पिछले कुछ समय में जिस प्रकार की घटनाएं हमारे देश में हुई है वे हमारी पूर्वग्रह सोच का ही निष्कर्ष हैं। चाहे दादरी में हुआ अखलाख हत्याकांड हो अथवा हाल ही में अलवर राजस्थान में हुई घटना हों। लोग बिना जांच पड़ताल के ही नतीजे पर पहुंच जाते हैं और किसी व्यक्ति विशेष अथवा समुदाय विशेष को उस घटना का जिम्मेदार ठहरा देते हैं। और इतना ही नहीं वे कानून को उसका कार्य करने देने की बजाय स्वयं ही कानून हाथ में लेकर सजा भी दे देते हैं।

सबसे पहले हमें समझना होगा कि पूर्वग्रह prejudice क्या हैं? दरअसल पूर्वग्रह (prejudice) – एक खतरनाक मानसिक रोग हैं। पूर्वग्रह (prejudice) का अर्थ ‘पूर्व निर्णय’ है, अर्थात् किसी मामले के तथ्यों की जाँच किये बिना ही राय बना लेना या मन में निर्णय ले लेना। इस शब्द का उस स्थिति में प्रयोग किया जाता है जब किसी व्यक्ति या लोगों के किसी समूह के विरुद्ध निर्णय दिया गया हो और वह व्यक्ति या लोग किसी विशेष लिंग, राजनैतिक विचार, वर्ग, उम्र, धर्म, जाति, भाषा, राष्ट्रीयता के हों। पूर्वग्रह (prejudice) रोग से ग्रसित व्यक्ति ऐसा व्यवहार या तो जान बूझकर करता हैं या फिर तथ्यों को जाने बगैर या सत्य का ज्ञान नहीं होने के कारण करता हैं। पूर्वग्रह (prejudice) के कारण निश्चित तौर पर समाज और पारस्परिक संबंधों को अत्यधिक हानी होती हैं। पूर्वग्रह (prejudice) से ग्रसित व्यक्ति की सोचने समझने और तर्क वितर्क करने की क्षमता पर ताला लग जाता हैं। वह व्यक्ति सिर्फ वही बात स्वीकार करेगा जो उसके दिमाग में पहले से विद्यमान हैं। अब जानते हैं कि दादरी और अलवर हत्याकांड का पूर्वग्रह सोच से क्या संबंध हैं?

उत्तर प्रदेश के दादरी शहर में हुई घटना से हम सभी भली भांति परिचित हैं। किस प्रकार मात्र एक अफवाह के आधार पर उग्र भीड़ द्वारा अखलाख की निर्मम हत्या कर दी गईं थी। अफवाह फैलायी गईं थी कि अखलाख के परिवार ने घर में गाय का मांस रखा हुआ है और अचानक एक भीड़ के रूप में हमलावर उसके परिवार पर धावा बोल देते हैं और बुरी तरह से पीट पीट कर अखलाख की हत्या कर दी जाती हैं। हालाँकि बाद में रिपोर्ट में साबित हो गया कि जो मांस अखलाख के घर से मिला था वो गाय का नहीं था। परन्तु मेरा सवाल ये हैं कि आखिरकार लोगों ने ये क्यों विश्वास कर लिया कि वो मांस गाय का ही होगा? और क्यों एक अफवाह के आधार पर अखलाख की हत्या कर दी गई? ऐसी ही एक घटना हाल ही में 4 अप्रैल को राजस्थान के अलवर शहर मे हुई जिससे पूरा देश परिचित हैँ। किस प्रकार एक उग्र भीड़ ने 5 मुस्लिम व्यक्तियों पर हमला कर दिया जो कुछ दुधारू गायों को खरीदकर उनके शहर मेवात ले जा रहे थे और उनकी निर्ममता से पिटाई कर दी जिसमे एक व्यक्ति की मृत्यु हों गई।

