Friday, December 3, 2021

‘इंडिया मांगे इंसाफ’ – सच बोलना पाप है और अत्याचार माफ़ है!

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आसिम बेग “मिर्ज़ा” (युवा लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार)

दोस्तों, आपसे एक सवाल है कि अगर कोई कमज़ोरों और निर्दोषों पर हो रहे ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाए तो क्या ये जुर्म है, लेकिन बदक़िस्मती से समाज में कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्हें ये अच्छा नहीं लगता लेकिन हैरानी तब और बढ़ जाती है जब सच्चाई को सामने लाने वाले ही अपने छुपे स्वार्थ के लिए घटिया राजनीति के हाथों की कठपुतली बनकर ज़ुल्म के ख़िलाफ़ लड़ने वालों के ही पैरों में बेड़िया डालने की कोशिश करते हैं उनके ख़िलाफ़ षड्यंत्र रचते हैं और उन्हें बदनाम करने की कोशिश करते हैं और इसका ताज़ा उदाहरण है झारखण्ड में कमज़ोरों और निर्दोषों पर हो रहे बेइंतेहा ज़ुल्म के ख़िलाफ़ खड़े होने वाले #Mustaqim_Siddiqui और उनके संगठन #इंसाफ़_इंडिया को उनके द्वारा किए जा रहे इस समाज सेवा के काम का ईनाम इस रूप में मिला कि सभी दंग रह गए।

हुआ ये कि #हिंदुस्तान जैसे देश के बड़े और प्रतिष्ठित अख़बार ने दिनांक 21-07-2017 दिन शुक्रवार को अख़बार के रांची संस्करण में प्रदेश में हो रही अराजकता के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे इस सामाजिक संगठन #इंसाफ़_इंडिया की तुलना प्रदेश में भूतपूर्व रहे विवादित संगठन #सिमी से कर दी और यही नहीं इशारों ही इशारों में इसे एक आपराधिक संगठन भी बता दिया और कहा कि ये देशविरोधी गतिविधियों में लिप्त है।

अब ऐसे में जब चारों तरफ़ राजनीति समर्थित आरजकता फैली हो कहीं दूर दूर तक न्याय का नामों निशान न हो घटिया राजनीति निर्दोषों की लाशों पर नाच रही हो, गौरक्षा के नाम पर बेक़सूर इंसानों को काटा जा रहा हो और इस सब के बावजूद इसे रोकने के लिए कहीं कोई शासनिक प्रशासनिक व्यवस्था नज़र न आ रही हो अंत में एक मीडिया ही बचती है जिसे लोकतंत्र में चौथा स्तंभ कहा जाता है कि वो सच्चाई को लोगों के सामने लाएगी और लोगों पर हो रहे अत्याचार का जवाब सरकार से मांगेगी और उन्हें मजबूर करेगी कि वो समाज के प्रति अपना रवैया सुधारें लेकिन आज देश में तो कुछ और ही देखने को मिल रहा है इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के टीवी चैनल हों या प्रिंट मीडिया के अख़बार, सभी बड़ी ही बेशर्मी के साथ लोगों की आंख में धूल झोंकते हुए सच्चाई को छुपाते हुए नज़र आते हैं और जब कहीं इस सबके बावजूद कोई #Mustqim_Siddiqui जैसा हिम्मती आदमी #इंसाफ़_इंडिया के रूप में खड़ा होता है तो उसका हौसला बढ़ाने के बजाए अपने निजी स्वार्थ के लिए अपनी चाटुकारिता का परिचय देते हुए उसे मिटाने में लग जाते हैं।

मीडिया के द्वारा किए जा रहे है इन लोकतंत्र विरोधी कृत्यों की ख़ासकर #हिंदुस्तान अख़बार के रांची संस्करण की जितनी भी निंदा की जाए कम है और भविष्य में होने वाले किसी षड्यंत्र से बचने के लिए #इंसाफ़_इंडिया संगठन को उस पर क़ानूनी कार्यवाही करनी चाहिए । मेरी ये अपील है उन लोगों से जिन्हें निर्दोषों तथा कमज़ोरों के प्रति सहानुभूति है वो #इंसाफ़_इंडिया से साथ ज़रूर खड़े हों क्योंकि #इंसाफ़_इंडिया एक सच्चा जनसेवक संगठन है जो सिर्फ़ मज़लूमों के ख़ातिर लोकतंत्र विरोधी सामंती सोच ,फ़ासिस्ट तथा निरंकुश सत्ता के ख़िलाफ़ लड़ रहा है और लड़ता रहेगा।

                                                लोकतंत्र ज़िन्दाबाद !

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