निकालना घुसपैठियों को है और लाईन पूरा देश लगे । अरे सरकार हुज़ूर यह आपका निकम्मापन है कि कोई बिना पासपोर्ट वीज़ा के सीमा पारकर यहाँ हमारी तरह स्वर्ग वाले मज़े लेने लगे । यह आपकी ग़लती है कि घर मे कोई भी घुस आए, इस देश की जनता की गलती नही है । मगर साबित तो देश की जनता करे, की वह घुसपैठिए नही हैं, यहाँ के नागरिक हैं ।

यह एनआरसी और नागरिकता संशोधन बिल (CAB+NRC) सब तमाशे हैं । जब आपसे सीमा पार की घुसपैठ नही रुक सकती तो काहे जनता को कचेहरी के चक्कर कटवाने जा रहे हैं । मतलब यह कहावत सच्ची करिएगा की धोबी जब किसी का कुछ बिगाड़ नही सके तो अपने गदहे के कान उमेठे । कल को सरकार बहादुर के निकम्मेपन से कोई देश हमपर हमला कर दे,तो आप अपने नागरिकों से कहिएगा की तुम बेलचा,बर्तन,करछुल लेकर आओ और लड़ो ।

यह हिन्दू मुसलमान का नाम लेकर मूर्खो को ही महामूर्ख बनाइये,व ही खुश होंगे कि चलो मुसलमान लाइन लगे हैं, चलो हिन्दू लाइन लगे हैं । समझदार सब जानते हैं कि उन्हें लाइन में लगवाकर सड़ांध भरे दिनों से किधर मुँह मोड़ा जा रहा है ।

जिसको ईश्वर ने मटर के दाने भर भी अक़्ल दी है, वह जानता है कागज़ों की कार्यवाही में न हिन्दू फसता है और न मुसलमान, फँसता है केवल ग़रीब, जिसका धर्म,जाति, वर्ग सब कुछ सिर्फ ग़रीबी है । जो एक वक्त खाने का मोहताज है, चले कागज़ बनवाए की वह यहीं का नागरिक हैं, जहाँ उसे भूखा रहना पड़ता है ।

अगर अब भी कोई मूर्ख आपके हिन्दू मुसलमान के एजेंडे में फँस जाए,तो उसके भारत के नागरिक होने पर शक होगा,क्योंकि हमारे देश का नागरिक इतना मूर्ख तो नही हो सकता अब भी कि उसकी तमाम ज़रूरतों से ध्यान हटाकर हिन्दू मुसलमान में बार बार झोंक दिया जाए । मन्दिर मस्जिद निपटे तो चलो नागरिकता में तो फसोगे, यह हमें बांट देने पर आमादा हैं ।

सीमा पर सख्ती कीजिये,जो घुसपैठी हैं, उन्हें ढूंढ लीजिये,वह अरबों की सँख्या में नही हैं कि पकड़ न सकें । इन्होंने जिन चमकती हुई हमारी नौकरियों पर कब्ज़ा कर रखा है, उन्हें छीनकर अपने बच्चों को दे दीजिए, किसने रोका है । यह एक के बाद एक कार्ड आखिर कब तक हम लोग भीड़ बनकर बनवाते फिरेंगे । कब तक कहाँ तक लिस्ट में अपना नाम दर्ज करवाएं और लकी ड्रा की तरह अपना ही नाम देख खुश होए और अगर नाम न हो तो अपनी ही ज़मीन और आसमान एक झटके में गवां दें ।

एक आधार कार्ड आप बनवाए थे, दिया था यूनिक आइडेंटिटी नम्बर,उसका क्या हुआ । क्या यह फेल मान लिया गया है । क्या यह भी बकवास साबित हुआ है । क्या इसमे भी कालाबाज़ारी हुई है । अगर नही, तो जिनके पास आधार है, उनको रोककर बिना आधार वालों को मौका दें बनवाने का, सबको भाई काहे लाइन लगवाने जा रहे हो ।

मूढ़ से मूढ़ व्यक्ति जानता है कि आपके पास करने को कुछ नही है सिवाए हिन्दू मुसलमान के,तभी शोशा छेड़ा है कि बाहर से आने मुसलमान छोड़कर हिन्दू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई सबको नागरिकता संशोधन बिल में नागरिकता देंगे । मुसलमान शब्द जानबूझकर हटाया गया है ताकि साम्प्रदायिकता की आग को हवा दिया जाए । आपको मज़ा आता है हिन्दू मुसलमान खेलने में क्योंकि आपको ज़रा भी शर्म नही आती लोगों की मौत पर, उनकी तक़लीफ़ पर, उनकी परेशानी पर, क्योंकि हम लोग नोटबन्दी की बेशर्मी देख चुके हैं ।

