वसीम अकरम त्यागी
लेखक मुस्लिम टुडे में सह-संपादक है

मीडिया बताये कि एक बम ब्लास्ट के आरोप कर्नल पुरोहित से उसकी रिश्तेदारी क्या है ? और बम ब्लास्ट के के झूठे आरोप में 13 साल घोर यातनाओं को झेलते हुऐ सुप्रिम कोर्ट से बाइज्जत बरी हुऐ अब्दुल कय्यूम जैसे लोगों से क्या रंजिश है ? मालेगांव ब्लास्ट के आरोप में नो साल बाद जमानत पर जेल से बाहर आये कर्नल पुरोहित का जिस तरह मीडिया और भाजपा द्वारा महिमामंडन किया जा रहा है वह क्या कुछ बयां नहीं कर रहा है। बमुश्किल कोई टीवी, अखबार, पोर्टल ऐसा होगा जिसने यह न लिखा हो “9 साल बाद जेल से बाह आये कर्नल पुरोहित” अथवा कर्नल पुरोहित रिहा हो रहे “हैं “, इस “हैं ” को मीडिया इस्तेमाल कर रहा है।

एक बम ब्लास्ट के आरोपी को सम्मान देने वाला यह मीडिया 13 साल, 15 साल, 25 साल जेल में रहकर अदालत से बाइज्जत बरी होने वाले अब्दुल कय्यूम, आदम अजमेरी, निसार अहमद की अदालत से बाइज्जत बरी की खबर को इस तरह लिखता है, सबूतों के अभाव में आतंकी कय्यूम अदालत से बरी, या नहीं मिला सबूत और आतंकी आदम अजमेरी बरी हुआ। इस फर्क को समझने की जरूरत है, मीडिया को अगर संघी आतंकवाद का समर्थन ही करना है तो खुलकर करना चाहिये, और मुसलमानों से दुश्मनी है तो उसे भी ऐलानिया करना चाहिये, यूं छिपकर कायरता का परिचय देने की क्या जरूरता है ? अब्दुल कय्यूम बरी हो जायें तो भी आतंकवादी, कर्नल पुरोहित को बम ब्लास्ट के आरोप में जमानत ही मिल जाये तो वह राष्ट्रभक्त ?

अब आरएसएस को भी चाहिये कि वह जहां भी बम फोड़े तुरंत सामने आकर उसकी जिम्मेदारी ले, यूं छिपकर बम फोड़कर और उसका आरोप मुसलमानों पर मढ़कर कुछ हासिल नहीं होने वाला।

जब कर्नल पुरोहित और साध्वी ठाकुर जैसे संघी आतंकवादियों से बम फुड़वाकर देश में नागरिकों मारना ही है तो फिर उसकी जिम्मेदारी भी लेनी सीखनी होगी।

नोट – यह लेखक के निजी विचार है, कोहराम न्यूज़ लेखक की कही किसी भी बात की ज़िम्मेदारी नही लेता 

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