‘उत्तर प्रदेश में गठबंधन के नए राजनीतिक प्रयोग में बसपा की मुस्लिम दुश्मनी’

देवरिया लोकसभा, जहाँ पिछली बार नियाज अहमद साहब दूसरे नम्बर पे थे, बसपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे, पक्के अम्बेडकरवादी थे। क्षेत्र में हमेशा सक्रिय होकर जनसेवा करते रहे हैं। इस बार इनकी जीत सौ प्रतिशत तय थी। लेकिन मायावती ने ऐन मौके पे इनका टिकट काटकर विनोद जायसवाल को दे दिया। अब ये कांग्रेस के सिम्बल पे चुनाव लड़ रहे हैं।

सीतापुर लोकसभा, जहाँ कैसर जहाँ पिछली बार मोदी लहर के बावजूद बहुत कम वोटों से चुनाव हारी थी। कैसर जहाँ पहले भी लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं। उत्तर प्रदेश की क़द्दावर नेता मानी जाती हैं। वैसे भी भारतीय सदन में महिलाओं की भागीदारी कम है, ख़ास तौर पे वंचित समुदाय के महिलाओं का प्रतिनिधित्व न के बराबर है। वक़्त की यही माँग थी कि कैसर जहाँ को गठबंधन की तरफ से टिकट मिलना चाहिए पर मायावती को इन सब से कोई मतलब नहीं। मोदी लहर में कड़ी टक्कर देकर चुनाव हारने वाली कैसर जहाँ को टिकट न देकर बाहरी प्रत्याशी नकुल दूबे को टिकट दे दिया गया है। बहरहाल कैसर जहाँ कांग्रेस के सिम्बल पे चुनाव लड़ रही हैं।

हिमालय की तलहटी में बसा श्रावस्ती लोकसभा। यहाँ से गठबंधन की तरफ से नदीम तरीन को टिकट मिला है। नदीम तरीन उद्योगपति हैं, गल्फ में रहते हैं। श्रावस्ती का इतिहास, वहाँ का समाज और श्रावस्ती की समस्याओं का ज़रा सा भी इन्हें इल्म नहीं है। नदीम तरीन को श्रावस्ती का कोई शख़्स नहीं जानता है। इन्हें सुश्री मायावती वहाँ से टिकट देकर फासीवाद को रोकने जा रही हैं।

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कुल मिलाकर इस लोकसभा चुनाव में मायावती ने जहाँ जहाँ टिकट बाँटा है ऐसा लगता है वो लिस्ट नागपुर से बनकर आई है। जो मुस्लिम प्रत्याशी जहाँ से जीतने का प्रबल दावेदार था उसका टिकट काटकर भाजपा को सीधा वॉकओवर देने का काम हुआ है।

गठबंधन के इस नए राजनीतिक प्रयोग में सबसे बड़ा फायदा कांग्रेस को होता दिख रहा है। उत्तर प्रदेश में धरातल पर पहुँच चुकी कांग्रेस अब ऊपर उठती दिख रही है, क्योंकि गठबंधन एवं टिकटों के सही बँटवारे न होने के कारण सपा और बसपा के कई क़द्दावर नेता कांग्रेस के संगठन से जुड़ चुके हैं। जहाँ मुसलमानों का वोट कभी सपा-बसपा के खाते में लगभग पूरा जाता था, उसका आज एक हिस्सा आज कांग्रेस के पाले में शिफ़्ट होता दिख रहा है। आने वाले दिनों में कांग्रेस मजबूती के साथ उत्तर प्रदेश में उभरेगी। यही अनुमान है।

प्रोफेसर मजीद मजाज की कलम से निजी विचार…..

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