Wednesday, June 16, 2021

 

 

 

धर्म के नाम पर गुंडागर्दी – ‘मुसलमान होने की वजह से अपने ही घर से बेघर हुई शहाना परवीन’

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Courtesy: BBC

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम बाहुल्य जिले मुरादाबाद में एक मुस्लिम परिवार मकान खरीदता है, मकान के एक कौने पर छोटा सा मंदिर है उस मंदिर से न तो मुसलमान परिवार को कोई आपत्ती है और न ही किसी मौहल्ले वाले को मगर भाजपा पार्षद बिट्टू शर्मा इस पर आपत्ती जताते हैं उनका तर्क होता है कि यह ब्राहम्णों का मौहल्ला है और इसमें मुसलमानों को नहीं रहने दिया जा सकता। यह बातें डेढ़ साल पहली है, विवाद होता है पुलिस आती है, मीडिया भी आती है। विवाद चलता रहता है औऱ फिर उस मकान को मंदिर संपत्ती बताकर उस पर मुकदमा कर दिया जाता है।

मकान बेचने वाली शशी प्रभा शर्मा कहती है कि “पहले ये मकान दूबेजी के पास था, फिर उनसे एक सरदारजी ने ख़रीदा और उन सरदार जी से हमने. तब तक तो किसी को कोई दिक्क़त नहीं हुई लेकिन जब अब एक मुसलमान ने ये मकान ख़रीद लिया है तो सब विवाद कर रहे हैं.”

तीन बार ये मकान बेचा गया तब किसी ने नहीं कहा कि मंदिर की संपत्ती है मगर जब मुसलमान ने खरीद लिया तो कह दिया गया कि मंदिर की संपत्ती है और मकान पर ताला लटका दिया गया। मगर जिस शहाना ने मकान खरीदा था वह तो सड़क पर आ गई, जिसने बरसों पाई पाई जोड़कर इस मकान को चालीस लाख रुपये में खरीदा था उसे क्या मिला ?

मकान बेचने वाली शशी प्रभा कहती हैं कि ‘विवाद के पीछे राजनीति है’ बीते 27 साल में जब इस मकान को हिन्दू, सिख समुदाय ने खरीदा था तब वह मंदिर की संपत्ती नहीं थी मगर जैसे ही मुसलमान ने मकान खरीद तो वह मंदिर की संपत्ती हो जाती है। अजीब है ना ? क्या उस भाजपाई पार्षद से पहले किसी को नहीं मालूम नहीं था कि जिस जमीन पर मकान का निर्माण किया जा रहा है वह मंदिर की संपत्ती है ? दरअस्ल यह धर्म की आड़ में दादागिरी, गुंडागर्दी है।

Courtesy: BBC
Courtesy: BBC

पहले कहा गया कि ब्राह्मणओं का मौहल्ला है मुसलमान नहीं रह सकते, यह तब कहा गया जब मकान बेचने वाली शशी प्रभा शर्मा खुद ब्राह्म्ण हैं। मकान बेचने वाली शशी प्रभा को कोई आपत्ती नहीं है मकान खरीदे वाली शहाना को भी आपत्ती नहीं है, आपत्ती भाजपा के ‘नेता जी’ को है। कोई भी मकान जो बीते 28 साल में मंदिर की संपत्ती नहीं हुआ वह रातों रात मंदिर की संपत्ती कैसे हो सकता है ?

मकान का मामला अब अदालत में है, मगर वह परिवार तो अपना सबकुछ गंवा चुका है जिसने मकान खरीदा था, न तो उसे मकान मिला और न ही वह रकम वापस मिली जो उसने मकान के एवज में चुकाई थी। आपको याद होगा कैराना में भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने पलायन का मुद्दा उठाकर तमाम देश का ध्यान कैरान पर केन्द्रित कर दिया था। भाजपा बताना चाहती थी कि मुसलमानों की दबंगई की वजह से हिन्दुओं ने कैराना से पलायन कर लिया है, इस प्रकरण में मीडिया तो भाजपा से भी आगे निकल गई थी उसने कैराना को ‘कश्मीर’ बताया था।

w3मगर वही मीडिया, वही भाजपा मुरादाबाद पर गूंगे का गुड़ खाकर बैठ जाती है। क्या इस देश में ऐसा भी कोई कानून है जिसमें हिन्दुओं के मौहल्ले में मुसलमानों को नहीं रहने दिया जा सकता ? अगर नहीं है तो फिर खुले आम इस तरह के ऐलान करने वाले लोगों पर कार्रावाई क्यों नहीं की जाती ?

क्या किसी भी संपत्ती को मंदिर की संपत्ती बताकर उस पर कब्जा किया जा सकता है ? मगर ऐसा हुआ है, और हो रहा है, सबके सामने हो रहा है, क्या हिन्दु समाज की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वे इस तरह के पाखंडी लोगों का बहिष्कार करें। जो धर्म की आड़ में अपनी सियासत चमका रहे हैं। शासन, प्रशासन इस घटना पर मौन क्यों है ?

प्रशासन के पास और शासन के पास इस प्रकरण पर सिर्फ एक पंक्ती है जिससे आसानी से पल्ला झाड़ लेते हैं कि ‘मामला अदालत मे है’ मामला ही तो अदालत में है मगर जिसने पैसा खर्च करके इस मकान को रहने के लिये खरीदा था वह तो सड़क पर है। सरकार को चाहिये कि जब तक अदालत का फैसला नहीं आता है तब तक या तो उस परिवार को उसी मकान में रहने दिया जाये या पीड़ित परिवार को उसकी रकम लौटाये अगर यह भी संभव नही है तो फिर उस परिवार को रहने के लिये उतनी ही कीमत का मकान दे।

  • वसीम अकरम त्यागी

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