चाहे दादरी मे हुआ अखलाख हत्याकांड हों अथवा अलवर मे हुआ पहलू खान हत्याकांड हों दोनों ही घटनाओं में एक बात तो समान हैं और वह हैं पूर्वग्रह। कुछ लोगों को लगता हैं कि अगर मुसलमान गाय के साथ दिखता हैं तो इसका तात्पर्य हुआ कि वह जरूर गाय को काटने के लिए ले जा रहा हैं। परंतु सच्चाई तो यह कि मुसलमान भी खेती करते हैं गाय भैंस पालते हैं। और पहलू खान भी उनमेसे एक था परंतु पूर्वग्रह से ग्रसित लोगों ने यह जानने की कोशिश तक नहीं की और उसकी हत्या कर दी।

इस पूरे मुद्दे को समझने के लिए मैं आपके साथ एक कहानी साझा करना चाहता हूँ. जिससे आपको पूरी बात समझ आ जाएगी। यह कहानी वास्तव में हमारी पूर्वग्रह सोच को चित्रित करती हैं। कहानी कुछ इस प्रकार है; “एक दिन एक बाज के चूज़े उनकी माँ से कहने लगे कि वे इन्सान का मांस खाना चाहते हैं। अपने चूज़ों की इस इच्छा को पूरा करने के लिए बाज ने उड़ान भरी और पूरे दिन तलाश करती रही परन्तु उसे कहीं भी किसी इंसान की लाश नजर नहीं आयी इसलिए अंत में वह एक सूअर का मांस ले आयी पर चूज़ों ने उसे खाने से मना कर दिया। अगले दिन वह बाज फिर से इंसान का मांस लेने निकल पड़ी परन्तु कहीं भी सफलता हाथ न लगी और इस बार वह एक गाय का मांस ले आयी पर चूज़ों ने उसे भी खाने से मना कर दिया। वे सिर्फ इंसान का मांस खाना चाहते थे। तब बाज ने एक तरकीब सोची और उसने सूअर के मांस को एक मस्जिद में फैंक दिया और गाय के मांस को एक मंदिर में फैंक दिया। जैसे ही इस बात की खबर आम हुई तो दंगे शुरू हो गये और देखते ही देखते सैकड़ों हिन्दू व मुसलमान आपस में लड़ कटकर मर गये और फिर उस बाज ने उनमें में से एक इंसान की लाश से मांस नोच कर अपने चूज़ों के पास गई और उनसे कहा “तुम इंसान का मांस खाना चाहते थे न? ये लो इंसान का मांस”

चाहे अखलाख हत्याकांड हो, अलवर की घटना हो या फिर बाज वाली कहानी हो। तीनों ही घटनाओं के पीछे किसी भी इंसान की कोई गलती या साजिश नहीं थी न किसी हिंदू की न किसी मुसलमान की। ये तीनों ही घटनाएँ होने की वजह सिर्फ और सिर्फ हमारी पूर्वग्रह सोच हैं. अखलाख हत्याकांड हुआ क्योंकि हिंदुओं ने सोचा कि अखलाख का परिवार मुसलमान हैं इसलिए वे जरूर गाय का मांस खाते होगे। अलवर की घटना हुई क्योंकि फिर हिंदुओं ने सोचा कि जरूर यह मुसलमान गायों को काटने के लिए ले जा रहे हैं। बाज वाली कहानी में मुसलमानों ने सोचा कि जरूर किसी हिंदू ने ही सूअर का मांस मस्जिद में फैंक होगा और हिंदुओं ने सोचा कि जरूर किसी मुसलमान ने ही गाय का मांस मंदिर में फैंक होगा।

हमें जरुरत हैं कि हम अपनी सोच को बदले और अपने पूर्वग्रह को बदले तभी ऐसी घटनाओं को होने से रोका जा सकता हैं अन्यथा यह पूर्वाग्रह देश को बर्बाद कर देगा।

मोहम्मद जुनेद टाक

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