‘हज़रत ख्वाजा बंदा नवाज’ दरगाह – मॉडर्न शिक्षा के क्षेत्र में मौलवियों के योगदान की बड़ी मिसाल

7:14 pm Published by:-Hindi News

मुस्तक़ीम सिद्दीकी

एम बी बी एस (MBBS) समेत पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल साइंसेज एम डी/ एम एस (MD/MS) का 32 प्रोग्राम, पैरामेडिकल, फार्मेसी, नर्सिंग, के 10 प्रोग्राम, इंजीनियरिंग छेत्र में बीटेक (B.TECH) के 8 प्रोग्राम, एम टेक (M. Tech) के 9 प्रोग्राम, पीएचडी के 5 प्रोग्राम, साइंस , आर्ट्स, कॉमर्स, ह्यूमैनिटीज, एडुकेशन, सोशल साइंस, लॉ, के स्नातक से पी एच डी तक 30से अधिक प्रोग्राम का संचालन करने वाली एक दरगाह है।

1958 में कर्नाटक के “ख्वाजा एडुकेशन सोसाइटी” के नाम से मॉडर्न एडुकेशन के लिये दरगाह कमिटी की ओर से एक बुनियाद रखी गई थी, 1966 में इस सोसाइटी का रजिस्ट्रेशन हुआ, आज 24 से अधिक कॉलेज का संचालन करने वाला ख्वाजा एडुकेशन सोसाइटी पिछले साल ख्वाजा बंदा नवाज यूनिवर्सिटी का मान्यता भी प्राप्त कर चुका है।

स्वतंत्र भारत में शिक्षा के छेत्र में इस बड़े क्रांति का सपना देखने वालों में से एक जनाब सय्यद शाह मुहम्मद अल हुसैनी साहब थे, 1958 में लड़कियों के बीच शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये इन्होंने बीबी रजा गर्ल्स हाई स्कूल और लड़कों के लिये ख्वाजा हाई स्कूल खोला। जब देश मे प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोलने का कोई प्रावधान नही था, तब इन्होंने 24 से अधिक प्रोफेशनल प्राइवेट कॉलेज खोलकर शिक्षा की अलख को जलाये रखा।

1922 में पैदा हुए जनाब सय्यद शाह मुहम्मद अल हुसैनी का वफात 2007 में हुआ, ख्वाजा बन्दा नवाज दरगाह के सर्वोसर्वा एक ऐसे दूरंदेश थे की पिछड़े, वंचित और गरीबों को शिक्षित कर मुख्यधारा में लाने का जीवन भर अथक पर्यास करते रहे। आज जो लोग मौलवियों और दरगाहों पर सवाल उठा रहे हैं उन्हें अच्छी तरह से मालुम होना चाहिए की मस्जिद में चप्पल चोर जाता है, नमाजी चप्पल चोर नही होता है।

खास बात यह है की पद्मश्री से सम्म्मनित “जनाब सय्यद शाह मुहम्मद अल हुसैनी” साहब ने अपने जीवन मे 15 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान खोला था लेकिन उनके वफात के बाद उनके साहेबजाद “डॉ. सय्यद शाह खुसरो हुसैनी” ने शिक्षण संस्थानों की संख्या 24 करने के साथ प्रोफेशनल कोर्सेज बड़े स्तर पर शुरू किया है। इससे भी बड़ी कामयाबी उन्हें इस शक्ल में मिली की पिछले साल “2018” में कर्नाटक कैबिनेट ने “ख्वाजा बन्दा नवाज यूनिवर्सिटी” का बिल पास कर दिया है।

मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, फार्मेसी कॉलेज समेत “ख्वाजा बन्दा नवाज यूनिवर्सिटी एक मौलवी की देन है, एक दरगाह की देन है, एक बड़े सोंच की देन है, एक सकारात्मक सोंच की देन है। जो लोग मौलवियों पर सवाल उठा रहे हैं यह उनके अज्ञानी होने की सबसे बड़ी पहचान है, खुद आएं, रसीद लेकर दरवाजे दरवाजे तक जाएं, मॉडर्न हैं तो कोर्ट पैंट के साथ साथ टाई भी बांध लें, ऐसे नही कर सकते तो नकारात्मक सोंच को फैलाना बंद करें।

(ये लेखक के निजी विचार है।)

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