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आदरणीय

नरेन्द्र दामोदर मोदी
(प्रधानमंत्री भारत)

महोदय इन दिनों सोशल मीडिया पर एक तस्वीर घूम रही है जिसमें आप रिलायंस के JIO सिम का प्रचार करते नजर आये हैं। अंबानी के साथ आपके क्या रिश्ते हैं क्या नहीं मैं इस बाबत कोई बात नहीं करना चाहता। मेरी शिकायत दूसरी तस्वीर को लेकर है वह तस्वीर एक महिला की है जो बुरी तरह घायल है। वह महिला हरियाणा के मे तावडू कस्बे के गांव डिंगरहेडी की है, जिसने बीते 24 अगस्त की रात को अपनी आंखों के सामने अपने परिवार वालों का कत्ल होते हुऐ बिल्कुल उसी तरह देखा जिस तरह आपके मुख्यमंत्री रहते जकिया जाफरी ने अपने पति अहसान जाफरी का कत्ल होते हुऐ देखा था। मोदी साब इस महिला ने अपने बच्चियों के साथ सामूहिक बलात्कार होते हुऐ भी देखा है।

मैं यह चिट्ठी आपको इसलिये लिख रहा हूं क्योकि जिस राज्य में भी आप चुनाव प्रचार करने जाते हैं वहां सबसे पहले ‘गुड गवरनेंस’ का नारा लगाते हैं, जिस राज्य की ये महिला है उनके राज्य में भी आपने यही नारा लगाया था। चूंकि आप प्रधानमंत्री हैं और जिस राज्य का यह मामला है वहां भी आपकी ही सरकार है इसलिये आपके गुड गवरनेंस का नारा कहीं ‘जुमला’ न बन जाये यह चिट्ठी इसीलिये लिखी जा रही है। हो सकता है आपको इस जघन्य अपराध की जानकारी न हो क्योंकि मुख्यधारा की मीडिया ने यह घटना किसी दूसरे देश की घटना समझकर दबा दी है। इसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि पीड़ित अल्पसंख्यक समुजदाय हैं जिसमें मीडिया को मसाला नहीं मिला।

बहरहाल वैसे ऐसा भी नहीं है कि इस घटना की आपको जानकारी न हो क्योंकि खट्टर साहब ने आपसे जरूर इस घटना का जिक्र कर दिया होगा। मोदी जी निर्भया कांड के बाद सरकारों ने एक नई परंपरा शुरु की थी जिसमें बलात्कार पीड़ित को मुआवजा दिया जाता था। मगर मेवात कांड में ऐसा नहीं हो पाया दो हत्याऐं और दो युवतियों के साथ सामूहिक बलात्कार के बाद भी सरकार ने फंड न होने का रोना रो दिया। हालांकि इसी सरकार ने दो सप्ताह पहले ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक को ढ़ाई करोड़ रुपया देने का एलान किया था, राज्य के एक विधायक ने तो पत्नि को पांच करोड़ की गाड़ी गिफ्ट थी और उसी गाड़ी ने एक एक्सीडेंट भी कर दिया था। फिर भी सरकार कहती है कि उसके पास मेवात पीड़ितों को मुआवजा देने के लिये रकम नहीं है। मोदी साहब यह देश नहीं जानता था कि सेल्फी कैसे ली जाती है ? आपने इस देश को सेल्फी लेना सिखाया, न सिर्फ सिखाया बल्कि “सेल्फी विद डॉटर” लेना सिखाया। इसी राज्य की एक बेटी ने रियो ओलंपिक में इस देश की लाज रखी, मगर इसी राज्य की दो बेटियों के साथ सामूहिक बलात्कार उन्हीं के परिवार वालो के सामने किया गया। आपको सेल्फी विद डॉटर का बहुत शौक है क्या आप बलात्कार पीड़ित बच्चियों के साथ सेल्फी लेंगे ? मोदी जी एक ओर तस्वीर मेरे जहन में घूम रही है और वह तस्वीर उस दिन की है जब ओलंपिक में पदक जीतने वाली देश की बेटी को आपने अखबारों में विज्ञापन छपवाकर बधाई दी थी ? आप अपनी उपलब्धियां बहुत गिनाते हैं, वे झूठी हैं या सच्ची इस पर बहस नहीं करुंगा। मगर सेल्फी विद डॉटर सिखाने वाला शख्स इतना कमजोर होगा कि बेटियों के साथ बलात्कार होते हुऐ देखेगा यह तो सोचा ही नहीं था। आप हर एक राज्य में भ्रष्टाचार और लूटमार बताते हो मगर सर हरियाणा तो आपका ही राज्य है जिसके बारे में आप दो शब्द नहीं बोल पाये ? क्या करें मेवात के लोग क्या जंतर मंतर पर आकर बैठ जायें ? क्या उसी तरह आंदोलन करें जिस तरह इस राज्य में ‘आंदोलन’ होते हैं ? क्योंकि पुलिस अधिकारी ने इस घटना पर कहा कि “जबसे सृष्टी बनी है तबसे अपराध हो रहा है। मां सीता भी नहीं बच पाई थीं। बिना पासपोर्ट किडनैपर्स उन्हें दूसरे देश ले जाने में सफ़ल रहे थे तो हम और आप अपराध से कैसे अछूते रह सकते हैं?” क्या आप पुलिस के इस तर्क से संतुष्ट हैं ? पुलिस ने इस घटना में सिर्फ चार लोगों को गिरफ्तार किया है, क्या महज चार लोग इतनना जघन्य अपराध कर सकते हैं ? आखिर ये लीपापौती किसलिये हो रही है राज्य के पास मुआवजा देने के लिये पैसा नहीं है मगर इनाम देने के लिये पैसे की कोई कमी नहीं है ? मगर आप खामोश हैं शायद खामोशी को ही आपने राजधर्म मान लिया है ? हालांकि आपकी देख रेख में बलात्कार हो जाना कोई बड़ी बात नहीं है, हमें ‘गुजरात’ के बलात्कार याद हैं, हमें वह सामूहिक बलात्कार पीड़ित भी याद है जिसने कहा था कि फलां, फलां, फलां के बाद वह गिनती भूल गई थी। मगर हम आपको ‘गुजरात’ वाला नहीं मानते हम आपको दिल्ली वाला मानता हैं उसी दिल्ली का जो दिसंबर 2013 में पूरी तरह से बलात्कारियों के खिलाफ जल उठी थी। मिस्टर प्राईम मिनिस्टर मेवात आपकी तरफ देख रहा है, मेवात इंसाफ चाहता है, वे बच्चियां इंसाफ चाहती हैं जिनके परिजनों का कत्ल हुआ और उनके साथ हैवानियत हुई। क्या इंसाफ की इस जंग में आप उन्हें इंसाफ दिलायेंगे ? क्या आप खुद को ‘गुजरात’ के बजाय ‘दिल्ली’ वाला साबित कर पायेंगे ?

आपका शुभकांक्षी

वसीम अकरम त्यागी

#Justice_For_Taudu_Victims

नोट – यह लेखक के निजी विचार है कोहराम न्यूज़ किसी बात की ज़िम्मेदारी नही लेता 

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