ध्रुव गुप्त

स्वर्गीय अटल जी की अस्थियों के अवशेष हजारों लोटों में भरकर बूथ लेवल तक पहुंचा देने का कारनामा करने वाले मोदी जी और शाह जी ने बनियों की गौरवशाली परंपरा को अक्षुण्ण रखा है।

पुरानी कहावत थी कि बनिया वह जो बालू से भी तेल निकाल ले। अब कहा जाएगा कि बनिया वह जो मरे लोगों की अस्थियों से भी वोट खींच ले। इन दोनों भारत भाग्यविधाताओं का हुनर देख कल जीवन में पहली बार मेरे भीतर का बनियापा जागा।

रात भर सोचने के बाद मैंने निश्चय किया कि मैं अटल जी की चिता की बची हुई राख से ‘अटल ताबीज़’ बनाकर उसकी मार्केटिंग करूंगा। ताबीज़ के साथ राजनीति में सफलता की ‘जुमला गारंटी’ होगी। हर ताबीज़ की लागत होगी दस रुपए, उसे ऑनलाइन बेचने वाली कंपनियों का कमीशन होगा बीस रुपये और कीमत रखी जाएगी एक सौ तीस रुपए। यानी प्रति ताबीज़ सौ रुपयों का विशुद्ध मुनाफा।

अटल ताबीज़ स्वर्गीय अटल जी की अस्थियों के अवशेष हजारों लोटों में भरकर बूथ लेवल तक पहुंचा देने का कारनामा करने वाले मोदी…

Dhruv Gupt ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಗುರುವಾರ, ಆಗಸ್ಟ್ 23, 2018

देश में भक्तों की अनुमानित संख्या लगभग बीस करोड़ की होगी। उनमें से दस करोड़ भक्त भी अगर ताबीज़ का आर्डर करें तो कुल मुनाफा अरबों में पहुंच जाएगा। बेरोज़गार मित्रों, आईए मृत्यु के देवता यमराज का स्मरण करते हुए लाशों के इस ‘परम पावन’ व्यवसाय में भागीदारी करिए ! नाली के गैस में पकौड़ा तलकर बेचने से बेहतर रोज़गार है यह।

ताबीज़ के लिए राख की कमी कभी नहीं होने वाली। मोदी जी और शाह जी ने अपनी भाजपा के मार्गदर्शक मंडल में अस्थि-कलश के लोटे भरने के कगार पर खड़े ढेर सारे बुजुर्ग नेताओं की लाइन जो लगा रखी है।