अगर खुदा मुझे बता दे कि इस कायनात में जन्नत कहां है तो भी मैं उसका पता नहीं पूछूंगा, क्योंकि मेरे पास मां है और मेरी जन्नत उसके कदमों तले है। अगर खुदा कह दे कि उसकी जन्नत में कोई दो मुल्क बनाने हैं तो मैं हिंदुस्तान और अफगानिस्तान बनाना चाहूंगा।
हिंदुस्तान मेरा मादरे-वतन है, यहां मैं पैदा हुआ, यहां की मिट्टी में मैंने लिखना सीखा। अफगानिस्तान वह मुल्क है जिसने सबसे पहले मेरी लिखावट को छापा और दुनिया को दिखाया।
जब कभी मैं इंटरनेट के जरिए भारत और अफगानिस्तान की तस्वीरें देखता हूं तो दोनों ओर के चेहरों पर मुझे एक बात कहने का मन करता है। शायद यह एक प्राचीन पश्तो कहावत है जो मैंने कुछ साल पहले पढ़ी थी। कहावत कुछ इस तरह है- तुम गरीब तो पैदा हुए थे, मगर तुम्हें नाउम्मीद किसने बना दिया?
पश्तो की यह कहावत मेरे देशवासियों पर ज्यादा सटीक बैठती है। आज हमें 3 बातों पर बहुत गंभीरता से सोचने की जरूरत है- हम क्या हैं, हमें कहां होना चाहिए और हम कहां हो सकते हैं?
भारत वह देश है जिसके लोगों में मेहनत करने की ताकत है लेकिन एक चीज हमें खाए जा रही है। आखिर वह कौन है? मुल्क किससे तबाह होते हैं? लोग किससे कमजोर होते हैं? इन सबका जवाब है- नाउम्मीद होना। गरीब होना कोई गुनाह नहीं है, लेकिन नाउम्मीद हो जाना बहुत बड़ा गुनाह है।
मैं खासतौर से सोशल मीडिया की बात कह रहा हूं। अक्सर मैं उन मित्रों की पोस्ट पढ़ता हूं जो मेरे साथ फेसबुक पर जुड़े हुए हैं। उनमें से ऐसे लोगों की संख्या हजारों में है जो सिर्फ और सिर्फ नकारात्मकता और नाउम्मीदी की बातों को बढ़ावा दे रहे हैं।
किसी के दिन की शुरुआत मनमोहन सिंह को गाली देने से होती है, तो कोई नरेंद्र मोदी का मखौल बनाना सबसे बड़ा फर्ज समझता है। कोई आज तक जवाहर लाल नेहरू को कोस रहा है, तो किसी ने प्रतिज्ञा कर ली है कि जब तक महात्मा गांधी को गद्दार घोषित नहीं कर दूंगा, चैन से नहीं बैठूंगा।
कोई आज दुनिया को बता रहा है कि हजारों साल पहले ब्राह्मणों ने कितनी नाइन्साफी की, लिहाजा उनकी औलादों से बदला लिया जाए, तो कोई इस बात पर विलाप कर रहा है कि सत्तर पीढ़ी पहले मेरे पुरखे को फलां बादशाह ने डांट दिया, तो आज कैसे लोगों को सबक सिखाया जाए। कोई मुझे बता रहा है कि राम का अपमान किस विधि से किया जाए, तो कोई मुझे समझा रहा है कि हजरत मुहम्मद (सल्ल.) का मजाक कैसे बनाया जाए।
मुझे शर्म आती है, हताशा होती है, निराशा होती है, लेकिन तभी पश्तो की यह कहावत याद आ जाती है कि तुम गरीब तो पैदा हुए थे, मगर तुम्हें नाउम्मीद किसने बना दिया। शायद खुदा नहीं चाहता कि मैं नाउम्मीद हो जाऊं।
मैं आपसे सवाल करना चाहता हूं – मेरी जान, हजरत मुहम्मद (सल्ल.) से तुम्हारी क्या दुश्मनी है? उन्होंने तुमसे क्या छीन लिया? मैं पूछना चाहता हूं – क्यों हुजूर, श्रीराम से आपको क्या शिकायत है? उन्होंने आपसे क्या ले लिया? क्यों हम अपनी ऊर्जा सिर्फ बिगाड़ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं? हम दावे इतने बड़े-बड़े करते हैं, जरा पीछे मुड़कर देख लीजिए। पीढ़ियां खप गईं इस मिट्टी में, वो साथ क्या लेकर चले गए! सिर्फ नेकी के निशान नहीं मिटते बाकी हम पूरी जिंदगी किसी को गालियां देते रहें, इस दुनिया का कुछ नहीं बिगाड़ सकते।
भाइयो-बहनो, मेरी बात बहुत ध्यान से सुनो। मुल्क जंग से खत्म नहीं होते। जुल्म-ज्यादती से तबाह नहीं होते। भूख से बर्बाद नहीं होते। बम से नामो-निशान नहीं मिटते। अगर ऐसा होता तो जापान आज दुनिया के नक्शे पर दिखाई नहीं देता। तबाही, बर्बादी, विनाश होता है उम्मीद छोड़ देने से और उम्मीद दिखती है अच्छाइयों को थामने से।
दुनिया के बड़े-बड़े मुल्क दूसरे महायुद्ध की राख और खंडहरों के ढेर से निकलकर मजबूती से खड़े हो गए, जबकि हम आज तक लड़खड़ा रहे हैं। जब कभी खड़ा होने की कोशिश करते है तो हमारा ही कोई भाई टांग खींचने में लग जाता है।
हमने पूरी ताकत एक दूसरे को गलत साबित करने, एक दूसरे को नीचा दिखाने में लगा रखी है। अगर हम अक्ल से, होश से काम लें तो क्या नहीं कर सकते! मेरा यकीन कीजिए, हममें बहुत ताकत है। हम बहुत कुछ कर सकते हैं। निराशा को छोड़िए। अंधेरों से डरना छोड़िए। अंधेरे को फैलाना छोड़िए।
इसकी शुरुआत मैं खुद से करता हूं। आज के बाद आप मेरे फेसबुक पेज और ब्लाॅग पर ज्यादातर वे ही बातें पाएंगे जिनसे आपको उम्मीद मिले, हौसला मिले, ताकत मिले। मैं नाउम्मीदी की बातें नहीं करता और न करूंगा। अच्छाई के लिए हौसला देना मैं किसी इबादत से कम नहीं समझता।
चलते-चलते आपके लिए एक कहानी, जो किसी मित्र ने मुझे भेजी थी
एक शहर में आग लग गई। आग किसी गिरोह ने लगाई थी। आग की लपटें देख कुछ लोग भाग गए, कुछ तमाशा देखने लगे और जो बच गए वे आग बुझाने लगे।
एक चिड़िया ने यह देखा तो वह फौरन अपनी चोंच में पानी भर लाई और आग बुझाने लगी। आग लगाने वाले चिड़िया पर हंसने लगे। उन्होंने पूछा- तुम्हारी चोंच में एक बूंद से ज्यादा पानी नहीं आता। फिर तुम आग कैसे बुझाओगी?
चिड़िया ने कहा- काम का नतीजा क्या होगा, यह मेरे हाथ में नहीं है, लेकिन मैं इतना जानती हूं कि मेरा नाम आग लगाने वालों में नहीं आग बुझाने वालों में लिखा जाएगा।

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