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वसीम अकरम त्यागी

बेंगलूरू – किस्मत भी अजीब खेल खेलती है, इसी देश में एक लाल कृष्ण आडवाणी हैं जो तमाम कोशिशों के बावजूद न तो देश के प्रधानमंत्री बन पाये और न ही राष्ट्रपति, हालांकि उनकी बोई हुई फसल को नरेन्द्र मोदी ने न सिर्फ काटा बल्कि उसी के बूते केन्द्र की सत्ता भी कब्जाई और बीते चार साल से देश के प्रधानमंत्री हैं। भारतीय जनता पार्टी में ऐसे ही एक नेता हैं बीएस यदियुरप्पा जिन्होंने दो बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली लेकिन दोनों बार ही किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और वे एक बार सात दिन तथा दूसरी बार सिर्फ ढ़ाई दिन तक ही मुख्यमंत्री बन पाये।

बात जब तक़दीर की आती है, और उसमें में भी कुंडली में राज योग की आती है तो इस देश में कई नाम ऐसे हैं जिनके पास न तो बहुमत था और न ही किसी को ये अंदेशा था कि वे मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बन सकते हैं, लेकिन तकदीर ने उनका साथ दिया और वे मुख्यमंत्री/ प्रधानमंत्री बने। इस मामले में कर्नाटक का गौड़ा परिवार सबसे आगे है। एच. डी देवगौड़ा जब प्रधानमंत्री बने तो कहीं से कहीं तक भी किसी को अंदेशा नहीं था कि जनता परिवार से एच. डी देवगौडा प्रधानमंत्री बनेंगे, लेकिन वे पीएम बने।

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राजा कभी मंत्री नही बनता

पुराने कांग्रेसी और वर्तमान में बहुजन समाज पार्टी के नेता ठाकुर उम्मेद सिंह पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के काफी करीबी रहे हैं। वे चंद्रशेखर से जड़ा एक किस्सा सुनाते हैं और बताते हैं कि एक बार इन्दिरा गांधी ने चंद्रशेखर से कहा कि आप मंत्री बन जाईये तो उन्होंने (चंद्रशेखर ने) इन्दिरा गांधी की सलाह पर ठहाका लगाकर कहा कि राजा कभी मंत्री नहीं बनता, मैं जब भी बनुंगा प्रधानमंत्री बनुंगा। तकदीर ने उनकी किस्मत में प्रधानमंत्री का पद लिखा था, इसी लिये संयोग ऐसा हुआ कि उत्तर प्रदेश के बलिया के रहने वाले चंद्रशेखर एक दिन भारत के प्रधानमंत्री बने।

पिता की ही तरह है कुमार स्वामी की किस्मत

भारतीय राजनीति में देवगौड़ा परिवार को किस्मत का धनी माना जाता है, कुमार स्वामी 2006 में जब पहली बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने तब भी उनकी पार्टी की स्थिती ऐसी ही थी जैसी आज है, उस वक्त भी उनकी पार्टी के पास पर्याप्त बहुमत नहीं था लेकिन भाजपा के सहयोग से वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री बन पाये।

इस बार चुनाव प्रचार के दौरान कुमार स्वामी और उनके पिता एचडी देवगौड़ा अक्सर मंदिर जाकर मत्था टेकते थे, उन्हें यकीन था कि भगवान इस बार उनकी दुआ कबूल करेगा और उन्हें कर्नाटक में शासन करने का मौका मिलेगा।

दिलचस्प है फिलिस्तीन का मामला

बुद्धवार 23 मई को कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे एचडी कुमार स्वामी छ महीने पहले इजरायल गये थे। और फिर वहां से फिलिस्तीन गये, उनकी इस यात्रा में शामिल रहे भारत में इजरायल के वाणिज्यक दूत आसिफ इक़बाल बताते हैं कि कुमार स्वामी ने इजरायल से कृषि और कर्नाटक में पानी की समस्या के समाधाने के लिये राय मांगी थी। उनके साथ जेडीएस के नेता बस्वराज होराटी, लोकसभा सांसद पुटराजू पूर्व मंत्री पाजी गौड़ा, और मैसूर विश्विद्यालय के वाईस चांसलर केएस रंगप्पा कुमार स्वामी के साथ गये थे। आसिफ बताते हैं कि इजरायल के तकीनीकी और कृषि विभाग से भारत से इजरायल गये कुमार स्वामी के प्रतिनिधिमंडल ने विस्तृत बात चीत की थी, और राज्य में किस तरह कृषि और किसानों की समस्या का समाधान निकाला जाये इस विषय पर विस्तृत चर्चा की थी।

मस्जिद ए अक़्सा में डाली थी अर्जी

आसिफ इक़बाल बताते हैं कि इजरायली अधिकारियों से मिलने के बाद कुमार स्वामी अपने साथियों के फिलिस्तीन स्थित मस्जिद ए अक़्सा गये वहां पर उन्होंने मस्जिद के अंदर एक स्लिप डाली थी जिसमें उन्होंने लिखा था कि उन्हें कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनना है, उनकी इस दुआ को कबूल किया जाये। आसिफ कहते हैं कि मैं समझता हूं कि कुमार स्वामी की वही दुआ कबूल हुई है। इसके अलावा वो यहूदी धर्म के धामिक स्थल टेम्पल माउंट भी गये वहां भी उन्होंने सीएम बनने की दुआ मांगी.

आसिफ इक़बाल

फिलिस्तीन को लेकर नज़रिया

आसिफ इक़बाल से इस संवाददाता ने सवाल किया कि कुमार स्वामी का फिलिस्तीन को लेकर क्या नज़रिया है तो इसके जवाब में उन्होंने बताया कि कुमार स्वामी का फिलिस्तीन को लेकर इनकी भी कोई अलग से पॉलिसी नही है बल्कि जो पॉलिसी भारत की है उसी का पालन कुमार स्वामी करते हैं, और करेंगे।

तो भाजपा के साथ भी चले जाते

आसिफ बताते हैं कि इस बार किसी भी सूरत में कुमार स्वामी कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, उन्हें इस बार विपक्ष में बैठना गवारा नही था, इसीलिये उन्होंने बार बार दोहराया कि वे किंगमेकर नहीं बल्कि किंग हैं। आसिफ बताते हैं कि कुमार स्वामी को अगर भाजपा ने मुख्यमंत्री पद के लिये पहले ऑफर कर दिया होता, तो वे भाजपा के साथ मिलकर भी सीएम बनने से गुरेज नहीं करते।

लेकिन मतदान के दिन कांग्रेस ने जैसी स्फूर्ती दिखाई और भाजपा को बहुमत न मिलता देख उन्होंने जेडीएस को समर्थन का एलान किया तो कुमार स्वामी जो इस उम्मीद को पाले बैठे थे कि उन्हें मुख्यमंत्री बनना है, इसमें अगर भाजपा उनको समर्थन का एलान करती तो वे भाजपा के साथ भी जा सकते थे।

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