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आदरणीय
अखिलेश यादव
मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश

देश मे इन दिनों दो ही बातें चर्चा का विषय है एक तो आपका ‘विकास’ और दूसरा नोटबंदी से बनी हुई आफत जो कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। उत्तर प्रदेश में विकास हुआ है इसमें कोई दो राय नहीं मगर इतना भी नहीं हुआ जितना ढोल पीटा गया है। आपकी सरकार ने अल्पसंख्यको से किये गये एक भी वादे को पूरा नही किया है, इसके बावजूद भी अगर आप विकास रथ निकालते हैं तो हैरानी तो होती ही है। हो सकता है अल्पसंख्यकों का विकास आपको शोभा नहीं देता हो। बात दरअस्ल यह है कि आपने दो दिन पहले घोषणा की थी कि नोटबंदी कारण मरने वाले को दो लाख रुपया मुआवजा दिया जायेगा।

आपकी यह पहल सचमुच काबिल ऐ तारीफ है दरअस्ल यह काम तो केन्द्र सरकार को करना चाहिये था आप कर रहे हैं यह अच्छी बात है। आपसे एक ओर दरख्वास्त करनी है कि पिछले महीने गाजियाबाद में एक फैक्ट्री मे आग लगने से 13 लोगो की मौत हो गई थी इनमे से पांच मृतक आपकी सरकार मे श्रम एंव सेवायोजन मंत्री शाहिद मंजूर के विधान सभा क्षेत्र से थे। इत्तेफाक तो देखिये कि मरने वाले भी मजदूर ही थे। आपकी सरकार ने उन्हें दो लाख रूपया मुआवजा दिया यह मुआवजा बेहद कम है, यकीन आपकी सरकार मुआवदा देने मे कोई कंजूसी नही करती आपने तो ‘दादरी’ के हत्यारोपी रवि तक को भी डेंगू से मरने के कारण बीस लाख रुपया और मुआवजा और नौकरी दी है। फिर इन मजदूरो से कौनसा बैर था ? जबकि ये किसी की हत्या में भी शामिल नही थे।

अब मुजफ्फरनगर की तरफ आता हूं 2013 मे हुऐ सांप्रदायिक दंगे की भेंट चढ़े लोगो को आपने मुआवजा दिया, जो लोग लापता थे आपने पिछले दिनो उन्हें भी मृत मानकरे मुआवजा दे दिया। मगर मिस्टर चीफ मिनिस्टर साहब लापता हुऐ लोगो में एक पूर्व सैनिक मोहम्मद नफीस भी था। नफीस मुजफ्फरनगर जनपद के ग्राम तोड्डा कल्याणपुर के निवासी थे। भारतीय सेना की बॉम्बे इंजीनियर्स ग्रुप के पूर्व सैनिक नफीस अहमद जी मुज़फ्फरनगर दंगों के दौरान पूरा बिजलीघर मुज़फ्फरनगर पर सीनियर सिक्यूरिटी ऑफिसर की पद पर कार्यरत थे ड्यूटी से ही लापता हो गए और उनका आज तक पता नहीं चला है परिवार वालों को आशंका है की ड्यूटी पर ही दंगाईयों ने उनकी हत्या कर दी गयी थी और लाश ‘ठिकाने’ लगा दी। परिवार वालों ने कानून का हर दरवाज़ा खटखटाया। खोजने की हर मुमकिन कोशिश की। मगर उन्हें सिर्फ मायूसी ही हाथ लगी। दंगे में लापता हुऐ पूर्व सैनिक नफीस की ‘आधी विधवा’ इन दिनो बीमार है। सरहद पर देश रखाने वाला नफीस अपनी जान अपने ही देश के लोगो से नही बचा सका। आज नफीस की विधवा किडनी खराब हो चुकी है, आर्थिक तंगी के कारण वह अपना इलाज भी नहीं करा पा रही है, डायलिसिस नही हो पा रही है। सीमा पर देश रखाने वाले नफीस के परिवार को ऐसे भी दिन देखने पड़ेंगे यह उसने कभी नही सोचा होगा।

मिस्टर चीफ मिनिस्टर क्या आपकी जिम्मेदारी खत्म हो चुकी है ? जब आप हत्यारोपी को मुआवजा दे सकते हैं तो फिर पूर्व सैनिक के साथ सोतेला व्यवहार क्यों किया गया ? क्यों नही नफीस को मृत उनके परिवार को मुआवजा दिया गया ? आप तो हर किसी घटना का मुंह मुआवजा देकर भरना जानते हैं। आप उन्हें भी मुआवजा दे देते हैं जो किसी भी सूरत मे मुआवजा पाने के हकदार ही नही हैं। इस सबके बावजूद आप एक पूर्व सैनिक की ‘आधी विधवा’ की आहें क्या आपके कानो तक पहुंचती ? आपने तो उन लोगो को भी मुआवजा देने का एलान किया है जिनकी मौत के लिये राज्य नही बल्कि केन्द्र सरकार जिम्मेदार है। फिर मुजफ्फरनगर ? उसके लापता हुआ पूर्व सैनिक के साथ यह भेदभाव क्यो बरता है। आपको मालूम है अखिलेश साहब जिस दिन से नफीस गायब हुआ है उसी दिन से उनके परिवार वालो के बुरे दिन शुरु हो गये और हालात यहां तक खराब हुऐ कि उन्हे अपना घर तक बेचना पड़ गया। यह सिर्फ एक शख्श नफीस के लापता होने के कारण हुआ है। आपकी सरकार उन्हें लापता मानने को ही तैयार ही नही है। ऐसा क्यों ? आपने पिछले दिनो लापता हुऐ लोगो को मुआवजा दिया था मगर उस सूची में भी नफीस का नाम नही था। आपसे गुजारिश है कि आप नफीस के परिवार को भी मुआवजा दें, ताकि उस मुआवजे से नफीस की आधी विधवा के जख्मों पर मरहम लगाया जा सके।

वसीम अकरम त्यागी लेखक मुस्लिम टुडे में सह-संपादक है
वसीम अकरम त्यागी
लेखक मुस्लिम टुडे में सह-संपादक है

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