Saturday, November 27, 2021

अजित अंजुम: बलात्कारी हो हिन्दू तो खून नहीं खौलता, पीड़िता मुसलमान हो तो सन्नाटा मार जाता है

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मैं एक हफ्ते से बाहर था। सोशल मीडिया और मीडिया से भी लगभग दूर। आज ही लौटा। आज ही जाना कि मंदसौर में क्या हुआ। मैंने जैसे ही मनीषा पांडेय की एक पोस्ट शेयर की,  हिंदुत्ववादी भाई लोग आ गए मंदसौर पर जवाब मांगने। मुझे पता है कि मैं आज आम की बात भी लिखूंगा तो वो मंदसौर की बात करेंगे। मैं अपनी यात्राओं के बारे में लिखूंगा तो मंदसौर का हिसाब मुझसे मांगेंगे। गोया वो ठहरे बहुत बड़े मानवतावादी और मैं बलात्कारियों का घोर समर्थक।

ये वही लोग हैं, जो कठुआ के बलात्कारियों को अपना ‘ धर्म भाई ‘ मानकर उनके पक्ष में खड़े थे। आंख मूंदकर मुहिम चला रहे थे। देश में हर रोज सौ से ज्यादा मासूमों को शिकार बनाया जाता है लेकिन इनमें से ज्यादातर तभी हंगामा मचाते हैं, जब बलात्कारी कोई मुस्लिम होता है। बलात्कारी अगर हिन्दू हुआ तो इनका खून नहीं खौलता। पीड़िता मुसलमान हुई तो भी इन्हें सन्नाटा मार जाता है।

तो उनके लिए भी ये जवाब है:

आपकी कट्टरता आपको मुबारक। मेरे लिए किसी भी बेटी के साथ बलात्कार करने वाला दरिंदा फांसी का हकदार है,  चाहे वो हिंदू हो या मुसलमान। मैंने पचासों पोस्ट लिखी है ऐसी घटनाओं पर, पचासों घंटे बहस की है क्योंकि बच्चियों के साथ बलात्कार की खबर मुझे विचलित करती है। प्यारी सी बच्ची के साथ ऐसी हरकत करने वालों के बारे में सोचते हुए मैं आक्रोश से भर उठता हूं। कई घटनाओं के बाद तो मैं घंटों उस बच्ची के बारे में सोचता रहता हूं। उस दरिंदे की मानसिकता के बारे सोचता हूँ। फिर कोसता हूँ मर्दों के भीतर पलते हैवानों को,  जो मासूम बेटियों को भी नहीं बख्शते।

जब भी 2 साल,  4 साल या 6 साल की बच्ची के साथ हैवानियत की ख़बर पढ़ता – सुनता हूँ, रूह कांप जाती है। मंदसौर के दरिंदे दबोचे गए हैं। लोगों का गुस्सा प्रदर्शन और विरोध की शक्ल में फूट रहा है। आरोपी मुस्लिम हैं और शहर के मुसलमानों ने भी बलात्कारियों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। पूरा शहर उबल रहा है। इसमें हिन्दू भी हैं और मुसलमान भी।

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Pankaj Chaturvedi ने अभी ने बताया कि ‘जो मजिस्ट्रेट सबसे पहले अस्पताल पहुंच कर 164 के बयान दर्ज की, वे भी मुस्लिम है। सारे शहर के काजी मौलवी प्रदर्शन में आगे है। न कब्र को जमीन देंगे न फातिया होगा न वकील केस लड़ेगा’। फांसी की मांग कर रहे मुस्लिमों में अब तक कोई ऐसा नहीं दिखा, जो उस दरिंदे को बचाने आगे आया हो।

कौम के नाम पर कोई मुसलमान उस बलात्कारी की ढाल बनकर सामने नहीं आया, उसे छोड़ने और बचाने के लिए कोई जुलूस नहीं निकाल रहा है तो फिर कठुआ से तुलना बेमानी है। तुलना होती अगर शहर के इमाम, मौलवी और मौलाना बलात्कारियों के पक्ष में तकरीरें करते। कठुआ के आरोपियों मरे बचाने के लिए तिरंगे के साथ जुलूस निकला। बीजेपी के दो मंत्रियों को आरोपियों के पक्ष में बयान देने और प्रदर्शन में शामिल होने की वजह से कुर्सी गँवानी पड़ी। मंदसौर में ऐसा कुछ हुआ क्या ?

मासूमों के बलात्कारियों के लिए मैं हमेशा फांसी का पक्षधर हूं। फांसी के विरोध में दिए जाने वाले तमाम तर्कों से सहमत-असहमत होने के बावजूद मेरी राय फांसी के पक्ष में ही है लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है तेजी से जांच, गिरफ्तारी, फ़ास्ट ट्रैक सुनवाई,  पीड़ित परिवार और गवाहों का प्रोटेक्शन और पुलिस की चुस्ती।

सालों- साल तक मामला लटका रहता है। कनविक्शन रेट बहुत खराब है। ज्यादातर मामलों में बच्ची के जानकार या रिश्तेदार ही दरिंदगी कर गुजरते हैं। हर रोज सौ से ज्यादा ऐसी घटनाएं होती हैं।।

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