gandhi759

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30 जनवरी 1948 के दिन इस उप महाद्वीप ने एक अजीब मंज़र देखा था। गांधी नामी एक हिन्दू की मौत पर पूरे पाकिस्तान में शोक की लहर दौड़ गयी थी, जबकि हिन्दु राष्ट्र के वाहक आरएसएस की शाखाओं ने मिठाईयां बांटी जा रही थी। उस 80 साल के बूढे बुज़ुर्ग के मरने पर आरएसएस को कौन सी खुशी हो रही थी ,यह बात वे ही समझ सकते हैं।

जिन वल्लभ भाई पटेल की सबसे बड़ी मूर्ति बनवा कर बीजेपी गर्व कर रही है, उन्ही पटेल ने देश के गृहमंत्री के तौर पर महात्मा गांधी की हत्या और अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा में शामिल होने के आरोप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगा दिया। पटेल ने अगस्त 1948 में संघ के प्रमुख माधवराव सदाशिव गोलवरकर को पत्र लिखकर कहा था , वह इतिहास के पन्नो पर अंकित है ,

“संघ के सभी नेताओं के भाषण सांप्रदायिक जहर से भरे हुए थे। हिन्दुओ का संगठन करना और उनकी रक्षा करना अलग बात है , मगर इसकी आड़ में निर्दोष मुस्लिम औरतों , बच्चो और बूढ़ों की हत्या करना क़तई उचित नही है। इनसे ऐसा माहौल बना कि इतना बड़ा हादसा हो गया और देश ने गांधी के रूप में अपना सबसे मूल्यवान रत्न खो दिया।”

लेखक: मुहम्मद आरिफ दागिया

गांधी जी की मृत्यु पर आरएसएस के लोगों ने खुशी जाहिर की और मिठाइयां बांटी। आज के दिन अगर आपको कोई व्यक्ति खुशी का इज़हार करता दिखे तो समझ लीजियेगा कि “गोडसे ज़िंदा है।”

(ये लेखक के निजी विचार है, आवश्यक नहीं कि कोहराम न्यूज़ उपरोक्त विचारों से सहमत हो)

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