–  कोई पास मेरे जब आए तो खुद को दुनिया में सबसे ज्यादा महफूज समझे। ऐसा हो मेरा जिहाद।
– कोई नंगे पांव चलता मिले, तो मेरे जूते उसे पहना दूं। ऐसा हो मेरा जिहाद।
– बारिश के मौसम में जब बरसें काले बादल, तो किसी को मेरा छाता दे दूं। ऐसा हो मेरा जिहाद।
– सर्दी के मौसम में जब ठंडी हवा सताए, तो मेरा कंबल किसी गरीब के तन को गर्माहट दे जाए। ऐसा हो मेरा जिहाद।
– जब आए ईद, दिवाली या क्रिसमस का त्योहार, तो मेरे तोहफों में से कुछ किसी और के नाम कर दूं। ऐसा हो मेरा जिहाद।
– जब गर्मी का मौसम आए और तेज प्यास सताए, तो मिट्टी की खुशबू से महकता एक मटका पानी रख, किसी सूखे गले की प्यास बुझाऊं। ऐसा हो मेरा जिहाद।
– किसी और के आंसू लेकर अपने हिस्से की खुशियां उसे दे जाऊं। ऐसा हो मेरा जिहाद।
– जब मेरी थाली की रोटी हंसते-हंसते किसी भूखे को दे जाऊं। ऐसा हो मेरा जिहाद।
– किसी के घावों पर मरहम लगाकर उसे सहलाऊं। ऐसा हो मेरा जिहाद।
– जब गम का दरिया गहरा हो, तो किसी के कंधे पर हाथ रख उसे हिम्मत दे पाऊं। ऐसा हो मेरा जिहाद।
– जब अंधियारे का पहरा हो, तो एक दीप उम्मीदों का जलाऊं। ऐसा हो मेरा जिहाद।
– मैं जानता हूं कि इसमें अनगिनत मुश्किलें हैं, पर मेरे साथ मेरा रब खड़ा है, जो हर मुश्किल से बहुत बड़ा है।

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