Saturday, May 15, 2021

“होरी खेलूंगी कह बिस्मिल्लाह” – आखिर इस क़लाम पर क्यों होना चाहिए विवाद?

- Advertisement -

होरी खेलूंगी कह बिस्मिल्लाह

बुल्ले शाह बाबा पंजाबी सूफी शायरी के वो मील के पत्थर है जहाँ पहुँचने के लिए सैकड़ों दरियाओं और तपती ज़मीन पर नंगे पैर चलते हुए वहां पहुंचना पड़ता है, वो भी सिर्फ उनके लिखे गये कलाम को समझने के लिए,
रही बात उनके जैसा लिखने की तो ‘मोहब्बत की चाशनी में अपने इल्म की क़लम को बार-बार डुबोकर और ईमान के पैमाने से नापकर” ही कोई बुल्ले शाह की क़दमबोसी के लायक हो सकता है.

सूफी शायरी की सबसे ख़ास बात यह होती है की जिसे आप चाहतें हैं उसके लिए सुनी/पढ़ी जा सकती है लेकिन दिल में किसी की चाहत ही ना हो और सिर के ऊपर से सरसराती हुई निकल जाती है.

इस होली पर बुल्ले शाह बाबा के कलाम “होली खेलूंगी कह बिस्मिल्लाह” का भी खूब हुआ और सबसे मज़े की बात संकीर्ण, सेक्युलर और कम्युनिस्ट सभी तरह के लोगो ने इसे अपने अपने नज़रिए से दीवारों पर चिपकाया.

कितने लोगो की समझ में कलाम का असल मतलब आया ?
कितने लोगो ने हर्फ़-बा-हर्फ़ क़लाम को लोगो को समझाने की कोशिश की?

चलिए कोशिश करते हैं कुछ समझने की

अर्थ -1 – होली खेलूंगी कह बिस्मिल्लाह ***

सबसे पहली बात, होली एक ऐसा त्यौहार है जिसमे एक दुसरे की तरफ “रंग’ डाला जाता है, और होली के शब्द को अलंकारिक तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है, जैसे की ‘मुझे अपने रंग में रंग ले’, यहाँ रंग का मतलब है की मुझे भी अपने जैसा बना ले, जैसा तू है वैसा ही मुझे भी कर दे, तो तेरा रंग है वो रंग मेरे ऊपर भी डाल दे’, तो होली को अलंकारिक तौर पर समान विचारधारा में रंगने के लिए भी होता है. अब ज़रा कलाम की पहली लाइन पर ध्यान दीजिये, एक व्यक्ति जो अपने मुर्शिद से इल्तेजा कर रहा है की मुझे भी अपने ही रंग में रंग दे, मतलब की तू जिस तरह खुदा से मोहब्बत करता है मुझे भी वैसा ही बना दे, और यह अपने रंग में रंगने वाली होली मैं बिस्मिल्लाह कहकर खेलूंगी.

अर्थ -2 – होली खेलूंगी कह बिस्मिल्लाह ***

इस्लाम में जितने भी जाईज़ काम किये जाते हैं उन सबकी शुरुआत “बिस्मिल्लाह” पढ़ कर की जाति है, चाहे खाना खाना हो, नमाज़ पढनी हो, क़ुरान शरीफ की तिलावत करनी हो, निकाह के टाइम पर भी बिस्मिल्लाह पढ़ी जाती है जिसका मतलब है की जिस होली की बात बुल्ले शाह बाबा अपने कलाम में कर रहे हैं वो जाईज़ कामों में से एक काम है, आखिर हो भी क्यों ना, खुदा से मोहब्बत से बढ़कर क्या कोई और जाईज़ काम हो सकता है, इसीलिए बाबा फरमाते हैं की ये जो होली खेलने वाला जाईज़ काम शुरू करने जा रहे है लेकिन रुको पहल बिस्मिल्लाह तो पढ़ लूं.

अर्थ -3 – होली खेलूंगी कह बिस्मिल्लाह ***

आजकल ज़माना थोड़ा बदल गया है लेकिन पिछले दौर में जब बच्चा पढ़ाई शुरू करने मदरसे जाता था तो उसे बच्चे की बिस्मिल्लाह कहा जाता था, मसलन की खान साहब के बच्चे की बिस्मिल्लाह 4 साल की उम्र में हुई, तो जब इल्म हासिल करने की शुरुआत होती थी तब उस समय को बिस्मिल्लाह कहा जाता था, अब आपको अंदाजा आ गया होगा की बुल्ले शाह बाबा ने कितनी ख़ूबसूरती के साथ बिस्मिल्लाह शब्द का इस्तेमाल किया है. लेकिन इस बिस्मिल्लाह में फर्क यह है की शागिर्द अपने पीरो-मुर्शिद से कह रहा है की अब तक मेरी जो भी ज़िन्दगी गुजरी है अज्ञानता में गुज़री है मेरे सच्चे इल्म की शुरुआत कर दीजिये, मेरी ना-समझी वाली ज़िन्दगी में जो जो गलतियाँ हुई हो उन्हें अल्लाह माफ़ करे और आप मुझे सच्चे इल्म की बिस्मिल्लाह पढ़ाइये, या .. मुझे एक मासूम बच्चा समझ लीजिये और जो रंग आपका है उस रंग की बिस्मिल्लाह पढ़ाइये.

अर्थ -4 – होली खेलूंगी कह बिस्मिल्लाह ***

होली में रंग खेलने के दौरान एक ख़ास बात यह भी होती है की सब एक ही रंग में रंग जाते है, चेहरे पहचाना मुश्किल हो जाता है, मतलब की जब रंग पढ़ गया तो क्या तू और क्या मैं .. तेरी-तू .. बन गयी मेरी-मैं और मेरी-मैं बन गयी तेरी-तू, मतलब मैं तू बन गया और तू मैं अब लोगो को पहचाना ही मुश्किल है की मैं कौन हूँ और तू कौन, अमीर ख़ुसरो फरमाते हैं “जब से राधा श्याम के नैनं हुए हैं चार, श्याम बने हैं राधिका, राधा बन गयी श्याम”.
तो जब ऐसा वक़्त आ पहुंचा है की मुझे और तुम्हे एक जैसा बनना है तो क्यों ना नेक काम की शुरुआत बिस्मिल्लाह से करू …

मैंने यहाँ सिर्फ एक लाइन “होली खेलूंगी कह बिस्मिल्लाह” के पांच अलग अलग मीनिंग बताने की कोशिश की है, हालाँकि अभी ज्यादा गहराई में नही गया और जो कुछ असल मतलब मेरी दिमाग में चल रहे हैं उन्हें नही लिखा है, खैर वो अलग मैटर है.

अब जाइये उन लोगो से पूछिए जो इस कलाम की आलोचना कर रहे है की
क्या उन्होंने आपको यह मतलब बताये ?
क्या उन्हें क़लाम की सही समझ है ?
क्या वो जानते हैं की सूफिस्म होता क्या है ?
दो चार तुक बंदी वाली फ़िल्मी शायरी को सूफियों के क़लाम से तुलना करने वाले क्या रूहानियत का असल मतलब समझते हैं ?

मोनिस मालिक वारसी की फेसबुक वाल से 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles