Tuesday, May 17, 2022

हे नसीरुद्दीन तुम न तो गाय हो, न ही कोई अन्य वन्य जीव, आखिर तुम कैसे डर सकते हो ?

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सीरुद्दीन शाह तुम कैसे डर सकते हो, तुम्हें डरने का हक़ किसने दे दिया ? क्या तुम्हें पता नहीं कि तुम्हारा नाम अरबी में है ? तुम क्या समझे थे कि बॉलीवुड में हो लिबरल हो या किसी धर्म में विश्वास नहीं रखते या तुम्हारी पत्नी एक हिन्दू ब्राम्हण है तो तुम्हें सिर्फ इतने भर से डरने का हक़ मिल जायेगा ? बड़े मियाँ तुम दोयम दर्जे के नागरिक हो तुम्हें डरने की ज़रूरत नहीं है क्यूँ कि तुम उस समुदाय से विलॉन्ग करते हो जिससे बहुसंख्यकों को डराकर सत्ता प्राप्त की गई है, जिससे बहुसंख्यकों को डराकर सच्चे झूठे किस्से सुनाकर वोट बैंक बनाया जाता है फिर तुम कैसे डर सकते हो ? आख़िर तुम डरने की सोच भी कैसे सकते हो ।

क्या तुम्हें पता नहीं है कि सबसे बड़ा ख़तरा तुम पर नहीं हिन्दू धर्म पर है फिर तुम क्यूँ डर रहे हो, और अगर तुम डर भी रहे हो तो तुम्हारी चिन्ता कौन करे … पहले धर्म बचायें, देश बचायें या तुमको बचाया जाये ? ख़तरा तुम पर नहीं राष्ट्र पर है, इसी लिए राष्ट्रवादी सरकार सत्ता में आई है उसका दायित्व है पहले राष्ट्र को बचाये । फिर चाहे राष्ट्र को बचाने के लिए क्यूँ न लोगों की बलि चढ़ानी पड़े चढ़ाई जायेगी । इसके पहले भी राष्ट्र पर सिखों का ख़तरा था तो चौरासी में सिखों की बलि देकर राष्ट्र को बचाया गया था, इसी तरह गुजरात, नेली, मुरादाबाद, बंबई, मुजफ्फर नगर, लक्षमण पुर बाथे आदि में समय समय पर बलि देकर राष्ट्र का डर दूर किया गया । कश्मीर, मणिपुर, बस्तर, गढ़ चिरौली में राष्ट्र को बचाने का कार्य अनवरत चलता ही रहता है । इसके अलावा जब जब बहु संख्यकों में डर व्याप्त होता है तब तब कुछ लोगों का फर्जी एनकाउंर करके स्थिति को सामान्य करने का प्रयास भी किया जाता है ।

हे नसीरुद्दीन तुम न तो गाय हो, न ही कोई अन्य वन्य जीव हो आखिर तुम कैसे डर सकते हो ? क्या तुम्हें पता नहीं है इस वक़्त वे सत्ता में हैं जिनके लिए गाय सर्वोपरि है और आज कल गाय सबसे ज़्यादा ख़तरे में है इसलिए अभी गाय बचाओ प्रोजेक्ट पर कार्य चल रहा है । देश की सनातन संस्कृति पर ख़तरा है, जंगली जानवरों बाघों, हिरणों, शेरों तेंदुओं, गिद्धों पर ख़तरा है फिर भी तुम कहते हो तुम्हें डर लग रहा है ? अरे मूर्ख …. अगर तुम ही डर गए और तुम्हारे डर को स्वीकार लिया गया तो बहु संख्यकों को किससे डराया जायेगा वोटों का धुर्वीकरण कैसे किया जायेगा, सत्ता कैसे प्राप्त होगी ।

https://youtu.be/Uh18VUfQJvA

चलो मान लिया तुम्हें सच में डर लग ही रहा है तो क्या चुप नहीं रह सकते … डर का ऐलान करके खेल ख़राब करना ज़रूरी है ? चलो मान लिया कि तुम्हें सच में डर लग रहा है तो क्या तुम्हारा डर प्रधानमंत्री के डर से बड़ा है ? क्या तुम्हें पता है प्रधानमंत्री की जान पर ख़तरा है, मुख्य मंत्रियों की जान पर ख़तरा है, नेताओं की जान पर ख़तरा है क्या तुम खुदको प्रधान मंत्री और मुख्य मंत्री समझते हो जो तुम्हारी जान को ख़तरा है ? तुम्हें पता भी है कि इस वक़्त सबसे ज़्यादा डर सिर्फ प्रधानमंत्री को है उसे डर है कोई सरकार विरोधी नारे न लगा दे, उसे डर है कहीं किसी रैली में कोई काला झंडा न लहरा दे, उसे डर है कहीं कोई मीडिया वाला कोई सवाल न पूछ ले । ऐसे में तुम कह रहे हो तुम्हें डर लग रहा तुम्हें शर्म आनी चाहिए ।

देखो यूपी पुलिस का जवान मारा गया फिर भी यूपी पुलिस ने अपने जवानों का या अपने भीतर के डर को ऊपर नहीं आने दिया बल्कि गाय का और गाय के नाम पर बहु संख्यकों के डर को प्रार्थमिकता दी और अपराधियों को बचाने में जी जान लगा दी । ऐसे में तुम्हारा डर दो कौड़ी का है । तुम डरो मगर डर का इज़हार मत करो बल्कि उवेसी की तरह उस डर का डट के सामना करो मुहतोड़ जवाब दो ताकि मीडिया के थ्रू उस डर को बहु संख्यकों के मन में बैठाया जाये और और फिर राम राज लाया जाये ।

अबरार खान की कलम से उनके निजी विचार…

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