नेक बनने और अपनी ख़ामियाँ पहचानने का तरीक़ा -इमाम मोहम्मद ग़ज़ाली अ़लैहिर्रहमा

हुज़ूर सल्लल्लाहु तअ़ाला अ़लैहि वसल्लम का फ़रमान हैः जब अल्लाह तअ़ाला किसी बंदे के साथ भलाई का इरादा फ़रमाता है तो उसे उस के एैब दिखा देता है। (शोअ़बुल ईमान बैहक़ी, हदीस १०५३५)

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

अपने एैब पहचानने के तरीक़ों में से सबसे बेहतरीन तरीक़ा यह है कि इंसान अपने मुर्शिद के सामने बैठे और उस के हुक्म के मुताबिक़ अ़मल करे, कभी उसी वक़्त उस पर अपने एैब ज़ाहिर हो जाते हैं और कभी उस का मुर्शिद उसे उस के एैबों से आगाह कर देता है। यह तरीक़ा सबसे बेहतरीन है, मगर आज कल यह बहुत मुश्किल है। दूसरा तरीक़ा यह है कि कोई नेक दोस्त तलाश करे, जो इस मुअ़ामले के राज़ों से वाक़िफ़ हो, उस की सोहबत इख़्तियार करे और उसे अपने नफ़्स का निगरान बनाए ताकि वह उस के हालात को मुलाहज़ा कर के उस के एैबों से आगाह करे। हमारे बुजु़ग्राने दीन इसी तरह किया करते थे।

अमीरूल मोमिनीन हज़रत सय्यिदुना उमर फ़ारूक़ अ़ाज़म रज़ियल्लाहु तअ़ाला अ़न्हु इरशाद फ़रमाते थेः अल्लाह तअ़ाला उस शख़्स पर रहम फ़रमाए जो मुझे मेरे एैब बताए। जब हज़रत सय्यिदुना सलमान रज़ियल्लाहु तअ़ाला अ़न्हु आप रज़ियल्लाहु तअ़ाला अ़न्हु की खि़दमत में हाज़िर हुए तो आप रज़ियल्लाहु तअ़ाला अ़न्हु ने उनसे अपने एैबों के बारे में पूछाः क्या आप तक मेरी कोई ऐसी बात पहुँची है जो आपको ना-पसंद हो? उन्होंने बताने से माफ़ी चाही, लेकिन आप रज़ियल्लाहु तअ़ाला अ़न्हु ने इस्रार किया तो हज़रत सय्यिदुना सलमान रज़ियल्लाहु तअ़ाला अ़न्हु ने अ़र्ज़ कियाः मैं ने सुना है कि आप अपने दस्तर-ख़्वान पर दो सालन जमा करते हैं और आप के पास दो जोड़े हैं, एक दिन का और एक रात का। आप रज़ियल्लाहु तअ़ाला अ़न्हु ने फिर पूछाः इस के अ़लावा भी कोई बात पहुँची है? तो उन्होंने अ़र्ज़ कियाः नहीं। अमीरूल मोमिनीन हज़रत सय्यिदुना उमर फ़ारूक़ रज़ियल्लाहु तअ़ाला अ़न्हु ने इरशाद फ़रमायाः अगर सिर्फ़ यही दो हैं तो मैं इन्हें काफ़ी हो जाऊँगा यानी इस्लाह कर लूँगा।

हज़रत सय्यिदुना हुज़ैफ़ा रज़ियल्लाहु तअ़ाला अ़न्हु जो मुनाफ़िक़ों की पहचान के मुअ़ामले में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तअ़ाला अ़लैहि वसल्लम के राज़दार थे, अमीरूल मोमिनीन हज़रत सय्यिदुना उमर फ़ारूक़ रज़ियल्लाहु तअ़ाला अ़न्हु उनसे पूछा करते थेः क्या आपको मुझ में मुनाफ़क़त की निशानियाँ नज़र आती हैं? तो अमीरूल मोमिनीन हज़रत सय्यिदुना उमर फ़ारूक़ रज़ियल्लाहु तअ़ाला अ़न्हु इस क़द्र बलंद मर्तबा और अ़ज़ीम मंसब पर फ़ाइज़ होने के बा-वजूद इस तरह अपने नफ़्स को इस क़द्र तोहमत लगाते थे।

अगर तुझे कोई दोस्त ना मिले तो अपने हासिदों की बातों पर ग़ौर कर, तू ऐसे हासिद को पाएगा जो तेरे एैबों की तलाश में रहता है और उस में इज़ाफ़ा करता है, लिहाज़ा तू उस से फ़ाइदा उठा और उस की तरफ़ से बताए जाने वाले तमाम एैबों के साथ अपने नफ़्स को मुत्तहम जान और अगर कोई शख़्स तुझे तेरे एैब बताए तो उस पर ग़ुस्सा ना कर क्योंकि एैब साँप और बिच्छू हैं जो दुनिया व आख़िरत में तुझे डसते हैं, क्योंकि जो शख़्स तुझे बताए कि तेरे कपड़ों के नीचे साँप है, तो तू उस शख़्स का एहसान मंद होता है, लेकिन अगर तू उस पर ग़ुस्सा करे तो यह आख़िरत में तेरे ईमान की कमज़ोरी पर दलील है और अगर तू उस की नसीहत से फ़ाइदा उठाए तो यह तेरे ईमान के मज़बूत होने की निशानी है और जान ले कि नाराज़ आदमी की आँख बुराइयों को ज़ाहिर करती है और ईमान का मज़बूत होना तुझे उस वक़्त फ़ाइदा देगा जब तू हासिदों की मलामत को ग़नीमत जाने और उन एैबों से बचे।