ठंडक में लोग लाइन लगे, बूढ़े, बच्चे औरते सब परेशान हुए,हासिल क्या हुआ,अर्थव्यवस्था की बर्बादी और क्या । अब फिर सनक सवार हुई है, चलो अब एनआरसी से नास मारते हैं ।

काम करने वाले लोग काम करते हैं, योजनाए लाते हैं, नागरिकों के भले का काम करते हैं । निकम्मे और कामचोर हमेशा चिल्लाते हैं कि फला की वजह से विकास रूका हुआ है । घर मे हांडी जली जा रही और इल्ज़ाम पड़ोसियों पर,खुद का ध्यान सिवाए खुराफात के और कहीं नहीं ।

हम नागरिकता संशोधन बिल CAB होए या एनआरसी, इसका विरोध करते हैं क्योंकि संविधान की मर्यादा तो इससे भंग होगी ही, उससे बड़ी बात की तमाम ग़रीब, बेघर,बेचारे,परेशान लोग अपनी ज़िंदगी मे आई इस नई मुसीबत से तड़पेंगे । हमारे टैक्स के करोणों रुपये हमारे ऊपर इस फूहड़पन से फूंके जाएँगे, यह कल्पना तो मूर्खो ने ही कि होगी । आप नौकरी दीजिये, महंगाई कम कीजिये, किसानों औरतों की फिक्र कीजिये,यह अंग्रेज़ों से सीखी बांटो और राज करो कि नीति को छोड़ दीजिए,वरना आज नही तो कल, जब भी जनता को समझ आएगा, तब आपको भागने के लिए पृथ्वी भी छोटी लगने लगेगी ।

और मेरे वह बेहद खूबसूरत दोस्तों, क़रीबी लोगों, जिन्होंने इन जिन्ना और सावरकर जैसे बाँटने वाले लोगों को वोट किया था,हमसे आंख में आंख डालकर बात करने की बेशर्मी ज़रूर रखना । दोस्तों आजतक आप सबके किसी फैसले पर सवाल नही किया, कभी शक भी नही किया,किसे वोट किया,इसपर सवाल भी नही किये मगर जब यह मुसलमान छोड़ हर एक को नागरिकता दे देने का बिल आपके दिए वोट से पास हो जाएगा,तब ज़रा सी शर्म रखियेगा हमसे बात करने के लिए, कहेंगे कुछ भी नही मगर अफसोस बहुत होगा कि मेरी गर्दन पर हुवे वार का खंजर आपकी पसंद का था । आपने अगर सम्पदायिकता ओढ़कर वोट किया था कोई शिकवा नही अगर इन्होंने आपका भी भरोसा तोड़ा है, तो विरोध कीजिये,आपका विरोध हमे अब सुनाई देना चाहिए ।

ग़रीब तो झेलेंगे ही,उनकी ज़िंदगी का एक दिन भी तो इन्होंने नही सुधारा, सिवाए बर्बादी के,चलिए,उठिए,लाइन लगिये और साबित कीजिये कि आप उस देश के नागरिक है, जहाँ आपके पुरखे मर खप गए हैं । मच्छर मारने के लिए पूरे घर मे आग लगा देने वाले अक्लमंद आप लोगों ने खुद सिर पर बैठाएं हैं । हमारा तो विरोध है, हमारे लिए यह एक और लड़ाई है, जो अंग्रेज़ समेत जिन्ना और सावरकर के ख़िलाफ़ लड़ी थी,अब फिर लड़नी है । संविधान की मर्यादा के लिए उसके चरित्र को खंडित करने वालों के ख़िलाफ़, एक और प्रतिरोध,साथ आइये या हमपर खंजर चलाइये,आपकी मर्ज़ी ।

एक बात सभी राजनैतिक पार्टी के लिए है, अगर CAB यानी नागरिकता संशोधन बिल सदन में आया और विपक्ष में से किसी भी पार्टी ने समर्थन या वाकआउट किया,तो वह भी इस डलहौजी नीति का हिस्सा होगी, हमारा न ही उस पार्टी या उसके किसी नेता को जीवन मे कभी समर्थन होगा, क्योंकि जो संविधान की मूल आत्मा के विरुद्ध चला गया,वह हमारा हो ही नही सकता, संविधान और देश से प्रेम करने वाले सभी को विरोध करना होगा, अपनी आखरी सांस तक…

हफीज किदवई की कलम से…..

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