रवीश कुमार: चंद्रयान -2 की असफलता के दुख को चैनलों ने चंद्रास्वामी बना दिया

10:39 am Published by:-Hindi News
वरिष्ट पत्रकार, रवीश कुमार

चंद्रयान-1 कवर करने गया था। उसके पहले कवर करते हुए काफी कुछ जान समझ लिया था। जब हम श्रीहरिकोटा गए तो छत पर दुनिया भर से आए अंतरिक्ष विज्ञान को कवर करने वाले पत्रकारों को देख सहम गया। एक तो उनके पास जो कैमरे और लेंस थे वही भारतीय चैनलों के पास नहीं थे। दूसरा उनमें से कइयों ने तीस तीस साल से अंतरिक्ष विज्ञान को कवर किया हुआ था। मैं सबका सुन रहा था। उनके अनुभव और विश्लेषण के आस-पास कहीं नहीं था। लगा कि हम अपने दर्शकों को माहौल के वर्णन से ज़्यादा क्या बता रहे हैं।

साथ में खड़े हिन्दी चैनलों के एंकरों के दंभ ने काम आसान कर दिया कि हम पहले अंतरिक्ष विज्ञान की घटना को बरसाने की होली के कवरेज में कंवर्ट करेंगे और फिर रंग और बौछारों की बात कर निकल जाएँगे। मगर जब भी उन खब्बू अंतरिक्ष विज्ञान के रिपोर्टरों पर नज़र पड़ती घबराहट होने लगती।

ख़ैर अपनी बिना आर्टिकल और प्रिपोज़िशन वाली अंग्रेज़ी के सहारे बातचीत शुरू कर दी। उन्हें भी हैरानी थी कि भारत इतना बड़ा काम करने जा रहा है। उन्हें शक था कि भारत नहीं कर पाएगा। सुबह सुबह बारिश होने लगी। तो उनका शक मज़बूत होने लगा। तभी कुछ सेकेंड या मिनट के लिए बारिश रूकती है और चंद्रयान-1 अपने सफ़र पर निकल पड़ता है। लगा कि प्रक्षेपण से निकले धुएँ के साथ हम भी होलें। तब उन सभी खब्बू पत्रकारों के पास गया और उनसे हाथ मिलाया और बधाई दी।

मज़ा आया था। एक कोर हल्का सा भींग गया था। इस बार भी कहा गया कि मैं आ जाऊँ लेकिन मनीला के कारण नहीं जा सका। ना कहते हुए गहरा अफ़सोस हो गया लेकिन ये भरोसा था कि हम चाँद पर उतर जाएँगे। मुझे ज़रा भी शक नहीं हुआ। ख़बर सुनकर चुप हो गया। सीने में दुख सा कुछ उतर गया। इसरो फिर से पहुँच जाएगा जहाँ आज नहीं पहुँच सका।

उस दौरान इसरों के वैज्ञानिकों से खूब बातचीत की थी। आज जिन महिला वैज्ञानिकों की बात हो रही हैं उनमें से कइयों से तब बात की थी। उनके बीच से हिन्दी बोलने वाली/ वाला खोजा और इसरो ने भी मदद की। तब इसरों का ज़ोर था कि जनता के बीच उनके काम की पहुँच गंभीरता से हो। काफी समय लेकर एक एक बात समझाते थे ताकि रिपोर्टिंग ठीक से हो।

उन्हीं वैज्ञानिकों ने जब हिन्दी के चैनलों के बंदरों को चाँद चाँद करते कूदते देखा होगा तो अफ़सोस तो हुआ ही होगा। वो क्या कर सकते हैं। मेरी सलाह मानें तो दिल्ली के चिल्ड्रन पार्क में चंद्रयान-2 की अनुकृति लगा दें। उसमें स्लोप ज़रूर बनाएँ ताकि न्यूज़ एंकर ससरते हुए नीचे आएँ और कह सकें कि देखो हम चाँद पर उतर आएँ हैं। राजा गार्डन के दीन दयाल पार्क में आकर आप भी चाँद पर उतर सकते हैं।

चंद्रयान -2 की असफलता के दुख को इन चैनलों ने चंद्रास्वामी बना दिया है।

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