दीप पाठक

पचास हजार के लेन देन में इतने हार्डल डाल दिये मोदी सरकार ने कि लोगों को पैसा खाते से खाते में ट्रांसफर करने पर बाध्य होना पड़ रहा है, जबरिया डिजीटल कैशलैस ट्रांजिक्शन के लिये बाध्य कर दिया है !

इस वजह से रियल स्टेट में भारी गिरावट आयी है शहरों में बनी मल्टी स्टोरी बिल्डिंगे खाली हैं गाहक नी मिल रे नये प्लाट नी बिक रे ! मिडिल क्लास अपने फ्यूचर प्लान को लेकर आशंकित है, सरकार से इतर छोटे-मोटे काम बंद स्थगित पड़े हैं,मजूरी के लाले पड़े हैं !

पैसा एक तरफ 50 हजार से फूलकर 80 करोड़ हो जा रा, कहीं 14 हजार करोड़ की करेंसी किसी महेश शाह के पास मिली वो कहां कैसे कब रिटर्न हो गयी !

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मुद्रा के परिचलन में सरकार ने खुद बाधा डाल दी है बड़ी फीगर के लेन-देन के लिए तो बैंक, कार्पोरेट और सरकार मिलकर खुद रास्ते सुगम बना री इसमें मौद्रिक संस्था रिजर्व बैंक खुद दो नंबरी मुनीम बनी हुई है !

छोटे परिचलन में सरकार बाधा डालेगी तो क्या होगा, इंडस्ट्रियल ग्रोथ नीचे गिरेगी, अनआर्गनाईज सेक्टर और छोटे मझोले व्वसाय चौपट होंगे !

इस सरकार की ये चौपट आर्थिक समझ मौजूदा संकट को सोचनीय ढंग से बढा रही है ! गांव-देहात-कस्बे-शहर हर जगह ये मुद्रा लेन देन बाधा जारी है ! वेतनभोगी शहरी इसको भले न महसूस कर रहा हो पर वस्तु सेवा के समय पर न मिलने का कुप्रभाव वो भी झेलेगा ही !

इन्होंने मुद्रा की तरलता (लिक्विडिटी आफ मनी ) को बाधित किया है नतीजे में मुद्रा जब गाढ़ी हो जाती है तो वह महज एक सर्कल में धीमे प्रवाहित होती है नीचे करोड़ों करोड़ आबादी तक उसका प्रवाह मंद पड़ जाता है लेन देन काम मजूरी सेवाऐं बाधित होने लगतीं हैं !

भारत का अगला आर्थिक चिठ्ठा और हताशाजनक होगा ! सरकार की मौद्रिक संस्थाओं से लोग इस पैसे को बाहर लायें व्यापारी अपनी साख हुण्डियां फिर से कायम करें ,कैश लेन देन अपनी कच्ची लिखत पर करें ! वरना ये लाखों करोड़ रुपये बैंकों में पड़े रहेंगे और सरकार को एक फर्जी फीगर मिलेगी कि भारत में बचत बढी है और वो पुन: दो हजार का नोट बंद कर देगी आपके पैसे की विशाल फीगर को उठाकर भारी उद्योग सब्सिटी दे देगी,

अब होता ही है सरकारी कर्मचारी को माना 40 हजार तनखा मिलती है महीने की जरुरत 15 हजार वो विड्रा करता है बाकी बैंक में बचत रहेगी चार छै महीने में लाख डेड़ लाख बच ही जायेंगे आर्थिक इंटलीजेंस आपके पैसे को आपकी जरुरत से अधिक मानकर सरकार को कोई भी आईडिया दे सकता है !

इसलिए मैं बार बार कह रहा हूं नकद पैसा अपने पास रखो घर में राशन इंधन रखो मुद्रा की तरलता को बनाए रखो ! बैंको को फुला के कुप्पा मत बनाओ अर्थव्यवस्था फट जायेगी और आपकी बचत छीज जायेगी, नतीजे में इनफ्लेशन झेलो, सौ रुपये की असल कीमत सत्तर रुपया हो जायेगी !

गुफा अर्थशास्त्री की सलाह मानो, जरुरी नहीं, पी चिदंबरम, मनमोहन सिंह,या यशवंत सिन्हा, रघुराम राजन इकानामिकल वीकली जैसी ग्लेज पेपर पत्रिका में अंगरेजी में आर्टिकल लिखे उसमें उपर नीचे जाते तीर वाले ग्राफ बने हों तभी आपको लगे कि हां ये ही जानकार लोग हैं !

जिसके पास पैसा होता है वही अर्थ का जानकार हो ऐसा नहीं होता ,जिसके पास नी होता वो भी जानता है !
मुद्रा मूल्य का मापक भर है अब वो नोट हो सिक्का हो, सीप हो ,कौड़ी हो….

लेखक परिचय – लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार है तथा घुमक्कड़ी में दिलचस्पी रखते है देश के कोने कोने से परिचित दीप पाठक पहाड़ तथा पहाड़ी लोगो की समस्याएं उठाने में सवैद आगे रहते है

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