हज़रत सय्यिदुना ईसा अ़लैहिस्सलाम से पूछा गयाः आपको अदब किस ने सिखाया? आप अ़लैहिस्सलाम ने इरशाद फ़रमायाः मुझे किसी ने अदब नहीं सिखाया, मैं ने जाहिल की जिहालत (जो ख़ुद एक ऐब है) को देखा तो उस से दूरी इख़्तियार कर ली।

जान लो! जो कुछ हम ने बयान किया है, जब तुम उस में ग़ौर करोगे तो तुम्हारी बसीरत की आँख खुल जाएगी और तुम इस से फ़ाइदा हासिल करोगे, अगर तुम्हें यह चीज़ ना हासिल हो तो कम से कम इस पर ईमान लाना और इस की तसदीक़ करना ज़रूरी है। क्योंकि पहली चीज़ ईमान है और फिर उस मंज़िल तक पहुँचना है। अल्लाह तअ़ाला का फ़रमान हैः अल्लाह तुम्हारे ईमान वालों के और उन के जिनको इल्म दिया गया दर्जे बलंद फ़रमाएगा। (पारा 28, सूरह मुजादला 11)
तक़वा उन अ़ामाल के हुसूल में अस्ल माल की हैसियत रखता है। अल्लाह तअ़ाला ने इरशाद फ़रमायाः और जो अल्लाह तअ़ाला से डरे अल्लाह तअ़ााला उस के लिए नजात की राह निकाल देगा और उसे वहाँ से रोज़ी देगा, जहाँ उस का गुमान ना हो। (पारा 28, सूरह तलाक़ 2-3)

मनकू़ल है कि अ़ज़ीज़े मिस्र की बीवी ने हज़रत सय्यिदुना यूसुफ़ अ़लैहिस्सलाम से कहाः ऐ यूसुफ़ अ़लैहिस्सलाम! बे-शक लालच और ख़्वााहिश ने बादशाहों को ग़ुलाम बनाया और सब्र व तक़वे ने गु़लामों को बादशाह बना दिया तो हज़रत सय्यिदुना यूसुफ़ अ़लैस्सिलाम ने फ़रमायाः अल्लाह तअ़ाला का फ़रमान हैः बे-शक जो परहेज़गारी और सब्र करे तो अल्लाह नेकों का अज्र ज़ाया नहीं करता। (पारा 13, सूरह यूसुफ़ 90)

हज़रत सय्यिदुना जुनैद बिन मुहम्मद ख़ज़्ज़ाज़ अ़लैहिर्रहमा फ़रमाते हैंः एक मर्तबा में रात को जागा और अपने वज़ीफ़ा में मशग़ूल हो गया, लेकिन मैं ने उस में वह लज़्ज़त ना पाई जो पहले पाया करता था, चुनाँचे मैं ने सोने का इरादा किया लेकिन सो ना सका, लिहाज़ा बैठ गया लेकिन बैठ भी ना सका तो बाहर निकल गया, क्या देखता हूँ कि एक शख़्स कम्बल में लिपटा हुआ रास्ते में पड़ा है, जब वह मेरे आने पर मुत्तला हुआ तो कहने लगाः ऐ अबू क़ासिम! ज़रा मेरे पास तशरीफ़ लाइए। मैं ने कहाः ऐ मोहतरम! पहले से आपने कोई इत्तिला नहीं दी। उस शख़्स ने कहाः जी हाँ! मैं ने अल्लाह तअ़ाला की बारगाह में इल्तिजा की कि वह तेरे दिल को मेरी तरफ़ मुतवज्जो कर दे। मैं ने कहाः वह तेरी तरफ़ मुतवज्जो हो गया है, अब बताओ! तुम्हारी क्या हाजत है? उसने कहाः नफ़्स की बीमारी उस का इलाज कब करती है? मैं ने कहाः जब तू नफ़्स की ख़्वााहिश में उस की मुख़ालफ़त करे। पस वह अपने नफ़्स की तरफ़ मुतवज्जो हो कर कहने लगाः ऐ नफ़्स! अब सुन लिया! मैं ने तुझे सात बार इस बात का जवाब दिया लेकिन तू ने इनकार किया और कहाः मैं जुनैद रहमतुल्लाहि तअ़ाला अ़लैहि से ही सुनूँगा तो अब तू ने सुन लिया? आप रहमतुल्लाहि तअ़ाला अ़लैहि फ़रमाते हैंः वह शख़्स चला गया और मैं उसे ना पहचान सका।

मुफ़्ती खालिद अयूब मिसबाही

सदर, मुस्लिम स्टूडेंट्स आर्गेनाईजेशन ऑफ़ इंडिया

Loading...