‘कलाम’ जैसी शख़्सियत पर सवाल उठाना, सूरज को चिराग दिखाने के जैसा

6:49 pm Published by:-Hindi News

एपीजे अब्दुल कलाम भी मेरे हैं, ब्रिगेडियर उस्मान भी मेरे हैं। उस्ताद बिस्मिल्ला खान भी मेरे हैं तो वीर अब्दुल हमीद भी मेरे हैं। मौलाना आज़ाद भी मेरे हैं, सर सैय्यद अहमद खान भी मेरे हैं। अल्लामा इक़बाल भी मेरे हैं, शेखुल हिंद भी मेरे हैं। इस मुल्क के लिए जिन जिन मुसलमानों ने अपना सबकुछ त्याग कर दिया वे सब मेरे आइडियल हैं। मेरे लोगों में न कोई छोटा है और ना कोई बड़ा।

बाक़ी कलाम साहब से नफरत इसलिए नहीं कर सकता क्योंकि संघ उन्हें पसंद करता है। कुछ बातों से असहमति हो सकती है पर कलाम साहब मेरे अपने हैं जिनकी कुर्बानियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। बहुत से लोग मौलाना आज़ाद को बुरा भला कहते हैं तो इसका ये मतलब नहीं कि मौलाना आज़ाद को भूल जाएँ हम, इन्हें भी अपना मानने से इंकार कर दें।

हम जैसे इस मुल्क के मुसलमानों के लिए इस बात पे फ़ख़्र है कि इस क़ौम में कलाम साहब जैसे महान वैज्ञानिक पैदा हुए जिन्होंने मुल्क और मिल्लत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया।

कलाम साहब इस देश के अनमोल नगीने एवं भारतीय मुस्लिम समाज का गौरव हैं। मुसलमानों का आज़ाद भारत में सबसे बड़ा रोल मॉडल हैं। कलाम साहब ने इस देश के लिए जितना कुछ किया उतना कोई ख़्वाब में भी नहीं सोच सकता। तमाम सुविधाओं से सम्पन्न होने के बावजूद जिस तरह से इन्होंने फ़क़ीरी और दरवेशी में अपनी ज़िंदगी गुज़ारी वो अपने आप में एक मिसाल है।

बाकी कलाम जैसे लोग सदियों में पैदा होते हैं, इनकी शख़्सियत पर सवाल खड़ा करना सूरज को चिराग दिखाने के मानिंद है। मदरसों से सफर शुरू करके अखबार बेचकर पढ़ाई करने वाले एवं मुल्क को परमाणु सम्पन्न राष्ट्र बनाने वाले एवं देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति तक का सफर तय करने वाली शख़्सियत की योग्यता पर अगर कोई शक कर रहा है तो उसे मासूम ही कहा जा सकता है। ऐसे लोगों के लिए इक़बाल अशर का ये शेर,

“हमीं ने अपने चरागों को पायमाल किया 
हमीं है अब कफ़ ए अफ़सोस मलने वाले लोग….!!”

प्रोफेसर मजीद मजाज की कलम से….

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