Friday, August 6, 2021

 

 

 

खाली पेट गोमूत्र पीने से कोरोना के विषाणु हो जाते है खत्म: बीजेपी नेता

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वर्तमान सामाजिक परिपेक्ष में वैचारिक इक्तलाफात एक अहम् मुद्दा है जो पूरी दुनिया को प्रभावित करता है। यह इक्तलाफात हर दिन वायरस की तरह फ़ैल रहा है। दुनिया में अधिकाँश लोग आलमी तकरार को समाप्त कर अमन प्राप्त करना चाहते हैं। यह वास्तव में बड़ा सवाल है जिस पर दुनिया के तमाम सरकारें और संस्थानों  ने अंतहीन उर्जा और धन समर्पित किया है।

दुनिया के बहुत सारे मुस्लिम उलेमा और  विश्लेषकों  ने विश्व शांति/ अमन के लिए विभिन्न समाधान पेश किये है और इस नतीजे पर पहुंचे हैं की विश्व शांति के लिए सबसे बड़ा समाधान इस्लाम है। उनका मानना है की इस्लामिक विचारधारा शांति की धारणा से उत्पन्न होती हैं और इस्लाम विश्व शान्ति/अमन के लिए अरबी शब्द “ सलाम” के रूप में एक ही मूल साझा करता हैI

जबकि कुछ लोग इस्लाम को हिंसा, क्रूरता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद से जोड़ते हैं, पर कुरान की निम्न आयतें इस्लाम को एक अमन पसंद मज़हब बताती है: “जिसने किसी व्यक्ति को किसी के खून का बदला लेने या धरती में फसाद फ़ैलाने के अतिरिक्त किसी और कारण से मार डाला तो मानो उसने सारे ही इंसानों की हत्या कर डाली”  (५:३२)

अबू अशरफ

“जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से लडते हैं और धरती के लिए बिगाड़ पैदा  करने के लिए दौड़ धूप करते हैं, उनका बदला तो बस यही है कि उनको शूली पर चढ़ाए जाये या उनके हाथ पांव काट डाले जायें या उन्हें देश से निष्कासित कर दिया जाए। यह अपमान और तिरस्कार उनके लिए दुनिया में है और आखिरत में उनके लिए बड़ी यातना है” (५:३३)

हमारे मुल्क की तहजीब भी अमन व भाईचारे की बुनियाद पर है, जिसमें  अराजकता, फसाद का दूर दूर तक नामो निशान नहीं है । कुराने करीम के मुताबिक़ अल्लाह अमन और इन्साफ को कायम करना चाहता है और उन्हे पसंद करता है जो अमन और इन्साफ पसंद हैं।

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