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एक नया नैरेटिव है कि जिन्ना पर मत बोलो, भाजपा को फायदा हो जाएगा। प्रताड़ित मुस्लिमों के पक्ष में मत दिखो, भाजपा का फायदा हो जाएगा। तो राय साहब का इस पर कुछ मत है।

क्या है न सर की सही चीज के लिए फायदा और नुकसान की परवाह नहीं करनी चाहिए। भाजपा आज पूरे देश में काबिज है। मुल्क 1970 के दशक वाले वन पार्टी डोमिनेन्स की तरफ फिर बढ़ गया है। इस्लामिक फोबिया से भारत में ही नहीं, अमेरिका में भी चुनाव जीते जा रहे हैं। इसलिए ये फायदा नुकसान की बात छोड़िए।

बात अगर केवल जिन्ना की तस्वीर की होती तो लोग उसे उठा कर कूड़ेदान में डाल देते किसी को आपत्ति नहीं होती। ये वही मुल्क है जो गांधी की हत्या करने वाली विचारधारा के नायक को पूजता है और उसकी तस्वीर लोकतंत्र के मंदिर में लगाता है। गांधी के हत्यारों की पूजा करता है।

यह वो भारत है जहां सबकुछ चलता है। लेकिन बात केवल जिन्ना की तस्वीर की नहीं है। बात इस देश के मुस्लिमों की है। इतनी बड़ी आबादी जिसे ये संघी 1947 से ही प्रताड़ित कर रहे हैं कि बेचारे देशभक्ति साबित करते करते मरे जा रहे हैं। बात उन करोड़ों मुसलमानों की है जिन्हें इस अद्भुत भारत ने घेटो की शक्ल दे दी है।

बात केवल जिन्ना की होती तो कोई बात नहीं लेकिन बात अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय की है। इतने जन नायक जनने के बाद भी जिसकी आतंकी और देश तोड़ने की विचारधारा पैदा करने वाली फैक्ट्री के रूप में ब्रांडिंग की जा रही है।

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सर बात जिन्ना की है ही नहीं। बात हेट क्राइम का शिकार होते आसिफा की है, अखलाक की है, बात हाशिमपुरा की है, बात भागलपुर की है, बात नरोदा पाटिया की है बात ज़किया जाफरी और उसके बूढ़े पति समेत गुलबर्ग सोसाइटी की आग में जलते दर्जनो बच्चों महिलाओं पुरुषों की है। बात गुड़गांव की है जहां सैकड़ों लोगों की नमाज पढ़ती भीड़ को चंद लम्पट डरा दे रहे हैं और सवा सौ करोड़ लोगों का यह बहुलतावादी देश खामोशी से सब देख जा रहा है।

बात जिन्ना की है ही नहीं सर। बात अंसारी की है जिनके बाप दादा देश के लिए कुर्बान हुए, जिन्होंने खुद देश के सेकंड सर्वोच्च पद पर बैठ देश की सेवा की उस अंसारी के खिलाफ दो कौड़ी के सड़क छाप लोग कुछ भी कह कर बोल कर गाली देकर निकल जा रहे है और उस बुजुर्ग को चुपचाप सब सहन करना पड़ रहा है।

बात केवल जिन्ना की नहीं है सर। बात सरफराज, शाहनवाज़, आसिफ, आमिर, कासिम, उमर, सदफ, आदिल, जुनैद, अकबर, जाकिर, जैसे करोड़ों की है जो रोज बेइज्जत महसूस कर रहे हैं अपनी धार्मिक पहचान की वजह से।

इसलिए सर जब बात करोड़ों की है तो चुप नहीं रहा जा सकता। चुनावी फायदा का क्या सोचना उसे राजनीतिक दल सोचें। हो सकता है भाजपा देश के सभी राज्यों पर काबिज हो जाये। मोदी एक बार फिर पीएम बन जाएं। हो सकता है जब तक जीवित रहें पीएम बनते रहें। लेकिन ऐसा होने से या होने के डर भर से करोड़ों प्रताड़ित लोगों की बात करना हम बन्द कर दें तो सर आने वाली पीढ़ी हमे माफ नहीं करेगी सर।

सर बात जिन्ना की नहीं है, हर सुबह हम आईने में हमें अपना चेहरा देख सकने की हिम्मत बनी रहे उसके लिए बोलना जरूरी है। बात बस इतनी ही है सर। जय हिंद।

अमीश राय की कलम से..

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