  ना  जाने कितने एैसे मसीहा पैदा किये हैं जिन्होंने भारतीय अवाम की बुनियादी समस्याओं के साथ साथ वैश्विक स्तर पर  मज़लूमों  और असहाय लोगों की मदद की है, लेकिन इन दिनों जे.एन.यू भारतीय सरकार की तंगनज़री और सौतेला व्यव्हार  का शिकार है, सरकार जे.एन.यू को हर स्तर पर बैकफुट पर  धकेलना चाह रही है,
कन्हैय्या,उमर खालिद मुद्दे को चंद मिनटों में पाकिस्तान से जोड़ने वाले गृहमंत्री के अपने होल्ड वाले स्टेट की और देश की राजधानी दिल्ली के इस विशाल विद्यापीठ से ग़ायब होने वाले छात्र नजीब को लेकर ना तो केंद्रीय सरकार अभी तक संजीदा है और ना ही गृहमंत्रालय को इस की कोई फिक्र है, 13 दिनों से ग़ायब नजीब जिसको अखिल भारतीय विद्या परिषद के गुंडों ने मार मार कर अधमरा कर दिया था वो नजीब आज तक नहीं मिला, नजीब की मां पिछले 13 दिनों से अपने बच्चे की भीख  मांग रही है,यहा वहां की ठोकरें खा रही है, इस पूरे मामले को लेकर न जे, एन, यू गंभीर है और
न ही सरकार गंभीर है। अब नजीब का क्या होगा?  जो गुंडे हैं वह जे, एन, यू में सरेआम घूम रहे हैं और अपने आका जे, एन, यू प्रशासन की चाटूकारिता  कर रहे हैं।

न उन गुंडों और उनके आक़ाओं की गिरफ्तारी हुई है और न ही पुलिस कोई कार्रवाई कर रही है। इस मुसीबत के समय में आखिर  नजीब का परिवार कहां जाए? किससे फरियाद करे? किसके सामने अपने बेटे की दुहाई दे,?

नजीब का संबंध यूपी के एक जिले बदायूं से है-
वह एक गरीब परिवार से संबंध रखता है- उसने जामिया मिल्लिया इस्लामिया, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी , जामिया हमदर्द और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा पास किया लेकिन जेएनयू में नाम आने के बाद वह यहीं से “एमएससी बायो टेक्नालोजी” करने का फैसला कर लिया-
जेएनयू के हॉस्टल ‘माही मांडव  में रहता था-  वह कभी किसी अपराध में शामिल नहीं रहा,  एम.एस.सी बायो टेक्नोलोजी कोई मामूली कोर्स नहीं है बल्कि वहां तक पहुंचने के लिए असाधारण मेहनत करनी पड़ती है जो नजीब ने की-
J.N.U मेॆ बायोटेक्नालोजी की सिर्फ़ 20 सीटें हैं,नजीब किसी के कोटे से या सिफारिश से नहीं अपनी मेहनत और लगन से यहां तक पहुंचा था, उसने इतने महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम के पूरा होने के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को ख़ैर बाद कहकर जेएनयू में दाखिला लिया तो उसके सामने कोई महत्वपूर्ण लक्ष्य अवश्य रहा होगा वह भविष्य में देश तथा राष्ट्र के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता था, शायद हिंदुत्व वादी संगठन ABVP के गुंडों को नजीब का कामयाब भविष्य  चुभने लगा था,

नजीब अहमद का मामला मामूली नहीं है,
एक विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय से एक छात्र का 13  दिनों से गायब रहना बहूत सारे सवाल उठाता है, विद्यालय प्रशासन को पता भी है कि उसके साथ मारपीट करने वाले कौन लोग हैं लेकिन प्रशासन व सरकार इन गुंडों के सामने बेबस है- उस पर यही कहा जा सकता है कि प्रशासन और सरकार में कानून और न्याय नाम की कोई बात नहीं है- इस लोकतांत्रिक देश में मुसलमानों की समस्याओं से किसी को मतलब नहीं है-

इससे पहले इसी विश्वविद्यालय में कन्हैया कुमार का मामला हुआ था जिसे विश्व स्तर की खबर बनाने के लिए मीडिया, बुद्धिजीवी, गैर सरकारी संगठनों, मुस्लिम उलेमा और मुस्लिम संगठनों ने भी बैनर लगाकर कार्यक्रम कर कन्हैया का समर्थन किया था लेकिन आज सब लोग चुप हैं, कोई बोलने के लिए तैयार नहीं है नजीब अहमद के मामले में सरकार मूकदर्शक बनी हुई है और यहां की खुफिया एजेंसियां जो कुछ ही मिनटों में एक विस्फोट के बाद आतंकवादियों का पता लगा लेती है और जेएनयू के भाषण में विदेशी व्यक्ति की सोच का भी पता लगा लेती हैं वह भी असहाय हैं- दिल्ली पुलिस की हालत यह है कि उसे यह पता रहता है कि किस गली में किस बिल्डिंग में नया मंजिल बनने वाला है और वहाँ पहुँच कर मकान मालिक से पैसे लेकर रिश्वत लेकर अपना हराम का पेट पालती है लेकिन जब देश के एक बड़े  विश्वविद्यालय से  उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाला एक छात्र गायब हो जाता है

तो यही तेज़तर्रार दिल्ली पुलिस बुलेट प्रूफ़ जैकेट
पहन कर नजीब के लिये आवाज़ उठाने वाले लड़कों व लड़कियों पर लाठीचार्ज करके अपनी बहादुरी  का लोहा मनवाना चाहती है, नेताओं के खाने से लेकर सोने तक को बिग ब्रेकिंग न्यूज़ बनाने वाली मीडिया को भी अभी तक नजीब की मां की फरियाद अब तो नजीब की मां भी ना उम्मीद हो चुकी है, उसके आंसू खत्म हो चुके हैं, बात बात पर ट्वीट करने वाले,मुसलमानों के एक हाथ में लैपटाप,दूसरे में कुरान देखने की ख्वाहिश रखने वाले प्रधानमंत्री समेत उनका पूरा सिस्टम अपाहिज हो चुका है,अब तो नजीब मिले या ना मिले, पर अगर नजीब की मां की आहें,लग  गयीं,तो ABVP की आक़ा बी.जे.पी की चूलें हिल जायेंगीं, इस लिये अब भी वक्त है,नजीब को युद्ध स्तर पर खोजने और उसकी मां को सुरक्षा देने की, साथ ही ABVP जैसे आतंकी संगठन को पूरे देश में बैन करने की,. आर.एस.एस की इस सांप्रदायिक व हिंसक विंग ने शिक्षण संस्थानों को गंगाजमुनी सभ्यता और सदभावना  की संस्कृति से वंचित करके उन्हें नफरत की आग में झोंकने अभियान छेड़ रखा है।

अब ज़रूरत इस बात की है कि मुस्लिम संगठन,रहनुमा,और सेक्यूलर अवाम मैदान में खुल कर आयें, सिर्फ़ सम्मेलन और कांफ्रेस ना करके राष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनायें, क्योंकि अगर यूं ही देश के प्रतिभाशाली और TALENTED बच्चों को बर्बाद करने की साजिश चलती रही तो याद रखिए वह दिन आएगा कि मुसलमानों को सिर्फ इसलिए दूसरे दर्जे का नागरिक बना दिया जाएगा क्योंकि हम पर अशिक्षित, और  असभ्य क़ौम का ठप्पा लगा होगा।

नोट – यह लेखक के निजी विचार है कोहराम न्यूज़ लेखक द्वारा कही किसी भी बात का समर्थन नही करता 

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