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मुसलमानों को उच्च शिक्षा और मिलने वाले स्कॉलरशिप केंद्र सरकार ने बंद कर दिया है. जिसकों लेकर जामिया मिल्लिया इस्लामिया के रिसर्च स्कॉलर ने केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज उठाते हुए एक ये लेख लिखा हैं. मुस्लिम रिसर्च स्कॉलर को मिलने वाली मौलाना आज़ाद नेशनल फ़ेलोशिप (मानफ) अब सरकार की साज़िशों के बाद बंद होते नज़र आ रही है जिसका साफ मक़सद है कि मुस्लिम नौजवान हायर एजुकेशन में ना जा पाए.

मानफ की नई गाइड लाइन के तहत अब ये स्कॉलरशिप उन्ही रिसर्च स्कॉलर को मिल पायेगा जिसके पास नेट (NET) हो जबकि इसी स्कॉलरशिप के लिए पहले ये शर्त नही थी. हम सब जानते है कि मुस्लिमो में हायर एजुकेशन की सख्त कमी और आर्थिक गरीबी के वजह से ये स्कॉलरशिप बनाया गया था क्योंकि मुस्लिम में अधिकतर छात्र छात्राएं ऐसे होते है जो मास्टर की पढ़ाई करने के बाद संसाधनों की कमी के वजह से NET एग्जाम नही निकाल पाते जिनको आगे की रिसर्च की पढ़ाई करने मे हर तरह की दिक्कते पेश आती है. इस स्कॉलरशिप के ज़रिए एक उम्मीद रहती थी कि जो छात्र छात्राएं पढ़ने में बेहतर है. उनको इस स्कालरशिप के मदद से एम फिल और पी एच डी की पढ़ाई करने में आसानी होगी क्योंकि इस स्कॉलरशिप के तहत पांच साल तक सरकार के तरफ से आर्थिक मदद मिलती है और मुस्लिम नौजवानों को रिसर्च की पढ़ाई के लिए एक हिम्मत मिलती है लेकिन अब नई गाइड लाइन के बाद मुस्लिम समुदाय से हायर रिसर्च एजुकेशन में जाने की ख्वाहिश रखने वाले छात्र छात्राओं  की भविष्य अंधेरे में नज़र आ रही है.

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सरकारी आकड़ो के हिसाब से जहाँ  हायर एजुकेशन में नेशनल एवरेज एनरोलमेंट लगभग 14 प्रतिशत है वही मुसलमानो में ये एनरोलमेंट सिर्फ 4 प्रतिशत है. इस आंकड़े से साफ पता चल रहा है कि मानफ जैसे स्कॉलरशिप को खत्म करने के बजाए सरकार को इस तरह के दूसरे स्कॉलरशिप स्कीम खोलने चाहिए। लेकिन मुसलमानो को प्रति सरकार का भेदभाव साफ़ नजर आ रहा है. वही दूसरी तरफ दलित, ट्राइबल और बैकवर्ड समुदाय से संबंध रखने वाले छात्रो को मिलने वाली स्कॉलरशिप में इस तरह की कोई शर्त नही है. उन्हें आगे रिसर्च की पढ़ाई के लिए सिर्फ मेरिट और मार्क्स के बेसिस पे स्कॉलरशिप दिया जाता है जबकि मौलाना आज़ाद स्कॉलरशिप में NET एग्जाम की शर्त लगा कर केंद्र सरकार अल्पसंख्यक विरोधी मानसिकता साफ जाहिर कर चुकी है.

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मीरान हैदर, कन्वेनर, जामिया स्टूडेंट्स फोरम,
(एमफिल रिसर्च स्कॉलर) जामिया मिल्लिया इस्लामिया

अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले कुल 1000 छात्रों को साइंस, आर्ट्स, कॉमर्स के क्षेत्र में रिसर्च की पढ़ाई करने के लिए मौलाना आज़ाद नेशनल फेलोशिप (मानफ) दिया जाता है जिसमे से 776 सीट मुस्लिम छात्रो के लिए जबकि 224 सीट सिख, ईसाई, जैन व पारसी इत्यादि छात्रो के लिए है. केंद्र सरकार को मालूम है कि NET एग्जाम क्वालीफाई करने का दर मुस्लिम स्टूडेंट्स में ना के बराबर है जिसके वजह से आगे चल कर जहाँ ये स्कॉलरशिप 776 स्टूडेंट्स को मिलता था वहां अब चंद छात्रो को ही मिलेगा और आगे भविष्य में ये भी मुमकिन है कि इस स्कॉलरशिप को बंद कर दिया जाए. अब ऐसे हालात में वो सभी मुस्लिम छात्र छात्राएं जो ग्रेजुएशन और मास्टर की पढ़ाई कर रहे है और आगे चल कर एमफिल और पीएचडी करने की ख्वाहिश रखते है उनको सोचना चाहिए कि सरकार की इस नीति के खिलाफ मिल कर कैसे आवाज़ उठाई जाए और कैसे इस नए अल्पसंख्यक विरोधी शर्त को जल्द से जल्द लागू होने से रोका जाए.