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मैं आज लगभग एक वर्ष से जब भी मुम्बई होता हूँ दिन में कम से कम दो बार ‘ओला’ से सफर करता हूँ। अपने रेस्टोरेंट ‘ओसियन’ तक जाना और रात 11-1 बजे के बीच वापस आना। बहुत बार ओला ड्राइवर नाटक भी कर देता है। शायद इसलिए भी होता होगा कि शेयर में मेरा किराया 60-70 रुपया होता है। लेकिन मुझे ऐसा कभी नही हुआ कि नाम देखकर कभी मेरा ट्रिप कैंसिल हुआ हो या मुझे उसके लिए कोई अपशब्द सुनना पड़ा हो।

बल्कि जब मैं उनमें से ड्राइवर का नाम देखता तो अक्सर मुस्लिम ड्राइवर का नाम देखकर उससे पूछता की कितना कमा लेते हो, पहले कितना कमाते थे, कितने बच्चे हैं, पढ़ाते हो या नही। हर ड्राइवर का एक ही जवाब था हम लोग बहुत खुश हैं, अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाते हैं, माँ-बाप का भी ख्याल रखते हैं।

एक ड्राइवर औसतन 30-50 हज़ार रुपए महीने का कमाता है। कौनसी ऐसी नौकरी है जो मेहनत और ईमानदारी से कमाने पर भी 5वीं, 8वीं और 10वीं पास को इतनी तनख्वाह मिल सकेगा।

Courtesy: Lokbharat

कहने का अर्थ है कि किसी एक ब्यक्ति की गलती के कारण पूरे संस्थान को घसीट लेना उचित नही। धार्मिक आधार पर जब बहस पब्लिक डोमेन में शुरू हो जाएगा तो उनके कस्टमर तो बहुसंख्यक समाज से अधिक हैं। ऐसी सूरत में तो खुले ऐसे ड्राइवर पर भी कार्रवाही में उन्हें दुविधा महसूस होगी। इधर जाएं कि उधर जाएं जैसी हालत हो जाएगी।

कभी कभी जानकर की गलत हुआ है कुछ बातों को नज़रंदाज़ करने में समाज का फायदा होता है। आज ओला और उबर में मुस्लिम समाज के काफी लोग काम कर रकह हैं और खुशहाल हैं। एक नागरिक की हैसियत से रोजगार सृजन के लिए उनका धन्यवाद और आशा है कि वो अपने कस्टमर को उत्तम सेवा प्रदान करते रहेंगे।

बता दें कि हाल ही मे ओला ड्राईवर कि और से एक मुस्लिम शख्स को बुकिंग होने के बावजूद सुनसान इलाके में जबरन उतारे जाने को लेकर विवादों मे आई थी। वरिष्ठ पत्रकार असद अशरफ ने लोधी रोड स्थित बीके दत्त कॉलोनी से ‘जामिया नगर’ ले जाने के लिए ओला कैब बुक की थी। लेकिन कैब के ड्राइवर ने उन्हे ‘जामिया नगर’ ले जाने से इंकार करते हुए सुनसान इलाके में जबरन गाड़ी से उतार दिया था।

इस मामले मे ओला ने माफी मांगते हुए तत्काल ड्राईवर को हटा दिया था। इतना ही नहीं कंपनी ने  कहा था कि पिछली रात हुई चौंकाने वाली घटना के लिए हमने ड्राइवर को निकाल दिया है। ओला धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करता है और कभी भी अपने ग्राहकों और ड्राइवर के बीच किसी तरह के भेदभाव की अनुमति नहीं देता। हम आपके द्वारा खड़े हैं और घटना के लिए माफी मांगते हैं।

तनवीर आलम की कलम से…

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