Pakistani singer Adnan said the Indian tricolor tweeted a photo of Jai Hind
वसीम अकरम त्यागी

अदनान सामी हों या गुलाम अली, उदित नारायण, लता, आशा, फैज़, साहिर, शकील सैंकड़ों नाम ऐसे हैं जिन्हें राष्ट्रीयता की डोरी में नहीं बांधा जा सकता। भले ही अदनान की भारतीय नागरिकता पर चटखारे लिये जा रहे हों मगर ये लोग किसी नागरिकता के किसी टुकड़े के मोहताज नहीं होते। संगीत, कला, साहित्य, सरहदों को नहीं मानता या यूं कहें कि इनके लिये कोई सरहद बनी ही नहीं जो इन्हें बांध सके।

पिछले दिनों बॉलीवुड अदाकारा स्वरा भास्कर पाकिस्तान गईं थीं, उन्होंने पाकिस्तान के ही एक टीवी शौ में बताया था कि किस तरह ‘दुश्मन देश’ में उनकी मेहमान नवाजी हुई, जिस होटल पर खाना खाया उसने यह कहकर पैसा लेने से इन्कार कर दिया था कि तुम हमारे मेहमान हो हम तुमसे पैसे क्यों लें। स्वरा ने बताया था कि जब उन्होंने कहा कि उन्हें पाकिस्तान जाना है और किसी काम से नहीं सिर्फ पिकनिक करने जाना है तब घर वालों ने खौफजदा होकर तरह – तरह के सवाल किये थे।

सवाल उठाने लाजिमी भी हैं, क्योंकि देश की मीडिया और रात दिन इधर की फिज़ा में उधर के लिये बहती नफरत, और उधर की फिज़ा में इधर के लिये बहती नफरतों ने माहौल कुछ ऐसा बना दिया है कि हर आदमी पाकिस्तान के नाम पर चौंक जाता है, वैसे ही उधर के लोग भी चौंकते होंगे। अब अदनान सामी के लिये सोशल मीडिया पर तरह – तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं, ये टिप्पणियां आखिर क्या दर्शा रही हैं ?

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दरअस्ल लोगों की सोच का दायरा बहुत तंग होता जा रहा है, पाकिस्तान के नाम पर लोगों को सिर्फ जंग याद रहती है, लोग यह भूल जाते हैं कि जब उन्हें मखमली आवाज़ की जरूरत होती है तब वे किसी हनी सिंह, अविजीत को नहीं सुनते बल्कि गुलाम अली को सुनते हैं बगैर उनकी राष्ट्रीयता जाने, लोग भूल जाते हैं कि जब उन्हें अंधेरों में उजालों की जरूरत होती है तब वे जगजीत सिंह को नहीं सुनते, बल्कि मेहंदी हसन की आवाज ‘चराग ए तूर जलाओ बड़ा अंधेरा है’ सुनते हैं और सुनकर महसूस भी करते हैं कि दिल के किसी अंधेरे कौने में यकीनन कोई चराग जल उठा है।

बॉलीवुड अगर चाहता तो रंजिशों की इन सरहदों को मिटा सकता था, आपसी खाई को पाट सकता था, मगर बाजार ने उसे भी कैप्चर कर लिया, फिर ऐसी फिल्में बनाईं गईं जिनमें दुश्मन से दुश्मनी का ही जिक्र हुआ, अगर बहुत पहले ‘बजरंगी’ को ‘भाई जान’ बनाने की पहल की गई होती तो अब तक जेहनों पर जमा नफरतों की गर्द, दिमाग में बैठे हुऐ तनाव को मिटाने में काफी हद तक कामयाबी मिल सकती थी। शुक्रिया अदनान हमें फख्र है कि हम यह कह सकते हैं कि जिस आवाज को पाकिस्तान ने जन्म दिया था अब उसे हिन्दोस्तान ने गोद ले लिया है।

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